आईआईएम बोधगया और आईआईटी पटना ने 5 वर्षीय ड्यूल डिग्री कार्यक्रम को दिया औपचारिक स्वरूप, छात्रों को बिना CAT मिलेगा MBA में प्रवेश

भारतीय उच्च शिक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए आईआईएम बोधगया और आईआईटी पटना ने अपने संयुक्त 5 वर्षीय ड्यूल डिग्री कार्यक्रम को औपचारिक रूप देने के लिए आपसी समझौते में नया संशोधन किया है। इस नई व्यवस्था के लागू होने के बाद दोनों प्रतिष्ठित संस्थानों के बीच संचालित होने वाला एकीकृत बीटेक और एमबीए कार्यक्रम पूरी तरह से निर्धारित शैक्षणिक ढांचे के साथ संचालित किया जाएगा। यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के उद्देश्यों को ध्यान में रखते हुए तैयार की गई है, जिसका उद्देश्य छात्रों को तकनीकी ज्ञान के साथ प्रबंधन कौशल भी प्रदान करना है।

इस समझौते के बाद अब इंजीनियरिंग और प्रबंधन की पढ़ाई को एक ही शैक्षणिक यात्रा में जोड़ दिया गया है। इससे छात्रों को अलग-अलग प्रवेश परीक्षाओं और लंबी शैक्षणिक प्रक्रिया से गुजरने की आवश्यकता कम होगी। दोनों संस्थानों का मानना है कि भविष्य की बदलती औद्योगिक और तकनीकी आवश्यकताओं को देखते हुए ऐसे पाठ्यक्रमों की मांग लगातार बढ़ रही है, जहां तकनीकी दक्षता और प्रबंधन क्षमता का संतुलित विकास हो सके।

यह ड्यूल डिग्री कार्यक्रम पूर्णकालिक और आवासीय होगा। इसमें कुल 60 छात्रों को प्रवेश दिया जाएगा। कार्यक्रम को 3+2 मॉडल के आधार पर तैयार किया गया है। इसके अंतर्गत विद्यार्थी पहले तीन वर्षों तक आईआईटी पटना में बीटेक या बीएस की पढ़ाई करेंगे। इसके बाद शेष दो वर्षों के लिए वे आईआईएम बोधगया में एमबीए कार्यक्रम का हिस्सा बनेंगे। इस प्रकार पांच वर्षों में छात्र इंजीनियरिंग और प्रबंधन दोनों क्षेत्रों की डिग्री प्राप्त करेंगे।

कार्यक्रम का पाठ्यक्रम इस तरह तैयार किया गया है कि छात्रों को केवल पारंपरिक इंजीनियरिंग शिक्षा तक सीमित न रखा जाए, बल्कि उन्हें विज्ञान, तकनीक, नवाचार, डेटा आधारित निर्णय, नेतृत्व क्षमता, व्यवसाय प्रबंधन और विभिन्न अंतर्विषयक विषयों का भी व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त हो। इससे छात्रों को उद्योगों की वास्तविक जरूरतों के अनुरूप तैयार किया जा सकेगा।

इस कार्यक्रम की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि छात्रों को एमबीए में प्रवेश के लिए अलग से कॉमन एडमिशन टेस्ट यानी CAT परीक्षा देने की आवश्यकता नहीं होगी। जो अभ्यर्थी जेईई एडवांस्ड में सफल होंगे और संयुक्त सीट आवंटन प्राधिकरण (JoSAA) की काउंसलिंग प्रक्रिया के माध्यम से इस विशेष ड्यूल डिग्री कार्यक्रम में प्रवेश प्राप्त करेंगे, उन्हें पहले दिन से ही पांच वर्षीय एकीकृत पाठ्यक्रम का हिस्सा माना जाएगा। इससे योग्य विद्यार्थियों को शुरुआत में ही इंजीनियरिंग और प्रबंधन दोनों क्षेत्रों में करियर बनाने का अवसर मिल जाएगा।

नई व्यवस्था के अनुसार कार्यक्रम की शुरुआत आईआईटी पटना से होगी। सभी नए विद्यार्थियों का ओरिएंटेशन और प्रारंभिक शैक्षणिक सत्र वहीं आयोजित किया जाएगा। पहले तीन वर्षों तक छात्र आईआईटी पटना के शैक्षणिक वातावरण में अध्ययन करेंगे और इंजीनियरिंग की मजबूत नींव तैयार करेंगे। इसके बाद वे आईआईएम बोधगया में स्थानांतरित होकर अगले दो वर्षों तक प्रबंधन शिक्षा प्राप्त करेंगे, जहां उन्हें उद्योग, वित्त, विपणन, संचालन, मानव संसाधन, रणनीतिक प्रबंधन और आधुनिक व्यावसायिक चुनौतियों से जुड़े विषयों का गहन अध्ययन कराया जाएगा।

