मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत बोले – मिशन मोड में चलेगा अभियान
पटना।बिहार की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखने के लिए राज्य सरकार ने एक बड़ी और महत्वाकांक्षी पहल की है। बिहार संग्रहालय, पटना में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में “ज्ञान भारतम” अभियान के तहत राज्यभर में बिखरी प्राचीन पांडुलिपियों की खोज, सूचीकरण, संरक्षण और डिजिटलीकरण का निर्णय लिया गया।
इस बैठक की संयुक्त अध्यक्षता मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत और महानिदेशक, बिहार संग्रहालय अंजनी कुमार सिंह ने की। यह अभियान भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के तत्वावधान में संचालित किया जा रहा है।
हर जिले में बनेगी खोज टीम
मुख्य सचिव ने निर्देश दिया कि प्रत्येक जिले में तकनीकी दल गठित किया जाएगा, जो मठों, मंदिरों, निजी पुस्तकालयों, पुराने रिकॉर्ड रूम और संस्थानों में उपलब्ध पांडुलिपियों का सर्वे करेगा।
उन्होंने इसे मिशन मोड में चलाने का आदेश दिया।
सख्त मॉनिटरिंग सिस्टम
- हर 14 दिन में समीक्षा – निदेशक, बिहार संग्रहालय
- हर महीने समीक्षा – सचिव, कला एवं संस्कृति विभाग
डिजिटल होगी बिहार की विरासत
मुख्य सचिव ने बताया कि
- राज्य का State Digital Repository को National Digital Repository से जोड़ा जाएगा।
- बिहार सरकार और संस्कृति मंत्रालय के बीच MoU पर हस्ताक्षर हो चुके हैं।
- कला, संस्कृति एवं युवा विभाग को नोडल अथॉरिटी और
- संग्रहालय निदेशक को नोडल पदाधिकारी बनाया गया है।
बिहार दिवस पर होगा सम्मान
मुख्य सचिव ने कहा कि यदि बिहार दिवस-2026 से पहले ठोस प्रगति होती है, तो पांडुलिपि संरक्षण में योगदान देने वाले व्यक्तियों और संस्थाओं को सम्मानित किया जाएगा।
वैज्ञानिक संरक्षण पर जोर
महानिदेशक अंजनी कुमार सिंह ने कहा कि पांडुलिपियों के लिए विशेष संरक्षण प्रयोगशालाएं स्थापित की जा सकती हैं।
उन्होंने बताया कि पटना संग्रहालय और बिहार संग्रहालय में पहले से अत्याधुनिक लैब मौजूद हैं।
इस अभियान के लिए एक विशेष समर्पित टीम गठित करने का भी सुझाव दिया गया।
बैठक में ये प्रमुख नाम रहे मौजूद
- प्रणव कुमार – सचिव, कला एवं संस्कृति
- कृष्ण कुमार – निदेशक, संग्रहालय एवं पुरातत्व
- प्रो. विश्वजीत कुमार – कुलपति, नव नालंदा महाविहार
- मो. असगर – खुदा बख्श लाइब्रेरी
- डॉ. मो. फैजल अब्दुल्ला – निदेशक, अभिलेखागार
- डॉ. इम्तियाज अहमद – इतिहासकार
- डॉ. अमित रंजन – बिहार विरासत विकास समिति
- डॉ. सुनील कुमार झा, अशोक कुमार सिन्हा सहित कई वरिष्ठ अधिकारी व विशेषज्ञ
यह पहल बिहार की दुर्लभ धरोहर को नई पीढ़ी तक पहुंचाने और वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में ऐतिहासिक कदम मानी जा रही है।


