दरभंगा संग्रहालय की दुर्लभ धरोहर पर संकट! हाथीदांत की बेशकीमती कलाकृतियों के संरक्षण के लिए PM मोदी से लगाई गुहार

दरभंगा: बिहार के दरभंगा स्थित अधीनस्थ महाराजाधिराज लक्ष्मीश्वर सिंह संग्रहालय में संरक्षित दुर्लभ हाथीदांत और काष्ठ निर्मित पुरावशेषों के संरक्षण को लेकर गंभीर चिंता जताई गई है। ‘इंडियन नेशनल ट्रस्ट फॉर आर्ट एंड कल्चरल हेरिटेज’ (INTACH) की बिहार इकाई ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हस्तक्षेप की मांग करते हुए इन ऐतिहासिक धरोहरों को सुरक्षित बचाने की अपील की है।

155 दुर्लभ पुरावशेषों के संरक्षण में देरी का आरोप

संग्रहालय के पूर्व संग्रहालयाध्यक्ष एवं INTACH बिहार के सह-संयोजक डॉ. शिव कुमार मिश्र ने प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) के पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने आरोप लगाया है कि भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के अधीन राष्ट्रीय सांस्कृतिक संपदा संरक्षण अनुसंधान प्रयोगशाला (NRLC), लखनऊ द्वारा संरक्षण कार्य में गंभीर लापरवाही बरती गई है।

एक सदी पुरानी हाथीदांत की अनमोल कलाकृतियां

डॉ. मिश्र के अनुसार, महाराजा रमेश्वर सिंह ने वर्ष 1900 से 1929 के बीच मुर्शिदाबाद के प्रसिद्ध कारीगरों से हाथीदांत की कई अद्भुत कलाकृतियां बनवाई थीं। इनमें महिषासुरमर्दिनी की प्रतिमा, राजसिंहासन, पालकी, हाथी का हौदा, पलंग, सोफा, कुर्सियां, टेबल, ज्वेलरी बॉक्स, दर्पण सहित अनेक ऐतिहासिक वस्तुएं शामिल हैं। लगभग 100 वर्ष पुरानी होने के कारण इनका संरक्षण अब अत्यंत आवश्यक हो गया है।

काष्ठ निर्मित कलावस्तुएं भी अमूल्य धरोहर

संग्रहालय में लकड़ी से बनी कई दुर्लभ कलाकृतियां भी सुरक्षित हैं। इनमें भगवान बुद्ध के जन्म का दृश्य, मंदिरों की प्रतिकृतियां, मगरमच्छ, मछली, कछुआ, ड्रेसिंग टेबल, डाइनिंग टेबल, धातुयुक्त फर्नीचर और दरबार हॉल की विशेष मेज जैसी ऐतिहासिक वस्तुएं शामिल हैं।

1.65 करोड़ रुपये की योजना, फिर भी अधूरा संरक्षण

शिकायत के अनुसार, कोविड काल के दौरान NRLC, लखनऊ और संग्रहालय प्रशासन के बीच 155 पुरावशेषों के संरक्षण के लिए समझौता हुआ था। इस परियोजना को तीन वर्ष में पूरा किया जाना था, लेकिन जुलाई 2026 तक भी काम पूरा नहीं हो सका।

डॉ. मिश्र का कहना है कि इस परियोजना के लिए बिहार सरकार के संस्कृति विभाग ने 1.65 करोड़ रुपये स्वीकृत किए थे, जिनमें से 82.50 लाख रुपये अग्रिम भी जारी किए जा चुके हैं। इसके बावजूद सात वर्ष बीत जाने के बाद भी अधिकांश महत्वपूर्ण कलाकृतियों का संरक्षण अधूरा है।

“इस कार्य के लिए बिहार सरकार के संस्कृति विभाग से 1.65 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए थे, जिनमें से 82.50 लाख रुपये अग्रिम दिए जा चुके हैं। लेकिन सात साल बाद भी मुख्य कलाकृतियों का संरक्षण कार्य पूरा नहीं हो पाया है।”
— डॉ. शिव कुमार मिश्र, पूर्व संग्रहालयाध्यक्ष

प्रधानमंत्री से तत्काल हस्तक्षेप की मांग

INTACH बिहार इकाई ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अनुरोध किया है कि संस्कृति मंत्रालय को तत्काल संरक्षण कार्य पूरा कराने का निर्देश दिया जाए। साथ ही, परियोजना में हुई देरी और कथित लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाए।

विशेषज्ञों का मानना है कि दरभंगा संग्रहालय में संरक्षित हाथीदांत की ये कलाकृतियां देश की दुर्लभ सांस्कृतिक धरोहरों में शामिल हैं। यदि समय रहते इनका वैज्ञानिक संरक्षण नहीं किया गया, तो यह अमूल्य विरासत हमेशा के लिए क्षतिग्रस्त हो सकती है।

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