
नई दिल्ली/पटना: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने इसे छात्रों के संघर्ष और लोकतांत्रिक आंदोलन की जीत बताया, जबकि आरजेडी के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मंत्री इसराइल मंसूरी ने कहा कि यह फैसला बहुत पहले लिया जाना चाहिए था।
तेजस्वी यादव ने छात्रों को दी बधाई
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए तेजस्वी यादव ने लिखा,
“सच्चाई, हक, संघर्ष और न्याय की जीत। दमनकारी सरकार के झूठ, पैंतरे और अहंकार की हार। छात्र और युवा शक्ति को अनंत बधाई। बहुत से सवाल अभी भी अनुत्तरित हैं। देश के जागरूक युवा जवाबदेही तय करवाते रहेंगे।”
उन्होंने कहा कि यह घटनाक्रम युवाओं की लोकतांत्रिक ताकत और उनके संघर्ष का परिणाम है।
इसराइल मंसूरी बोले— “इस्तीफा पहले होना चाहिए था”
आरजेडी नेता इसराइल मंसूरी ने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा काफी पहले हो जाना चाहिए था। उनके अनुसार, जब देशभर में इतना बड़ा आंदोलन खड़ा हो गया, तब सरकार ने यह फैसला लिया।
उन्होंने कहा,
“अगर सरकार पहले ही यह निर्णय ले लेती और जिम्मेदारी तय कर देती, तो इतना बड़ा आंदोलन नहीं होता।”
मुकदमे वापस लेने की मांग
इसराइल मंसूरी ने मांग की कि आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज सभी मामलों को वापस लिया जाए। उनका कहना था कि केवल मंत्री के इस्तीफे से बात पूरी नहीं होगी, बल्कि आंदोलन से जुड़े अन्य मुद्दों पर भी सरकार को निर्णय लेना चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार के खिलाफ जनता का विश्वास कम हुआ है और आने वाले समय में जनता इसका जवाब देगी।
राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर जारी
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष की ओर से लगातार प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। जहां भाजपा नेता उनके कार्यकाल और शिक्षा सुधारों की सराहना कर रहे हैं, वहीं विपक्षी दल इसे छात्रों के आंदोलन और जनदबाव का परिणाम बताते हुए शेष मांगों पर भी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।


