CRPF का जवान बना गैंगस्टर! AK-47 से डबल मर्डर, गंगा में फेंकी थीं लाशें! अब भोला सिंह उगलेगा हर सच?

पटना: करीब 12 साल पहले बिहार और पश्चिम बंगाल को दहला देने वाले चर्चित डबल मर्डर केस में अब बड़ा मोड़ आ गया है। कुख्यात अपराधी भोला सिंह के पुलिस रिमांड में आने के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि इस सनसनीखेज हत्याकांड से जुड़े कई ऐसे राज सामने आ सकते हैं, जो वर्षों से जांच एजेंसियों की फाइलों में दबे हुए हैं। पटना पुलिस अब उससे आमने-सामने पूछताछ कर पूरे अपराध नेटवर्क की परतें खोलने की तैयारी में है।

कोलकाता के कारोबारियों की हत्या से मचा था हड़कंप

यह मामला वर्ष 2014 का है, जब कोलकाता के कारोबारी सुखदेव दास और उनके सहयोगी विश्वजीत मंडल रहस्यमय तरीके से लापता हो गए थे। शुरुआती जांच में मामला अपहरण का लगा, लेकिन बाद में खुलासा हुआ कि दोनों की फिरौती के लिए साजिश रची गई थी।

जांच के अनुसार, दोनों को पहले झारखंड के जसीडीह बुलाया गया और फिर लोहे की छड़ खरीदने के बहाने बिहार के पंडारक लाया गया। आरोप है कि 50 लाख रुपये की फिरौती नहीं मिलने पर सुखदेव दास की AK-47 से गोली मारकर हत्या कर दी गई। इसके बाद विश्वजीत मंडल की भी हत्या कर शवों को बोरे में भरकर गंगा में फेंक दिया गया।

CBI जांच में सामने आया बड़ा नेटवर्क

मामले की शुरुआती जांच कोलकाता पुलिस ने की थी, लेकिन पीड़ित परिवार की मांग पर 2015 में कोलकाता हाईकोर्ट ने जांच सीबीआई को सौंप दी। सीबीआई की जांच में भोला सिंह के अलावा कई अन्य आरोपियों की भूमिका सामने आई। एजेंसी ने अपनी चार्जशीट में पटना और पंडारक से जुड़े कई लोगों के नाम भी शामिल किए।

सिर्फ डबल मर्डर नहीं, नौ थानों के मामलों में होगी पूछताछ

पटना पुलिस के अनुसार, भोला सिंह से केवल इस डबल मर्डर केस में ही नहीं, बल्कि पंडारक, बाढ़, एसकेपुरी, गांधी मैदान, एनटीपीसी, लखीसराय समेत नौ थानों में दर्ज हत्या, अपहरण, रंगदारी, आर्म्स एक्ट और अन्य गंभीर मामलों में भी पूछताछ की जाएगी।

जांच एजेंसियों को उम्मीद है कि रिमांड के दौरान अपराधियों के नेटवर्क, हथियारों की सप्लाई, रंगदारी के सिंडिकेट और फरारी के दौरान मदद करने वाले लोगों के बारे में भी महत्वपूर्ण जानकारी मिल सकती है।

CRPF कॉन्स्टेबल से बना कुख्यात गैंगस्टर

भोला सिंह कभी सीआरपीएफ का कॉन्स्टेबल था और निशानेबाजी में उसकी अच्छी पकड़ मानी जाती थी। बाद में उसने नौकरी छोड़ अपराध की दुनिया का रास्ता चुन लिया। धीरे-धीरे हत्या, अपहरण, रंगदारी और गैंगवार जैसे मामलों में उसका नाम सामने आने लगा। बाद में उसने अपना अलग गिरोह खड़ा कर लिया और बिहार के कुख्यात अपराधियों में शामिल हो गया।

फर्जी पहचान बनाकर वर्षों तक रहा फरार

पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक गिरफ्तारी से बचने के लिए भोला सिंह अपने सहयोगी के साथ पश्चिम बंगाल चला गया था। वहां उसने फर्जी नाम और दस्तावेजों के सहारे किराये का फ्लैट लेकर वर्षों तक पुलिस से बचते हुए अपना नेटवर्क संचालित किया। जांच एजेंसियों का दावा है कि इसी दौरान डबल मर्डर की पूरी साजिश को अंजाम दिया गया।

रिमांड से खुल सकते हैं कई अनसुलझे राज

सूरत से गिरफ्तारी के बाद अब भोला सिंह पटना पुलिस की रिमांड पर है। जांच अधिकारियों का मानना है कि पूछताछ से इस हाई-प्रोफाइल डबल मर्डर केस के अलावा कई पुराने आपराधिक मामलों की गुत्थियां भी सुलझ सकती हैं। साथ ही यह भी पता चल सकता है कि वर्षों तक फरारी के दौरान उसे किन लोगों का संरक्षण मिलता रहा।

अब सबकी नजर पुलिस पूछताछ पर है, क्योंकि माना जा रहा है कि 12 साल पुराने इस खूनी कांड का सबसे बड़ा सच अब सामने आ सकता है।

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