सबौर में ‘सखी वार्ता’ कार्यक्रम का आयोजन, महिलाओं को सरकारी योजनाओं की जानकारी देकर बाल विवाह के खिलाफ किया जागरूक

भागलपुर जिले के सबौर प्रखंड में महिलाओं और किशोरियों को सरकारी योजनाओं से जोड़ने तथा उन्हें सामाजिक और आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के उद्देश्य से ‘सखी वार्ता’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। महिला एवं बाल विकास निगम, भागलपुर के मिशन शक्ति योजनांतर्गत जिला हब फॉर एम्पावरमेंट ऑफ वीमेन की ओर से 24 जुलाई 2026 को प्रखंड सभागार, सबौर में आयोजित इस कार्यक्रम में महिलाओं को केंद्र और राज्य सरकार की ओर से संचालित विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी दी गई।

कार्यक्रम का उद्देश्य केवल महिलाओं को सरकारी योजनाओं के बारे में जानकारी देना ही नहीं, बल्कि उन्हें योजनाओं का वास्तविक लाभ प्राप्त करने के लिए आवश्यक प्रक्रिया से भी अवगत कराना था। कार्यक्रम में मौजूद महिलाओं को बताया गया कि सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए पात्रता, आवेदन प्रक्रिया और आवश्यक दस्तावेजों की जानकारी होना बेहद जरूरी है। इसी को ध्यान में रखते हुए पदाधिकारियों और कर्मियों ने योजनाओं से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी साझा की।

‘सखी वार्ता’ के दौरान महिलाओं और किशोरियों को उनके अधिकारों, सरकारी सहायता और महिला सशक्तिकरण से जुड़ी योजनाओं के बारे में विस्तार से बताया गया। कार्यक्रम में महिलाओं को अपनी समस्याओं को खुलकर सामने रखने और योजनाओं का लाभ लेने में आने वाली परेशानियों के समाधान के लिए संबंधित अधिकारियों से संपर्क करने के लिए भी प्रेरित किया गया।

मिशन शक्ति समेत कई योजनाओं की दी गई जानकारी

कार्यक्रम के दौरान महिलाओं को मिशन शक्ति योजना के साथ-साथ प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना, मुख्यमंत्री कन्या उत्थान योजना, बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ, वन स्टॉप सेंटर और महिला हेल्पलाइन सहित कई महत्वपूर्ण योजनाओं के बारे में जानकारी दी गई।

पदाधिकारियों ने महिलाओं को बताया कि सरकार की विभिन्न योजनाओं का उद्देश्य महिलाओं और बालिकाओं को शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा और सामाजिक एवं आर्थिक विकास के अवसर उपलब्ध कराना है। इन योजनाओं के माध्यम से जरूरतमंद और पात्र महिलाओं तथा बालिकाओं को सहायता उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है।

महिलाओं को योजनाओं की पात्रता के बारे में भी जानकारी दी गई। इसके साथ ही आवेदन करने की प्रक्रिया, आवश्यक दस्तावेज और योजना का लाभ प्राप्त करने के लिए अपनाई जाने वाली प्रक्रिया को भी सरल तरीके से समझाया गया।

कार्यक्रम में मौजूद अधिकारियों ने कहा कि कई बार सरकारी योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक केवल इसलिए नहीं पहुंच पाता है क्योंकि उन्हें योजना के बारे में सही जानकारी नहीं होती। ऐसे में जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से महिलाओं तक योजनाओं की जानकारी पहुंचाना बेहद जरूरी है।

संवाद के माध्यम से महिलाओं की समस्याओं को समझा

‘सखी वार्ता’ कार्यक्रम की खास बात यह रही कि इसे केवल एकतरफा जागरूकता कार्यक्रम के रूप में आयोजित नहीं किया गया। कार्यक्रम में महिलाओं के साथ संवाद स्थापित किया गया और उनसे सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में आने वाली समस्याओं के बारे में जानकारी ली गई।

उपस्थित महिलाओं ने अपनी परेशानियों और शंकाओं को पदाधिकारियों के सामने रखा। संबंधित अधिकारियों ने उनकी बातों को ध्यानपूर्वक सुना और योजनाओं से जुड़े सवालों का समाधान करने का प्रयास किया। पात्र महिलाओं को संबंधित योजनाओं का लाभ प्राप्त करने के लिए आवश्यक मार्गदर्शन भी दिया गया।

