बिहार कृषि विश्वविद्यालय में स्नातकोत्तर और पीएचडी प्रवेश परीक्षा शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न

भागलपुर स्थित बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर में शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए स्नातकोत्तर (एमएससी) और पीएचडी पाठ्यक्रमों में नामांकन हेतु आयोजित प्रवेश परीक्षा रविवार को शांतिपूर्ण, पारदर्शी और पूरी तरह कदाचारमुक्त वातावरण में सफलतापूर्वक संपन्न हुई। विश्वविद्यालय प्रशासन ने परीक्षा के आयोजन को लेकर पहले से व्यापक तैयारियां की थीं, जिसका सकारात्मक प्रभाव परीक्षा संचालन के दौरान स्पष्ट रूप से देखने को मिला। अभ्यर्थियों के लिए बेहतर व्यवस्था, सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम और प्रशासनिक सतर्कता के कारण पूरी परीक्षा बिना किसी व्यवधान के संपन्न हुई।

विश्वविद्यालय परिसर में सुबह से ही अभ्यर्थियों की आवाजाही शुरू हो गई थी। निर्धारित समय के अनुसार परीक्षा का आयोजन सुबह 11 बजे से दोपहर 1 बजे तक किया गया। परीक्षा केंद्रों पर प्रवेश से पहले अभ्यर्थियों की पहचान और दस्तावेजों की सावधानीपूर्वक जांच की गई। सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए विभिन्न स्थानों पर आवश्यक निगरानी की व्यवस्था भी की गई थी, जिससे परीक्षा पूरी तरह निष्पक्ष और अनुशासित माहौल में संपन्न हो सकी।

परीक्षा से पहले विश्वविद्यालय प्रशासन ने अभ्यर्थियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए कक्षवार सीट प्लान जारी कर दिया था। इससे छात्रों को परीक्षा केंद्र और अपने निर्धारित कक्ष की जानकारी पहले ही मिल गई, जिसके कारण किसी प्रकार की अव्यवस्था या भ्रम की स्थिति उत्पन्न नहीं हुई। समय पर सभी अभ्यर्थी अपने-अपने परीक्षा कक्ष में पहुंच गए और परीक्षा निर्धारित समय पर शुरू हो गई।

स्नातकोत्तर यानी एमएससी कार्यक्रम में प्रवेश के लिए इस वर्ष बड़ी संख्या में छात्रों ने आवेदन किया। विश्वविद्यालय को कुल 1,331 आवेदन प्राप्त हुए थे। इनमें से 1,242 अभ्यर्थियों ने परीक्षा में भाग लिया। इस प्रकार उपस्थिति का प्रतिशत 93.31 दर्ज किया गया, जो प्रवेश परीक्षा के प्रति छात्रों की गंभीरता और विश्वविद्यालय की लोकप्रियता को दर्शाता है। इतनी बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों की उपस्थिति के बावजूद परीक्षा का संचालन पूरी तरह व्यवस्थित रहा।

एमएससी प्रवेश परीक्षा में शामिल होने वाले अभ्यर्थियों में 741 पुरुष अभ्यर्थी रहे, जो कुल उपस्थिति का 55.67 प्रतिशत है। वहीं 501 महिला अभ्यर्थियों ने भी परीक्षा में भाग लिया, जिनकी हिस्सेदारी 37.64 प्रतिशत रही। महिला अभ्यर्थियों की उल्लेखनीय भागीदारी यह संकेत देती है कि कृषि शिक्षा के क्षेत्र में युवतियों की रुचि लगातार बढ़ रही है और वे उच्च शिक्षा के माध्यम से कृषि अनुसंधान तथा वैज्ञानिक विकास में अपना योगदान देने के लिए आगे आ रही हैं।

पीएचडी कार्यक्रम में नामांकन के लिए भी इस वर्ष अच्छी संख्या में आवेदन प्राप्त हुए। विश्वविद्यालय के अनुसार पीएचडी पाठ्यक्रमों के लिए कुल 357 आवेदन जमा हुए थे। इनमें से 305 अभ्यर्थियों ने परीक्षा में भाग लिया। इस तरह पीएचडी प्रवेश परीक्षा में उपस्थिति का प्रतिशत 87.89 रहा। यह आंकड़ा बताता है कि कृषि अनुसंधान और उच्च अध्ययन के क्षेत्र में विद्यार्थियों का रुझान लगातार मजबूत हो रहा है।

