संसद मार्च से पहले दिल्ली में हाई अलर्ट: CJP का बड़ा दावा, सरकार से पहली बार संपर्क की बात; पुलिस ने अनुमति से किया इनकार

संसद के मानसून सत्र के पहले दिन प्रस्तावित CJP के संसद मार्च को लेकर दिल्ली में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। राजधानी के कई संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है, जबकि दिल्ली पुलिस ने मार्च निकालने की अनुमति देने से साफ इनकार कर दिया है। इस बीच CJP ने दावा किया है कि पहली बार केंद्र सरकार ने संगठन से आधिकारिक रूप से संपर्क करने की कोशिश की है। हालांकि, इस दावे की सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

CJP का दावा, सरकार की ओर से नहीं आई पुष्टि

CJP के प्रवक्ता ने कहा कि केंद्र सरकार ने पहली बार संगठन से औपचारिक बातचीत की पहल की है। संगठन का दावा है कि यह कदम उनके आंदोलन को देखते हुए उठाया गया। हालांकि, केंद्र सरकार की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। CJP लंबे समय से कथित नीट पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग करते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहा है।

संसद मार्च की अनुमति नहीं

दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए संसद मार्च की अनुमति देने से इनकार कर दिया है। जंतर-मंतर, रायसीना रोड, संसद मार्ग और आसपास के इलाकों में भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है। भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत प्रतिबंध भी लागू किए गए हैं।

इसके बावजूद सोमवार सुबह हल्की बारिश के बीच बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर पहुंचे। वहां राष्ट्रीय ध्वज फहराया गया और वंदे मातरम् का सामूहिक गायन किया गया।

प्रदर्शनकारियों से तीन नारे लगाने की अपील

CJP के प्रवक्ता आशुतोष रांका ने प्रदर्शनकारियों से शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अपील करते हुए केवल तीन नारे लगाने को कहा—

  • भारत माता की जय
  • धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दो
  • इंकलाब जिंदाबाद

संगठन ने समर्थकों से अनुशासन बनाए रखने और किसी भी तरह के उकसावे से बचने की अपील भी की।

सोनम वांगचुक की शर्तें

20 दिनों से अधिक समय से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने अस्पताल से एक हस्तलिखित संदेश जारी किया है। उन्होंने कहा कि यदि केंद्र सरकार शिक्षा व्यवस्था की हालिया कमियों, जिनमें पेपर लीक जैसे मामले शामिल हैं, की जिम्मेदारी स्वीकार करती है तो वह अपना अनशन समाप्त करने पर विचार करेंगे।

उन्होंने यह भी कहा कि यदि CJP प्रतिनिधियों को संसद के बाहर सांसदों से मिलने की अनुमति दी जाती है और इन मुद्दों को मानसून सत्र में उठाने का भरोसा मिलता है, तब भी वे अपना अनशन समाप्त कर सकते हैं।

साथ ही, वांगचुक ने दावा किया कि उन्हें सफदरजंग अस्पताल में उनकी इच्छा के विरुद्ध रखा गया है।

फिलहाल स्थिति पर सबकी नजर

दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी है और संसद क्षेत्र में पुलिस पूरी तरह सतर्क है। दूसरी ओर, CJP अपने आंदोलन को जारी रखने की बात कह रहा है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि दिनभर की घटनाएं किस दिशा में जाती हैं और क्या आंदोलन तथा सरकार के बीच किसी तरह की औपचारिक बातचीत आगे बढ़ती है।

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