किसान का बेटा बनेगा IAS! भागलपुर के राहुल ने यूपीएससी में गाड़ा झंडा; 2 बार इंटरव्यू में फेल होने पर भी नहीं मानी हार, अब मिली 141वीं रैंक

खबर के मुख्य बिंदु:

  • बड़ी कामयाबी: नाथनगर (रन्नूचक) के राहुल कुमार को UPSC 2025 में मिली ऑल इंडिया 141वीं रैंक।
  • किसान का बेटा: पिता शंभू कुमार राय पेशे से किसान हैं, बेटे ने मेहनत से बदला परिवार का नसीब।
  • IIT का टैलेंट: IIT दिल्ली से केमिकल इंजीनियरिंग करने के बाद अब देश की सर्वोच्च सेवा में चयन।
  • धैर्य की जीत: 2023 और 2024 में इंटरव्यू तक पहुँचकर भी हुए थे बाहर, तीसरे प्रयास में मिली बड़ी सफलता।
  • मौजूदा पद: फिलहाल वाणिज्य मंत्रालय (भारत सरकार) में अधिकारी के रूप में दे रहे हैं सेवाएं।

भागलपुर: कहते हैं कि प्रतिभा किसी साधन या सुविधा की मोहताज नहीं होती, उसे बस सही दिशा और अटूट संकल्प की जरूरत होती है। इसे सच कर दिखाया है भागलपुर के नाथनगर प्रखंड स्थित रन्नूचक (मकंदपुर) के रहने वाले राहुल कुमार ने। शुक्रवार को जारी संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के नतीजों में राहुल ने 141वीं रैंक हासिल कर न केवल अपने माता-पिता का सिर ऊंचा किया है, बल्कि पूरे जिले को गौरवान्वित किया है। राहुल अब भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) का हिस्सा बनकर देश की नीतियों को नई दिशा देंगे।

IIT दिल्ली से UPSC तक: मेधावी रहा है शैक्षणिक रिकॉर्ड

​राहुल बचपन से ही पढ़ाई में अव्वल रहे हैं। उनकी सफलता के पीछे वर्षों की कड़ी मेहनत और उत्कृष्ट शैक्षणिक पृष्ठभूमि है:

  • स्कूलिंग: 2013 में जसीडीह के सेंट फ्रांसिस स्कूल से 10वीं (96%) और 2015 में DPS बोकारो से 12वीं (97%) की परीक्षा पास की।
  • इंजीनियरिंग: देश के प्रतिष्ठित आईआईटी दिल्ली (IIT Delhi) से केमिकल इंजीनियरिंग में बीटेक की डिग्री हासिल की।
  • प्रेरणा: कॉलेज के सीनियर और वर्तमान आईएएस अधिकारी श्रेष्ठ अनुपम को देखकर राहुल के मन में भी प्रशासनिक सेवा में जाने का बीज अंकुरित हुआ।

हार के बाद भी नहीं डिगा हौसला: 3 साल का संघर्ष

​राहुल की यह जीत आसान नहीं थी। वे उन युवाओं के लिए मिसाल हैं जो एक या दो असफलताओं के बाद टूट जाते हैं।

  1. पहला प्रयास (2023): इंटरव्यू राउंड तक पहुँचे, लेकिन फाइनल लिस्ट में जगह नहीं बना पाए।
  2. दूसरा प्रयास (2024): फिर से इंटरव्यू तक का सफर तय किया, मगर किस्मत ने साथ नहीं दिया।
  3. तीसरा प्रयास (2025): हार न मानने की जिद ने उन्हें फिर खड़ा किया और इस बार उन्होंने 141वीं रैंक के साथ सीधे आईएएस की कुर्सी पक्की कर ली।

माता-पिता को दिया सफलता का श्रेय

​राहुल फिलहाल दिल्ली में वाणिज्य मंत्रालय में अधिकारी के रूप में कार्यरत हैं और बीते 16 फरवरी को ही उन्होंने भारत मंडपम में अपना योगदान दिया था। अपनी सफलता का श्रेय उन्होंने अपने किसान पिता शंभू कुमार राय और माता सुनीता राय को दिया है। उनके चयन की खबर मिलते ही चचेरे भाई अनिमेष, बहनों और पूरे गाँव में मिठाई बंटने लगी।

VOB का नजरिया: ‘खेती’ से ‘खास’ बनने की कहानी

​राहुल कुमार की कहानी यह साबित करती है कि बिहार के गांवों में कितनी मेधा छिपी है। एक किसान का बेटा जब आईआईटी पहुँचता है और फिर वहां से बिना किसी भटकाव के यूपीएससी जैसे कठिन लक्ष्य को भेदता है, तो वह समाज के लिए एक ‘रोल मॉडल’ बन जाता है। राहुल की 141वीं रैंक यह भी सिखाती है कि असफलता केवल एक पड़ाव है, मंजिल नहीं। अगर आप इंटरव्यू से दो बार बाहर होने के बाद भी खुद को संभाल सकते हैं, तो दुनिया की कोई भी ताकत आपको सफल होने से नहीं रोक सकती।

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