पीएचडी प्रवेश परीक्षा में शामिल अभ्यर्थियों में 181 पुरुष अभ्यर्थी थे, जो कुल उपस्थिति का 59.34 प्रतिशत रहे। वहीं 124 महिला अभ्यर्थियों ने परीक्षा दी, जिनकी भागीदारी 40.65 प्रतिशत दर्ज की गई। महिला शोधार्थियों की बढ़ती संख्या यह दर्शाती है कि कृषि अनुसंधान के क्षेत्र में महिलाओं की भूमिका लगातार मजबूत हो रही है और वे नई तकनीकों तथा वैज्ञानिक शोध के माध्यम से कृषि विकास में महत्वपूर्ण योगदान देने के लिए आगे बढ़ रही हैं।

विश्वविद्यालय प्रशासन ने परीक्षा के दौरान पारदर्शिता बनाए रखने के लिए कई स्तरों पर निगरानी की व्यवस्था की थी। परीक्षा केंद्रों पर सभी आवश्यक प्रशासनिक और सुरक्षा इंतजाम पहले से सुनिश्चित किए गए थे। परीक्षा संचालन से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों को स्पष्ट जिम्मेदारियां सौंपी गई थीं, जिससे प्रत्येक प्रक्रिया निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुसार पूरी की जा सके। परीक्षा के दौरान किसी भी प्रकार की अव्यवस्था, अनुशासनहीनता या कदाचार की कोई घटना सामने नहीं आई।

परीक्षा के सफल आयोजन में विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों, परीक्षा संचालन से जुड़े अधिकारियों, केंद्र प्रभारियों, शिक्षकों और कर्मचारियों ने सक्रिय भूमिका निभाई। सभी ने समन्वय के साथ कार्य करते हुए यह सुनिश्चित किया कि प्रत्येक अभ्यर्थी को निष्पक्ष वातावरण में परीक्षा देने का अवसर मिले। प्रशासन की सतर्कता और कर्मचारियों की जिम्मेदारी के कारण परीक्षा पूरी तरह शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो सकी।

विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और उत्कृष्ट अनुसंधान के लिए योग्य विद्यार्थियों का चयन अत्यंत आवश्यक है। इसी उद्देश्य से प्रवेश प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष बनाया गया है। परीक्षा आयोजन के दौरान अपनाई गई व्यवस्थाएं इसी प्रतिबद्धता का हिस्सा हैं, ताकि किसी भी अभ्यर्थी के साथ अन्याय न हो और केवल योग्यता के आधार पर चयन सुनिश्चित किया जा सके।

बिहार कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. डी. आर. सिंह ने परीक्षा के सफल आयोजन पर संतोष व्यक्त करते हुए सभी अधिकारियों, शिक्षकों और कर्मचारियों की सराहना की। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय का उद्देश्य कृषि शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रतिभाओं को अवसर प्रदान करना है। इसके लिए प्रवेश प्रक्रिया को पूरी तरह निष्पक्ष, पारदर्शी और विश्वसनीय बनाए रखना विश्वविद्यालय की प्राथमिकता है।

उन्होंने यह भी कहा कि कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीकों, नवाचार और वैज्ञानिक अनुसंधान की आवश्यकता लगातार बढ़ रही है। ऐसे समय में योग्य और प्रतिभाशाली विद्यार्थियों का चयन भविष्य की कृषि व्यवस्था को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। विश्वविद्यालय आने वाले समय में भी प्रवेश प्रक्रिया की गुणवत्ता और पारदर्शिता को बनाए रखने के लिए इसी तरह के प्रभावी कदम उठाता रहेगा।

प्रवेश परीक्षा सफलतापूर्वक संपन्न होने के बाद अब अभ्यर्थियों की नजर आगामी चयन प्रक्रिया पर है। परीक्षा परिणाम घोषित होने के बाद सफल उम्मीदवारों को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार काउंसलिंग और नामांकन की प्रक्रिया से गुजरना होगा। विश्वविद्यालय प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि आगे की सभी प्रक्रियाएं भी तय नियमों और पूरी पारदर्शिता के साथ संपन्न कराई जाएंगी, ताकि योग्य अभ्यर्थियों को समय पर नामांकन का अवसर मिल सके। बिहार कृषि विश्वविद्यालय का यह सफल आयोजन एक बार फिर यह साबित करता है कि सुनियोजित तैयारी, बेहतर प्रशासनिक व्यवस्था और पारदर्शी कार्यप्रणाली के माध्यम से बड़ी प्रवेश परीक्षाओं का संचालन भी पूरी निष्पक्षता और अनुशासन के साथ किया जा सकता है।

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