भिक्षावृत्ति मुक्त बिहार की ओर बड़ा कदम: पटना में सर्वेक्षकों को मिला विशेष ‘डिजिटल’ प्रशिक्षण; अब ऐप के जरिए होगा भिक्षुओं का डेटा संग्रह और पुनर्वास

पटना | 26 फरवरी, 2026 बिहार को भिक्षावृत्ति के अभिशाप से मुक्त करने और सड़कों पर जीवन बसर करने वालों को मुख्यधारा में लाने के लिए राज्य सरकार ने एक बड़ी पहल शुरू की है। बुधवार को पटना स्थित ‘सक्षम’ सभागार में ‘मुख्यमंत्री भिक्षावृत्ति निवारण योजना’ और केंद्र सरकार की ‘स्माईल’ (SMILE) योजना के तहत राज्य स्तरीय एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य उन सर्वेक्षकों को प्रशिक्षित करना था, जो राज्य भर में घूम-घूम कर भिक्षावृत्ति में संलिप्त लोगों का वैज्ञानिक और संवेदनशील तरीके से डेटा तैयार करेंगे।

डिजिटल सर्वे: मोबाइल ऐप से बनेगी ‘किस्मत’ की नई लकीर

​इस अभियान की सबसे बड़ी विशेषता इसकी तकनीकी कार्यप्रणाली है। अब सर्वेक्षण केवल कागजों तक सीमित नहीं रहेगा।

  • स्मार्ट सर्वेक्षण: सभी सर्वेक्षकों को एक विशेष मोबाइल ऐप का प्रशिक्षण दिया गया है।
  • डेटा सुरक्षा: ऐप के माध्यम से भिक्षावृत्ति में लिप्त व्यक्तियों की फोटोग्राफी, उनका स्थान (Location) और उनके पारिवारिक विवरण को डिजिटल रूप से दर्ज किया जाएगा।
  • रियल-टाइम रिपोर्टिंग: डिजिटल डेटा होने के कारण विभाग को तुरंत पता चल सकेगा कि किस जिले के किस क्षेत्र में कितने लोग भिक्षावृत्ति में हैं, जिससे राहत और बचाव कार्यों में तेजी आएगी।

प्रशिक्षण के मुख्य स्तंभ: संवेदनशीलता और सटीक पहचान

​प्रशिक्षण के दौरान सर्वेक्षकों को यह समझाया गया कि भिक्षावृत्ति केवल एक सामाजिक समस्या नहीं, बल्कि एक मानवीय त्रासदी है। प्रशिक्षण में इन बिंदुओं पर विशेष जोर दिया गया:

  1. सटीक वर्गीकरण: बच्चे, महिलाएं, बुजुर्ग और दिव्यांगजनों की अलग-अलग पहचान करना, ताकि उन्हें उनकी आवश्यकता के अनुसार सहायता दी जा सके।
  2. गोपनीयता और नैतिकता: सर्वे के दौरान व्यक्ति के आत्मसम्मान और उनकी जानकारी की गोपनीयता बनाए रखना अनिवार्य है।
  3. कारणों का विश्लेषण: क्या व्यक्ति गरीबी के कारण भीख मांग रहा है, या वह किसी संगठित गिरोह (Begging Mafia), नशाखोरी या मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्या का शिकार है? सर्वेक्षक इन बारीक कारणों का भी पता लगाएंगे।
  4. पुनर्वास का खाका: सर्वे के बाद उन्हें केवल हटाना नहीं, बल्कि ‘स्माईल’ योजना के तहत कौशल विकास, आर्थिक सहायता और स्वरोजगार से जोड़ना मुख्य लक्ष्य है।

प्रमुख अधिकारियों की मौजूदगी

​प्रशिक्षण कार्यक्रम में विभाग के आला अधिकारी मौजूद रहे, जिन्होंने सर्वेक्षकों का मार्गदर्शन किया। इनमें वरीय प्रशासी पदाधिकारी (सक्षम) पिंकी कुमारी, उप मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी सुनील कुमार, अविनाश कुमार, सुशील कुमार श्रीवास्तव और शाहनवाज अहमद प्रमुख थे। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि इस अभियान का उद्देश्य केवल भिक्षावृत्ति को रोकना नहीं, बल्कि उन व्यक्तियों का सम्मानजनक पुनर्वास सुनिश्चित करना है।

VOB का नजरिया: क्या बदल पाएगी तस्वीर?

​बिहार में भिक्षावृत्ति के पीछे कई बार गरीबी से अधिक ‘मजबूरी’ और ‘माफिया तंत्र’ का हाथ होता है। ‘सक्षम’ सभागार में हुआ यह प्रशिक्षण इस ओर एक सकारात्मक कदम है कि सरकार अब ‘डेटा-संचालित’ (Data-driven) समाधान की ओर बढ़ रही है। यदि मोबाइल ऐप के जरिए जुटाए गए आंकड़ों का सही इस्तेमाल कर उन्हें कौशल विकास से जोड़ा गया, तो आने वाले समय में बिहार की सड़कों पर कोई बच्चा हाथ फैलाए नहीं, बल्कि हाथ में किताब लिए नजर आ सकता है।

ब्यूरो रिपोर्ट, द वॉयस ऑफ बिहार (VOB)।

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