
पटना: बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट पर उपचुनाव के लिए चुनाव प्रचार मंगलवार शाम 5 बजे समाप्त हो गया। प्रचार थमने से ठीक पहले पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के वीडियो संदेश को लेकर बिहार की राजनीति गरमा गई। बीजेपी द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर साझा किए गए इस वीडियो में नीतीश कुमार पार्टी प्रत्याशी नीरज कुमार सिन्हा के पक्ष में वोट की अपील करते दिखाई दिए। वीडियो सामने आते ही जन सुराज के संस्थापक और उम्मीदवार प्रशांत किशोर ने इसे लेकर बड़ा दावा कर दिया।
प्रशांत किशोर ने आरोप लगाया कि यह वीडियो पूरी तरह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से तैयार किया गया है और नीतीश कुमार ने ऐसा कोई बयान नहीं दिया। उन्होंने कहा कि यदि यह वीडियो असली है, तो नीतीश कुमार किसी भी पत्रकार के सामने वही अपील दोहराकर दिखाएं। ऐसा होने पर वह अपनी उम्मीदवारी वापस लेने को तैयार हैं।
पीके ने कहा कि बीजेपी अपनी संभावित हार से घबराई हुई है और इसी वजह से AI तकनीक का सहारा लेकर मतदाताओं को भ्रमित करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने दावा किया कि बांकीपुर की जनता अपना फैसला पहले ही कर चुकी है और एनडीए की हार तय है।
JDU का तीखा पलटवार
प्रशांत किशोर के आरोपों पर जेडीयू के मुख्य प्रवक्ता नीरज कुमार ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि जन सुराज उम्मीदवार अपनी संभावित जमानत जब्त होने की आशंका से बौखला गए हैं और इसी हताशा में नीतीश कुमार पर झूठे आरोप लगा रहे हैं।
नीरज कुमार ने कहा कि बीजेपी प्रत्याशी नीरज कुमार सिन्हा ने स्वयं जाकर नीतीश कुमार से आशीर्वाद लिया था और उनकी सहमति से ही वीडियो संदेश जारी किया गया। उन्होंने यह भी कहा कि किसी की इतनी हिम्मत नहीं कि नीतीश कुमार का AI वीडियो बनाकर सार्वजनिक कर दे।
‘नीतीश का नहीं, जनता का अपमान’
जेडीयू प्रवक्ता ने कहा कि प्रशांत किशोर ने केवल नीतीश कुमार का नहीं, बल्कि बांकीपुर की जनता और उन महिलाओं का भी अपमान किया है जो उन्हें अपना अभिभावक मानती हैं। उन्होंने दावा किया कि मतदान के दिन जनता कमल का बटन दबाकर एनडीए प्रत्याशी को विजयी बनाएगी और प्रशांत किशोर को करारा जवाब देगी।
चुनाव से पहले बढ़ी सियासी तल्खी
बांकीपुर उपचुनाव के प्रचार के आखिरी दिन AI वीडियो को लेकर शुरू हुआ यह विवाद अब चुनावी बहस का बड़ा मुद्दा बन गया है। एक तरफ प्रशांत किशोर वीडियो को फर्जी बता रहे हैं, तो दूसरी ओर जेडीयू इसे पूरी तरह वास्तविक बताते हुए उनके आरोपों को राजनीतिक हताशा करार दे रही है। अब देखना होगा कि इस विवाद का असर 30 जुलाई को होने वाले मतदान पर कितना पड़ता है।


