मानवता की मिसाल: तेतरी दुर्गा मंदिर में 17 अप्रैल को सजेगा 25 जोड़ों का सामूहिक मंडप, स्वरोजगार के लिए भेंट में मिलेगी सिलाई मशीन

नवगछिया के प्रसिद्ध शक्तिपीठ में लगातार तीसरे साल गूंजेगी शहनाई; अनाथ, दिव्यांग और आर्थिक रूप से कमजोर बेटियों के हाथ होंगे पीले; 10 जिलों के वर-वधू का हुआ पंजीकरण

भागलपुर/नवगछिया। सामाजिक समरसता और परोपकार की पावन भूमि नवगछिया एक बार फिर एक ऐतिहासिक और भावुक क्षण का गवाह बनने जा रही है। नवगछिया के सुप्रसिद्ध दुर्गा शक्तिपीठ, तेतरी दुर्गा मंदिर के प्रांगण में आगामी 17 अप्रैल 2026 को भव्य निःशुल्क सामूहिक विवाह समारोह का आयोजन होने जा रहा है। यह इस आयोजन का तीसरा संस्करण है, जो पिछले दो वर्षों की अपार सफलता और जन-सहयोग के बाद अब एक जन-आंदोलन का रूप ले चुका है। इस समारोह में समाज के उस अंतिम पायदान पर खड़े परिवारों की खुशियां लौटेंगी, जो आर्थिक तंगी के कारण अपनी बेटियों के हाथ पीले करने में असमर्थ थे। 25 जोड़ों के इस महा-मिलन में अनाथ, दिव्यांग, आर्थिक रूप से विपन्न और अंतरजातीय विवाह करने वाले जोड़ों को प्राथमिकता दी गई है, जिससे यह आयोजन केवल एक वैवाहिक रस्म न रहकर सामाजिक क्रांति का संदेश भी बन गया है।

​तेतरी दुर्गा मंदिर की महिमा और शक्तिपीठ की गरिमा के बीच जब 25 मंडपों में एक साथ वैदिक मंत्रोच्चार गूंजेंगे, तो वह दृश्य न केवल नवगछिया बल्कि पूरे अंग क्षेत्र के लिए गौरव का विषय होगा। आयोजन समिति और स्थानीय ग्रामीणों ने इस ‘पुण्य कार्य’ के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी है।

​तीन वर्षों का सफल सफर: नवगछिया की धरती पर सेवा का नया अध्याय

​सामूहिक विवाह कार्यक्रम की शुरुआत तीन साल पहले एक छोटे से संकल्प के साथ हुई थी, जिसका उद्देश्य विवाह जैसे पवित्र संस्कार को आडंबर और कर्ज के बोझ से मुक्त करना था। इस बार के तीसरे संस्करण की भव्यता पिछले दोनों वर्षों से कहीं अधिक होने की उम्मीद है। कार्यक्रम के मुख्य संयोजक अनुज चौरसिया ने बताया कि इस अभियान का मूल उद्देश्य उन बेटियों को एक सम्मानजनक विदाई देना है जिनका कोई सहारा नहीं है या जिनके माता-पिता आर्थिक रूप से टूट चुके हैं।

​आयोजन समिति ने इस बार भी यह सुनिश्चित किया है कि सभी 25 वर-वधू का विवाह पूर्णतः हिंदू रीति-रिवाज और वैदिक पद्धति के साथ संपन्न कराया जाए। इसके लिए अलग-अलग विद्वान पंडितों की टोली बुलाई गई है जो विधि-विधान से पाणिग्रहण संस्कार संपन्न कराएगी। यह आयोजन उस रूढ़िवादी सोच पर भी प्रहार करता है जो अंतरजातीय विवाहों को समाज में हेय दृष्टि से देखती है।

​विदाई की सौगात: राशन से लेकर स्वरोजगार तक का इंतजाम

​इस सामूहिक विवाह की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां केवल शादियां ही नहीं कराई जातीं, बल्कि नव-दंपतियों को अपने पैरों पर खड़ा करने का प्रयास भी किया जाता है। विदाई के समय प्रत्येक जोड़े को वह तमाम सामग्री दी जाएगी जो एक नया घर बसाने के लिए आवश्यक होती है।

उपहारों की सूची में शामिल प्रमुख सामग्री:

  • घरेलू सामग्री: बर्तन सेट, बाल्टी सेट, बड़ा संदूक (बक्सा), श्रृंगार बक्सा और अन्य जरूरी बर्तन।
  • राशन किट: एक महीने का पूरा राशन जिसमें आटा, चावल, दाल, विभिन्न मसाले और खाद्य तेल शामिल हैं, ताकि शादी के तुरंत बाद परिवार पर आर्थिक दबाव न आए।
  • श्रृंगार और परिधान: वधू के लिए श्रृंगार की सभी सामग्रियां और विवाह के वस्त्र।
  • बारात का सत्कार: बारातियों के लिए नाश्ते और भव्य भोजन की व्यवस्था समिति की ओर से निःशुल्क की गई है।

