
नई दिल्ली: प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और गड़बड़ियों पर लगाम लगाने के लिए केंद्र सरकार द्वारा पेश किए गए नए परीक्षा सुधार विधेयक को लेकर संसद में तीखी राजनीतिक टकराव देखने को मिला। सरकार का दावा है कि नया कानून परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और विश्वसनीय बनाएगा, जबकि विपक्ष का आरोप है कि केवल नया कानून बनाने से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि मौजूदा कानूनों का प्रभावी क्रियान्वयन अधिक जरूरी है।
बिल पेश होते ही विपक्ष का हंगामा, कई बार स्थगित हुई कार्यवाही
विधेयक पेश होने के बाद विपक्षी दलों ने जोरदार विरोध प्रदर्शन और नारेबाजी की। हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही कई बार बाधित हुई। विपक्ष के दबाव के बाद सरकार ने बिल पर विस्तृत चर्चा कराने पर सहमति जताई।
छात्र आंदोलन और पुलिस कार्रवाई पर सरकार से मांगा जवाब
विपक्ष ने हाल के छात्र आंदोलनों के दौरान पुलिस कार्रवाई और कथित बल प्रयोग का मुद्दा भी सदन में उठाया। इस पर सरकार से जवाब की मांग की गई। बाद में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सभी दलों के नेताओं के साथ बैठक कर सहमति बनाई कि मंगलवार को इस विधेयक पर विस्तार से चर्चा होगी।
अध्यक्ष ने कहा कि यह विषय देश के लाखों छात्रों के भविष्य और प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता से जुड़ा अत्यंत महत्वपूर्ण मामला है।
छह घंटे की बहस, विपक्ष के 93 संशोधन प्रस्ताव
लोकसभा में इस विधेयक पर चर्चा के लिए छह घंटे का समय निर्धारित किया गया है। विपक्ष ने पहले ही बिल में 93 संशोधन प्रस्तावित किए हैं। ऐसे में सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस होने की संभावना है।
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि यह युवाओं और छात्रों के भविष्य से जुड़ा महत्वपूर्ण विधेयक है, इसलिए सभी सांसदों को गंभीरता से चर्चा में भाग लेना चाहिए। वहीं, तेलुगु देशम पार्टी के सांसद कृष्ण प्रसाद तेनेटी ने भी विपक्ष से रचनात्मक बहस में हिस्सा लेने की अपील की।
नए कानून में होंगे ये बड़े बदलाव
सरकार ने वर्ष 2024 के मौजूदा कानून को और अधिक सख्त बनाने का प्रस्ताव रखा है। नए विधेयक के प्रमुख प्रावधान इस प्रकार हैं—
- पेपर लीक या परीक्षा में अनुचित साधनों के इस्तेमाल पर 5 से 10 साल तक की जेल।
- दोषियों पर 50 लाख रुपये तक का जुर्माना।
- यदि किसी परीक्षा आयोजित करने वाली सेवा प्रदाता कंपनी की संलिप्तता पाई गई तो उस पर 5 करोड़ रुपये तक का जुर्माना।
- परीक्षा आयोजन की पूरी लागत संबंधित कंपनी से वसूली जाएगी।
- दोषी कंपनी को 8 वर्षों तक किसी भी सार्वजनिक परीक्षा के आयोजन से प्रतिबंधित किया जाएगा।
वर्तमान कानून में 3 से 5 वर्ष की जेल, 10 लाख रुपये तक जुर्माना, सेवा प्रदाता कंपनी पर 1 करोड़ रुपये तक जुर्माना और 4 वर्ष के प्रतिबंध का प्रावधान है।
छात्र आंदोलन के बाद और गरमाई राजनीति
हाल के छात्र आंदोलनों के बाद यह मुद्दा राजनीतिक रूप से और संवेदनशील हो गया है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार छात्रों के साथ सख्ती बरत रही है, जबकि सरकार का कहना है कि परीक्षा प्रणाली में भरोसा कायम रखने और छात्रों के हितों की रक्षा के लिए कठोर कानून आवश्यक है।
अब सभी की नजर संसद में होने वाली विस्तृत चर्चा पर टिकी है, जहां यह तय होगा कि परीक्षा सुधार विधेयक में कौन-कौन से संशोधन स्वीकार किए जाते हैं और अंतिम कानून किस स्वरूप में पारित होता है।