इस संवादात्मक प्रक्रिया के माध्यम से यह समझने का प्रयास किया गया कि जमीनी स्तर पर महिलाओं को सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में किस प्रकार की कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। अधिकारियों ने महिलाओं को भरोसा दिलाया कि पात्रता पूरी करने वाले लाभार्थियों को निर्धारित प्रक्रिया के तहत योजनाओं से जोड़ने के लिए आवश्यक सहयोग दिया जाएगा।

महिलाओं को आर्थिक और सामाजिक रूप से मजबूत बनाने पर जोर

कार्यक्रम में महिलाओं के सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण को महत्वपूर्ण विषय के रूप में सामने रखा गया। अधिकारियों ने कहा कि महिलाओं को उनके अधिकारों और सरकारी योजनाओं की जानकारी देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया जा सकता है।

महिलाओं को यह संदेश दिया गया कि वे अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहें और जरूरत पड़ने पर उपलब्ध सरकारी सहायता का लाभ उठाएं। साथ ही उन्हें अपने आसपास की अन्य महिलाओं और किशोरियों को भी सरकारी योजनाओं के बारे में जानकारी देने के लिए प्रेरित किया गया।

कार्यक्रम के माध्यम से महिलाओं को यह समझाने का प्रयास किया गया कि किसी भी योजना का लाभ प्राप्त करने के लिए सही जानकारी और उचित प्रक्रिया का पालन जरूरी है। यदि किसी महिला को आवेदन या योजना से संबंधित किसी प्रकार की परेशानी आती है तो वह संबंधित विभाग या सहायता केंद्र से संपर्क कर सकती है।

बाल विवाह के खिलाफ चलाया गया जागरूकता अभियान

‘सखी वार्ता’ कार्यक्रम के दौरान बाल विवाह मुक्त भारत अभियान को लेकर भी विशेष जागरूकता अभियान चलाया गया। महिलाओं और किशोरियों को बाल विवाह के दुष्परिणामों के बारे में जानकारी दी गई और समाज से इस कुप्रथा को समाप्त करने के लिए सामूहिक प्रयास करने की अपील की गई।

पदाधिकारियों ने बताया कि बाल विवाह का असर केवल एक व्यक्ति के जीवन पर नहीं पड़ता, बल्कि इससे पूरे परिवार और समाज पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। कम उम्र में विवाह होने से बालिकाओं की शिक्षा प्रभावित होती है और उनके स्वास्थ्य पर भी गंभीर असर पड़ सकता है।

कार्यक्रम में बाल विवाह के सामाजिक, शैक्षणिक, आर्थिक और स्वास्थ्य संबंधी दुष्परिणामों को लेकर महिलाओं को जागरूक किया गया। उन्हें बताया गया कि बालिकाओं को शिक्षा का अवसर मिलना चाहिए और उनके भविष्य को सुरक्षित बनाने के लिए कम उम्र में विवाह जैसी सामाजिक कुप्रथा को रोकना जरूरी है।

परिवार और समाज में जागरूकता फैलाने की अपील

कार्यक्रम में मौजूद महिलाओं से अपील की गई कि वे अपने परिवार और आसपास के क्षेत्रों में बाल विवाह के खिलाफ जागरूकता फैलाएं। अधिकारियों ने कहा कि बाल विवाह की रोकथाम केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति को इसमें अपनी भूमिका निभानी होगी।

महिलाओं को अपने गांव, मोहल्ले और समुदाय में बाल विवाह की घटनाओं को रोकने के लिए सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया गया। उन्हें बताया गया कि यदि कहीं बाल विवाह की जानकारी मिलती है तो संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों या निर्धारित सहायता व्यवस्था के माध्यम से इसकी सूचना दी जा सकती है।

कार्यक्रम के दौरान यह संदेश भी दिया गया कि बालिकाओं की शिक्षा और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए परिवार और समाज को मिलकर काम करना चाहिए। जागरूकता के माध्यम से ही बाल विवाह जैसी सामाजिक समस्या को प्रभावी तरीके से समाप्त किया जा सकता है।

