
मुजफ्फरपुर: जिले में लगातार बढ़ते जलस्तर ने बाढ़ का खतरा बढ़ा दिया है। जिला आपातकालीन संचालन केंद्र की बुधवार सुबह 6 बजे जारी रिपोर्ट के अनुसार, कटौझा में बागमती नदी का जलस्तर 55.75 मीटर दर्ज किया गया है, जो खतरे के निशान 55.00 मीटर से 0.75 मीटर (75 सेंटीमीटर) ऊपर पहुंच चुका है। नदी का जलस्तर लगातार बढ़ने से निचले इलाकों में बाढ़ की आशंका गहरा गई है।
औराई, कटरा और गायघाट पर सबसे ज्यादा खतरा
प्रशासन के अनुसार, बागमती के बढ़ते जलस्तर का सबसे अधिक असर औराई, कटरा और गायघाट प्रखंड के निचले क्षेत्रों में पड़ सकता है। यदि नदी का जलस्तर इसी तरह बढ़ता रहा तो कई गांवों में पानी प्रवेश कर सकता है। इससे फसलों, ग्रामीण सड़कों और रिहायशी इलाकों को नुकसान होने की आशंका जताई जा रही है।
प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने की अपील की
हालात को देखते हुए जिला प्रशासन ने संवेदनशील क्षेत्रों के लोगों से सतर्क रहने और जरूरत पड़ने पर सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की है। साथ ही संबंधित अधिकारियों को लगातार निगरानी रखने और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए पूरी तैयारी बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं।
बूढ़ी गंडक और गंडक नदी से फिलहाल राहत
जहां बागमती नदी चिंता का कारण बनी हुई है, वहीं बूढ़ी गंडक और गंडक नदी का जलस्तर फिलहाल खतरे के निशान से नीचे है।
- सिकंदरपुर में बूढ़ी गंडक का जलस्तर 48.46 मीटर दर्ज किया गया, जो खतरे के निशान 52.53 मीटर से काफी नीचे है।
- रेवाघाट में गंडक नदी का जलस्तर 52.89 मीटर रिकॉर्ड किया गया, जबकि खतरे का निशान 54.41 मीटर है।
दोनों नदियों का जलस्तर फिलहाल घट रहा है, जिससे संबंधित क्षेत्रों में राहत की स्थिति बनी हुई है।
बाढ़ नियंत्रण कक्ष अलर्ट मोड में
समाहरणालय स्थित जिला बाढ़ नियंत्रण कक्ष और जल निस्सरण प्रमंडल के अधिकारी हालात पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। तटबंधों की निगरानी बढ़ा दी गई है और संवेदनशील इलाकों में राहत एवं बचाव कार्यों की तैयारियां तेज कर दी गई हैं, ताकि जलस्तर और बढ़ने की स्थिति में तत्काल कार्रवाई की जा सके।


