23 दिन का अनशन, ‘डार्क ह्यूमर’ और राष्ट्रीय पहचान: कौन हैं NEET आंदोलन का चर्चित चेहरा नेहा बोरा?

नई दिल्ली: NEET-UG पेपर लीक मामले में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद भले ही एक महीने से अधिक समय तक चला विरोध प्रदर्शन फिलहाल समाप्त हो गया हो, लेकिन इस आंदोलन ने कई युवा चेहरों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई। इन्हीं में सबसे चर्चित नाम रहा अखिल भारतीय छात्र संघ (AISA) की राष्ट्रीय अध्यक्ष और जेएनयू की शोधार्थी नेहा बोरा, जिन्होंने आंदोलन के दौरान अपनी सक्रिय भूमिका से व्यापक चर्चा बटोरी।

आंदोलन के बाद जश्न का वीडियो हुआ वायरल

25 जुलाई को शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की घोषणा के बाद जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों ने जश्न मनाया। इस दौरान नेहा बोरा अपने साथियों के साथ फिल्म ‘दिल से’ के गीतों पर नृत्य करती नजर आईं। उन्होंने इस मौके का वीडियो सोशल मीडिया पर साझा करते हुए प्रसिद्ध राजनीतिक विचारक एम्मा गोल्डमैन का चर्चित कथन उद्धृत किया—

“अगर मैं नाच नहीं सकती, तो यह मेरी क्रांति नहीं होगी।”

यह पोस्ट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुई और व्यापक चर्चा का विषय बनी।

23 दिन की भूख हड़ताल, बिगड़ी तबीयत

उत्तराखंड में पली-बढ़ीं नेहा बोरा ने दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक और अंबेडकर विश्वविद्यालय से स्नातकोत्तर की पढ़ाई की है। वर्तमान में वह जेएनयू के स्कूल ऑफ आर्ट्स एंड एस्थेटिक्स में पीएचडी कर रही हैं और रंगमंच से भी जुड़ी हुई हैं।

आंदोलन के दौरान उन्होंने जंतर-मंतर पर 23 दिनों तक भूख हड़ताल की। इस दौरान उनका वजन करीब 7.5 किलोग्राम कम हो गया और स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियाँ भी सामने आईं। इसके बावजूद उन्होंने आंदोलन जारी रखा।

‘डार्क ह्यूमर’ से सरकार पर साधा निशाना

लंबे अनशन के दौरान भी नेहा बोरा सोशल मीडिया पर लगातार सक्रिय रहीं। उन्होंने इंस्टाग्राम रील्स के जरिए व्यंग्य और ‘डार्क ह्यूमर’ का इस्तेमाल करते हुए अपनी बात रखी।

उनकी एक चर्चित रील में उन्होंने कहा था—

“चलो भूख की बात करते हैं, क्योंकि अभी मेरे दिमाग में वही चल रहा है।”

इसके बाद उन्होंने अपनी भूख की तुलना सत्ता की भूख से करते हुए सरकार पर निशाना साधा। यह वीडियो भी सोशल मीडिया पर काफी चर्चा में रहा।

राहुल गांधी की प्रेस कॉन्फ्रेंस में भी रहीं मौजूद

आंदोलन समाप्त होने से कुछ घंटे पहले आयोजित विपक्ष के नेता राहुल गांधी की प्रेस कॉन्फ्रेंस में भी नेहा बोरा प्रमुख रूप से मौजूद थीं। मंच पर उनके साथ अन्य छात्र प्रतिनिधि भी मौजूद रहे। इस उपस्थिति के बाद उनकी पहचान राष्ट्रीय स्तर पर और मजबूत हुई।

आंदोलन से मिली राष्ट्रीय पहचान

NEET-UG पेपर लीक के विरोध में चले इस आंदोलन ने नेहा बोरा को देशभर में छात्र राजनीति के चर्चित चेहरों में शामिल कर दिया। समर्थकों के बीच उन्हें संघर्ष और छात्र नेतृत्व का प्रतीक बताया जा रहा है, जबकि आलोचक उनके राजनीतिक रुख पर सवाल भी उठाते रहे हैं। आंदोलन समाप्त होने के बावजूद उनकी भूमिका और आगे की सक्रियता पर राजनीतिक और छात्र संगठनों की नजर बनी हुई है।

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