महिला सुरक्षा और सहायता सेवाओं की जानकारी

कार्यक्रम में वन स्टॉप सेंटर और महिला हेल्पलाइन जैसी सहायता सेवाओं के बारे में भी महिलाओं को जानकारी दी गई। महिलाओं को बताया गया कि किसी प्रकार की हिंसा, उत्पीड़न या संकट की स्थिति में उपलब्ध सहायता तंत्र के माध्यम से सहयोग प्राप्त किया जा सकता है।

पदाधिकारियों ने महिलाओं को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहने और किसी भी समस्या की स्थिति में चुप न रहने की अपील की। उन्हें यह भी बताया गया कि जरूरत पड़ने पर संबंधित सहायता व्यवस्था से संपर्क कर आवश्यक मदद प्राप्त की जा सकती है।

महिला सुरक्षा से जुड़ी सेवाओं की जानकारी को ग्रामीण और स्थानीय स्तर तक पहुंचाना कार्यक्रम का महत्वपूर्ण उद्देश्य रहा। इससे महिलाओं में सुरक्षा व्यवस्था और उपलब्ध सहायता को लेकर जागरूकता बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

अधिकारियों और कर्मियों की रही मौजूदगी

कार्यक्रम में जिला मिशन समन्वयक तबरेज खान, फाइनेंशियल लिटरेसी स्पेशलिस्ट अभिषेक सुमन, आईसीडीएस सबौर की बाल विकास परियोजना पदाधिकारी शोभा रानी, जिला समन्वयक अरविंद पांडेय और जिला परियोजना सहायक पूजा काले सहित संबंधित पदाधिकारी एवं कर्मी मौजूद रहे।

अधिकारियों ने कार्यक्रम में शामिल महिलाओं के साथ संवाद किया और उन्हें सरकारी योजनाओं से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी उपलब्ध कराई। साथ ही महिलाओं की ओर से उठाए गए सवालों और समस्याओं पर भी आवश्यक मार्गदर्शन दिया गया।

कार्यक्रम के दौरान महिलाओं को योजनाओं की जानकारी को अपने तक सीमित नहीं रखने की अपील की गई। उनसे कहा गया कि वे अपने परिवार, आस-पड़ोस और समुदाय की अन्य महिलाओं तथा किशोरियों को भी इन योजनाओं और सहायता सेवाओं के बारे में जानकारी दें।

जागरूकता के साथ सशक्तिकरण का संदेश

सबौर में आयोजित ‘सखी वार्ता’ कार्यक्रम के माध्यम से महिलाओं को यह संदेश दिया गया कि सरकारी योजनाओं की सही जानकारी और उसका लाभ प्राप्त करने की प्रक्रिया को समझना महिला सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। जब महिलाएं अपने अधिकारों और उपलब्ध सुविधाओं के बारे में जागरूक होंगी, तब वे अपने परिवार और समाज के विकास में भी अधिक प्रभावी भूमिका निभा सकेंगी।

कार्यक्रम में बाल विवाह के खिलाफ सामूहिक आवाज उठाने और बालिकाओं को शिक्षा का अवसर देने पर भी जोर दिया गया। महिलाओं से अपील की गई कि वे अपने आसपास किसी भी बाल विवाह को रोकने में प्रशासन का सहयोग करें और बाल विवाह मुक्त समाज के निर्माण में अपनी जिम्मेदारी निभाएं।

कुल मिलाकर, सबौर प्रखंड सभागार में आयोजित ‘सखी वार्ता’ कार्यक्रम महिलाओं और किशोरियों को सरकारी योजनाओं से जोड़ने, उनकी समस्याओं को समझने और उन्हें सामाजिक एवं आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में सामने आया। कार्यक्रम में योजनाओं की जानकारी के साथ-साथ महिला सुरक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य और बाल विवाह की रोकथाम जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर भी चर्चा हुई। प्रशासन और संबंधित विभागों की ओर से महिलाओं को जागरूक कर उन्हें उपलब्ध सुविधाओं से जोड़ने का प्रयास किया गया। साथ ही महिलाओं से अपील की गई कि वे स्वयं जागरूक होने के साथ अपने परिवार और समुदाय की अन्य महिलाओं एवं किशोरियों को भी जागरूक करें, ताकि सरकारी योजनाओं का लाभ अधिक से अधिक पात्र लोगों तक पहुंच सके और समाज को बाल विवाह जैसी कुप्रथा से मुक्त बनाने की दिशा में सामूहिक प्रयास मजबूत हो।

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