कार्यक्रम के समापन पर विद्यार्थियों को संयुक्त डिग्री प्रदान की जाएगी। दीक्षांत समारोह आईआईएम बोधगया में आयोजित किया जाएगा, जहां दोनों संस्थानों की ओर से संयुक्त प्रमाणपत्र प्रदान किया जाएगा। यह व्यवस्था इस कार्यक्रम की विशेष पहचान बनेगी और विद्यार्थियों को देश के दो प्रमुख राष्ट्रीय संस्थानों से शिक्षा प्राप्त करने का गौरव भी मिलेगा।

रोजगार के अवसरों को मजबूत बनाने के लिए दोनों संस्थानों ने संयुक्त प्लेसमेंट सहायता उपलब्ध कराने का भी निर्णय लिया है। जब छात्र अपनी पढ़ाई पूरी करने के करीब होंगे, तब आईआईएम बोधगया और आईआईटी पटना के प्लेसमेंट प्रकोष्ठ मिलकर कंपनियों से संपर्क करेंगे और विद्यार्थियों को बेहतर रोजगार अवसर उपलब्ध कराने में सहयोग देंगे। इससे छात्रों को तकनीकी और प्रबंधन दोनों क्षेत्रों से जुड़ी प्रतिष्ठित कंपनियों में रोजगार प्राप्त करने की संभावना और अधिक बढ़ जाएगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान समय में ऐसे पेशेवरों की मांग तेजी से बढ़ रही है जो तकनीकी समझ के साथ-साथ व्यवसाय संचालन और नेतृत्व की क्षमता भी रखते हों। इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए इस कार्यक्रम में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, हेल्थकेयर मैनेजमेंट, सप्लाई चेन मैनेजमेंट, दूरसंचार, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और अन्य उभरते क्षेत्रों को भी विशेष महत्व दिया गया है। इससे विद्यार्थियों को भविष्य की रोजगार आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार किया जा सकेगा।

आर्थिक रूप से कमजोर लेकिन प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को भी इस कार्यक्रम में आगे बढ़ने का अवसर मिले, इसके लिए दोनों संस्थानों ने आवश्यकता आधारित वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है। बीटेक और एमबीए दोनों चरणों में संबंधित संस्थान अपनी-अपनी छात्रवृत्ति और वित्तीय सहायता नीति के अनुसार पात्र विद्यार्थियों को सहायता प्रदान करेंगे। इससे आर्थिक परिस्थितियां किसी भी छात्र की उच्च शिक्षा में बाधा नहीं बनेंगी।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का प्रमुख उद्देश्य बहुविषयक शिक्षा को बढ़ावा देना, छात्रों को लचीले शैक्षणिक विकल्प उपलब्ध कराना और उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप कुशल मानव संसाधन तैयार करना है। आईआईएम बोधगया और आईआईटी पटना की यह संयुक्त पहल उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। इस कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थी एक ही पाठ्यक्रम में तकनीकी विशेषज्ञता, प्रबंधन कौशल और नेतृत्व क्षमता विकसित कर सकेंगे।

शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले वर्षों में इस प्रकार के एकीकृत ड्यूल डिग्री कार्यक्रमों की लोकप्रियता और बढ़ेगी, क्योंकि उद्योग जगत अब ऐसे पेशेवरों को प्राथमिकता दे रहा है जो केवल तकनीकी ज्ञान ही नहीं बल्कि व्यावसायिक निर्णय लेने, टीम का नेतृत्व करने और बदलती तकनीकों के अनुरूप नवाचार करने में भी सक्षम हों।

आईआईएम बोधगया और आईआईटी पटना के बीच हुआ यह समझौता देश की उच्च शिक्षा व्यवस्था के लिए एक नई दिशा प्रस्तुत करता है। पांच वर्षीय यह ड्यूल डिग्री कार्यक्रम उन विद्यार्थियों के लिए विशेष अवसर लेकर आया है जो इंजीनियरिंग के साथ-साथ प्रबंधन के क्षेत्र में भी उत्कृष्ट करियर बनाना चाहते हैं। बिना CAT परीक्षा के एमबीए में प्रवेश, संयुक्त प्लेसमेंट सहायता, आधुनिक पाठ्यक्रम और वित्तीय सहायता जैसी सुविधाएं इस कार्यक्रम को देश के सबसे आकर्षक एकीकृत शैक्षणिक विकल्पों में शामिल करती हैं। आने वाले समय में यह मॉडल अन्य संस्थानों के लिए भी प्रेरणा बन सकता है और भारतीय उच्च शिक्षा को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

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