
द वॉयस ऑफ बिहार | भागलपुर (20 फरवरी 2026)
भागलपुर जिले में बच्चों के सुनहरे भविष्य और सामाजिक कुरीतियों के अंत के लिए एक बड़ी पहल की गई है। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) ने राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण और महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के निर्देश पर 100 दिवसीय ‘बाल विवाह मुक्त भारत’ अभियान की औपचारिक शुरुआत कर दी है।
जागरूकता ही बचाव: व्यवहार न्यायालय से हुई शुरुआत
अभियान का शुभारंभ व्यवहार न्यायालय परिसर स्थित डीएलएसए कार्यालय में किया गया। इस दौरान अधिकारियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने एक स्वर में बाल विवाह को समाज के लिए अभिशाप बताया:
- कानूनी प्रावधान: विशेषज्ञों ने जोर दिया कि बाल विवाह न केवल अपराध है, बल्कि यह बच्चों (खासकर बालिकाओं) के स्वास्थ्य, शिक्षा और मानसिक विकास को पूरी तरह तबाह कर देता है।
- हेल्पलाइन नंबर: यदि कहीं भी बाल विवाह की आशंका हो, तो आम नागरिक टोल-फ्री नंबर 15100 या चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 पर सूचना दे सकते हैं। सूचना मिलते ही प्रशासन त्वरित कार्रवाई करेगा।
पंचायत स्तर तक पहुंचेगा अभियान
आने वाले 100 दिनों के भीतर जिले के कोने-कोने में जागरूकता की अलख जगाई जाएगी:
- गतिविधियां: गांवों और शहरी क्षेत्रों में नुक्कड़ नाटक, विधिक साक्षरता शिविर और जागरूकता रैलियां आयोजित की जाएंगी।
- विशेष फोकस: आंगनबाड़ी केंद्रों और स्कूलों के माध्यम से किशोर-किशोरियों को उनके अधिकारों के प्रति सजग किया जाएगा और उन्हें शिक्षा से जोड़ने पर जोर दिया जाएगा।
मानसिकता में बदलाव की अपील
कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि केवल सख्त कानून से बाल विवाह नहीं रुकेगा, बल्कि इसके लिए समाज की सोच बदलना अनिवार्य है।
”समाज के हर वर्ग को इस अभियान से जुड़ना होगा ताकि भागलपुर को बाल विवाह मुक्त बनाया जा सके। बच्चों को हाथ में किताब दें, न कि गृहस्थी का बोझ।” – डीएलएसए पदाधिकारी
इस अभियान से जिले में एक सकारात्मक माहौल बनता दिख रहा है। उम्मीद है कि विधिक साक्षरता और सामाजिक सक्रियता के समन्वय से भागलपुर इस कुप्रथा को जड़ से उखाड़ने में सफल होगा।
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