बिहार में सियासी उठापटक के बीच BJP ने बुलाई दिल्ली में बड़ी बैठक, चिराग पासवान, सहनी और मांझी पर मंथन

नीतीश कैबिनेट में शामिल जीतनराम मांझी के बेटे मंत्री संतोष सुमन के इस्तीफे के बाद बिहार की सियासत में उठापटक का दौर जारी है. इस बीच दिल्ली में बिहार भाजपा के वरीय पदाधिकारियों की बैठक बुलाई गई है. केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री गिरिराज सिंह के आवास पर बिहार भाजपा के कोर ग्रुप की बैठक होने जा रही है. इस बैठक में भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा, राष्ट्रीय महामंत्री बीएल संतोष, बिहार के प्रभारी विनोद तावड़े भी शामिल होंगे. माना जा रहा है कि इस बैठक में लोकसभा चुनाव 2024 पर रणनीति बनेगी. वहीं चिराग पासवान, उपेंद्र कुशवाहा और जीतनराम मांझी पर भी मंथन होगा।

बैठक में शामिल होने के लिए प्रदेश भाजपा अध्यक्ष सम्राट चौधरी मंगलवार की देर शाम ही दिल्ली चले गए थे. कोर ग्रुप में शामिल पार्टी के कुछ नेता दिल्ली में ही हैं. मिली जानकारी के अनुसार इसमें 2024 के लोकसभा चुनाव के मद्देनजर बिहार में एनडीए के स्वरूप पर चर्चा होगी. बीजेपी कोर ग्रुप की मीटिंग में दो-तीन बड़े मसले हैं जिस पर चर्चा और कुछ फैसला होने की उम्मीद है भले वो सारे सार्वजनिक ना हों. एजेंडा में सबसे ऊपर 23 जून को पटना में नीतीश कुमार की मेजबानी में हो रही विपक्षी दलों की एकता मीटिंग है।

बताया जा रहा है कि दिल्ली में होने वाली भाजपा की बैठक में बीजेपी के प्रदेश प्रभारी व राष्ट्रीय महामंत्री विनोद तावड़े, प्रदेश अध्यक्ष सम्राट चौधरी, बिहार भाजपा विधानमंडल दल के नेता विजय सिन्हा, केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह, अश्विनी चौबे, नित्यानंद राय के अलावा पूर्व मंत्री मंगल पांडेय, प्रदेश संगठन महामंत्री भीखुभाई दलसानिया, क्षेत्रीय संगठन महामंत्री नागेंद्र नाथ और बिहार के सहप्रभारी सुनील भाई ओझा, पूर्व उप मुख्यमंत्री सुशील मोदी, तारकिशोर प्रसाद और रेणु देवी के शामिल होने की संभावना है।

लोकसभा चुनाव 2024 में बिहार में एनडीए का स्वरूप कैसा रहे और उसमें किन-किन दलों और नेताओं को जोड़ा जाए. इस पर भी चर्चा हो सकती है. इस समय बिहार में एनडीए में बीजेपी के अलावा सिर्फ पशुपति पारस की रालोजपा ही है. चिराग पासवान की लोजपा रामविलास, मुकेश सहनी की वीआईपी, उपेंद्र कुशवाहा की आरएलजेडी और अब जीतन राम मांझी की हम ये चार राजनीतिक दल हैं जो एनडीए की तरफ झुके हुए तो हैं लेकिन अभी तक औपचारिक रूप से एनडीए का हिस्सा नहीं हैं. इन लोगों को साथ लेने के लिए बीजेपी को बिहार में सीटों की कुर्बानी देनी होगी।

 

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