​सबसे महत्वपूर्ण पहल ‘स्वरोजगार’ की है। प्रत्येक वधू को विदाई के समय एक-एक सिलाई मशीन भेंट की जाएगी। इसका उद्देश्य यह है कि बेटियां अपने ससुराल में जाकर सिलाई-कढ़ाई के माध्यम से स्वावलंबी बन सकें और परिवार की आर्थिक स्थिति में योगदान दे सकें। यह कदम ‘महिला सशक्तिकरण’ का एक जीवंत उदाहरण पेश करता है।

​जन-सहयोग का महाकुंभ: नवगछिया पुलिस जिला की एकजुटता

​इस बड़े आयोजन की सफलता के पीछे किसी एक व्यक्ति या संस्था का हाथ नहीं, बल्कि पूरे नवगछिया पुलिस जिला के समाज का सामूहिक प्रयास है। अनुज चौरसिया ने बताया कि नवगछिया की धरती के लोगों ने इस कार्यक्रम को अपना निजी कार्य मान लिया है। क्षेत्र के लगभग हर गांव से लोग सहयोग के लिए आगे आ रहे हैं।

​कोई अपनी स्वेच्छा से धनराशि का दान कर रहा है, तो कोई विवाह में लगने वाली सामग्री जैसे बर्तन, कपड़े या राशन उपलब्ध करा रहा है। तेतरी गांव के ग्रामीणों ने तो जैसे इस कार्यक्रम को अपनी प्रतिष्ठा से जोड़ लिया है। गांव के युवा और बुजुर्ग दिन-रात कार्यक्रम स्थल को सुसज्जित करने और व्यवस्थाओं को चाक-चौबंद करने में जुटे हैं। नवगछिया अनुमंडल के एक-एक गांव के कार्यकर्ता इस आयोजन को सफल बनाने के लिए तन-मन-धन से समर्पित हैं।

​10 जिलों के वर-वधू का होगा मिलन: पंजीकरण की प्रक्रिया पूर्ण

​तेतरी दुर्गा मंदिर में होने वाले इस समारोह की ख्याति अब भागलपुर की सीमाओं को लांघकर पूरे बिहार में फैल चुकी है। यही कारण है कि इस बार 25 जोड़ों के चयन के लिए बड़ी संख्या में आवेदन प्राप्त हुए थे।

​पंजीकरण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद जो 25 जोड़े चयनित हुए हैं, वे बिहार के विभिन्न जिलों से ताल्लुक रखते हैं। इनमें भागलपुर के अलावा बांका, मुंगेर, पूर्णिया, सहरसा, मधेपुरा, खगड़िया, बेगूसराय, लखीसराय और मुंगेर के वर-वधू शामिल हैं। इन सभी ने अपना पंजीकरण करवाकर अपनी जगह सुनिश्चित कर ली है। अलग-अलग जिलों से आए इन परिवारों का मिलन ‘मिनी बिहार’ की तस्वीर पेश करेगा, जहां जाति और क्षेत्र की सीमाएं टूटती नजर आएंगी।

​सामाजिक संदेश और भविष्य की अपेक्षाएं

​सामूहिक विवाह जैसे आयोजनों की सार्थकता आज के दौर में और बढ़ गई है जब शादियों में होने वाला फिजूलखर्च गरीब परिवारों को कर्ज के दलदल में धकेल देता है। तेतरी दुर्गा मंदिर की इस पहल से समाज में यह संदेश जा रहा है कि विवाह की पवित्रता आडंबर में नहीं, बल्कि आशीर्वाद और सादगी में है।

​संयोजक अनुज चौरसिया और उनकी टीम को यह पूरी उम्मीद है कि 17 अप्रैल को होने वाला यह तीसरा संस्करण नवगछिया के इतिहास में स्वर्णाक्षरों में दर्ज होगा। कार्यकर्ताओं का उत्साह चरम पर है और वे यह सुनिश्चित करने में लगे हैं कि दूर-दराज से आने वाले वर-वधू और उनके परिजनों को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो। तेतरी की पावन मिट्टी पर होने वाला यह आयोजन न केवल 25 जोड़ों की नई जिंदगी की शुरुआत करेगा, बल्कि समाज में एकजुटता और परोपकार की एक नई परिभाषा भी लिखेगा।

​नवगछिया के इस ऐतिहासिक कार्य की सफलता की कामना पूरा जिला कर रहा है। लोगों का कहना है कि अगर हर क्षेत्र में इस तरह के निस्वार्थ आयोजन होने लगें, तो समाज की कई कुरीतियां अपने आप समाप्त हो जाएंगी। अब सबकी नजरें 17 अप्रैल की उस शुभ घड़ी पर टिकी हैं जब तेतरी दुर्गा मंदिर के प्रांगण में 25 बेटियों का कन्यादान होगा और वे सिलाई मशीन व नए सपनों के साथ अपने नए जीवन की ओर प्रस्थान करेंगी।

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