
पटना/दानापुर: देश में पहली बार किसी सेना छावनी (आर्मी कैंटोनमेंट) में 350 सिंदूर (बिक्सा ओरेलाना) के पौधों का रोपण कर ‘सिंदूर पार्क’ की स्थापना की गई है। दानापुर आर्मी कैंट में विकसित किए जा रहे इस पार्क को भारतीय सेना, पर्यावरण संरक्षण और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बताया गया।
राज्यपाल और कुलपति ने किया शुभारंभ
पार्क की स्थापना के अवसर पर बिहार के राज्यपाल-सह-कुलाधिपति लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन, बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर के कुलपति डॉ. डी.आर. सिंह तथा झारखंड एवं बिहार सब एरिया (दानापुर) के जनरल ऑफिसर कमांडिंग (GOC) मेजर जनरल जितेंद्र सिंह ने संयुक्त रूप से सिंदूर के पौधे लगाकर इसकी शुरुआत की।
“सैन्य और नागरिक समाज के समन्वय का प्रतीक”
राज्यपाल ने कहा कि यह सिंदूर पार्क भारतीय सेना और नागरिक समाज के बीच विश्वास, सहयोग और साझा उत्तरदायित्व का जीवंत प्रतीक है। उन्होंने कहा कि यह पहल आने वाली पीढ़ियों को देश की सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण, दोनों के महत्व का संदेश देगी। साथ ही बिहार कृषि विश्वविद्यालय द्वारा प्राकृतिक सिंदूर के संरक्षण, अनुसंधान और व्यावसायीकरण के प्रयासों की सराहना की।
कुलपति बोले- समर्पण और बलिदान का प्रतीक है सिंदूर
बिहार कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. डी.आर. सिंह ने कहा कि यह देश का पहला सेना कैंटोनमेंट है, जहां सिंदूर पार्क की स्थापना की गई है। उनके अनुसार सिंदूर का लाल रंग मातृभूमि के प्रति समर्पण, अखंडता, प्रतिबद्धता, साहस और सर्वोच्च बलिदान का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय प्राकृतिक सिंदूर के संरक्षण, वैज्ञानिक उत्पादन, मूल्य संवर्धन और ग्रामीण महिलाओं के माध्यम से इसके व्यावसायीकरण पर भी कार्य कर रहा है।
पर्यावरण संरक्षण और राष्ट्रभक्ति का संदेश
कार्यक्रम में सेना के अधिकारियों ने भी इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि यह पार्क सैनिकों, उनके परिवारों और आम नागरिकों के लिए प्रेरणा का केंद्र बनेगा। इसके माध्यम से पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ प्राकृतिक सिंदूर के सांस्कृतिक और राष्ट्रीय महत्व के प्रति भी जागरूकता बढ़ेगी।
कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के निदेशक प्रशासन डॉ. राजेश कुमार, निदेशक अनुसंधान डॉ. ए.के. सिंह, एआरआई, पटना के निदेशक डॉ. शिवनाथ दास, सेना के वरिष्ठ अधिकारी, वैज्ञानिक और अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
नोट: यह समाचार उपलब्ध प्रेस विज्ञप्ति/आयोजकों द्वारा जारी जानकारी पर आधारित है।


