बिहार में इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने वालों के लिए बड़ी राहत, ई-बाइक से लेकर ई-कार तक मिलेगी 1.5 लाख रुपये तक की सब्सिडी

बिहार में बढ़ते प्रदूषण को नियंत्रित करने और स्वच्छ परिवहन व्यवस्था को बढ़ावा देने के उद्देश्य से राज्य सरकार इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग को प्रोत्साहित करने की दिशा में तेजी से काम कर रही है। इसी क्रम में सरकार ने इलेक्ट्रिक दोपहिया और चारपहिया वाहन खरीदने वाले लोगों के लिए आकर्षक सब्सिडी योजना लागू की है। इस योजना के तहत पात्र लाभार्थियों को ई-बाइक, ई-स्कूटी और इलेक्ट्रिक कार खरीदने पर आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी। सरकार का मानना है कि इस पहल से न केवल लोगों का ईंधन खर्च कम होगा, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और हरित परिवहन व्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।

राज्य सरकार की इस योजना का उद्देश्य अधिक से अधिक लोगों को पेट्रोल और डीजल से चलने वाले वाहनों की जगह इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने के लिए प्रेरित करना है। लगातार बढ़ते वायु प्रदूषण और महंगे होते ईंधन के बीच इलेक्ट्रिक वाहन भविष्य का बेहतर विकल्प माने जा रहे हैं। इसी कारण सरकार ने आर्थिक सहायता देकर आम लोगों के लिए इलेक्ट्रिक वाहन खरीदना आसान बनाने की पहल की है।

योजना के तहत अलग-अलग श्रेणियों के लाभार्थियों के लिए सब्सिडी की राशि भी अलग निर्धारित की गई है। सरकार ने सामाजिक और आर्थिक आधार पर पात्रता तय करते हुए अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग के लोगों को अधिक सहायता देने का निर्णय लिया है, जबकि सामान्य वर्ग के लाभार्थियों को भी निर्धारित सीमा तक सब्सिडी का लाभ मिलेगा।

इलेक्ट्रिक बाइक और ई-स्कूटी खरीदने वाले अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग के लाभार्थियों को अधिकतम 10 हजार रुपये तक की सब्सिडी दी जाएगी। वहीं सामान्य वर्ग के खरीदारों को अधिकतम 7,500 रुपये तक की आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। इससे छात्रों, नौकरीपेशा लोगों और रोजमर्रा की यात्रा करने वालों को इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहन खरीदने में राहत मिलने की उम्मीद है।

इलेक्ट्रिक कार खरीदने वालों के लिए सरकार ने इससे कहीं अधिक सहायता का प्रावधान किया है। योजना के अनुसार अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग के पात्र लाभार्थियों को अधिकतम 1.50 लाख रुपये तक की सब्सिडी मिलेगी। वहीं सामान्य वर्ग के खरीदारों को अधिकतम 1.25 लाख रुपये तक की सहायता प्रदान की जाएगी। इससे इलेक्ट्रिक कार खरीदने की कुल लागत में उल्लेखनीय कमी आएगी और अधिक लोग इस विकल्प को अपनाने के लिए प्रेरित होंगे।

सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह योजना केवल पूरी तरह से बैटरी से संचालित यानी 100 प्रतिशत इलेक्ट्रिक वाहनों पर लागू होगी। यदि कोई वाहन हाइब्रिड तकनीक पर आधारित है और पेट्रोल या डीजल के साथ-साथ इलेक्ट्रिक मोटर से भी चलता है, तो उस पर इस योजना का लाभ नहीं मिलेगा। सरकार का कहना है कि योजना का मुख्य उद्देश्य शून्य उत्सर्जन वाले वाहनों को बढ़ावा देना है, इसलिए केवल पूर्ण इलेक्ट्रिक वाहन ही इसके दायरे में शामिल किए गए हैं।

सब्सिडी प्राप्त करने की प्रक्रिया भी निर्धारित की गई है। वाहन खरीदने वाले व्यक्ति को सबसे पहले अधिकृत डीलर से वाहन खरीदकर उसकी पूरी कीमत का भुगतान करना होगा। वाहन की खरीद पूरी होने के बाद संबंधित डीलर आवश्यक दस्तावेज परिवहन विभाग को उपलब्ध कराएगा। इसके बाद जिला परिवहन कार्यालय सभी दस्तावेजों की जांच करेगा और पात्रता की पुष्टि करेगा।

दस्तावेजों के सत्यापन के बाद संबंधित प्रस्ताव परिवहन विभाग के मुख्यालय भेजा जाएगा। वहां अंतिम स्वीकृति मिलने के बाद सब्सिडी की निर्धारित राशि सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में डीबीटी (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) के माध्यम से भेज दी जाएगी। इस व्यवस्था से प्रक्रिया अधिक पारदर्शी होगी और लाभार्थियों को किसी बिचौलिए की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।

सरकार का कहना है कि इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग से लोगों का मासिक ईंधन खर्च काफी कम हो सकता है। पेट्रोल और डीजल की तुलना में इलेक्ट्रिक वाहन चलाने की लागत कम होती है। इसके अलावा इन वाहनों के रखरखाव पर भी अपेक्षाकृत कम खर्च आता है क्योंकि इनमें पारंपरिक इंजन की तुलना में कम यांत्रिक हिस्से होते हैं। यही कारण है कि आने वाले वर्षों में इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग तेजी से बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।

पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बड़ी संख्या में लोग इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाते हैं तो शहरों में वायु प्रदूषण के स्तर में कमी लाई जा सकती है। वाहनों से निकलने वाले धुएं के कारण प्रदूषण लगातार बढ़ रहा है, जिसका असर लोगों के स्वास्थ्य पर भी पड़ रहा है। ऐसे में स्वच्छ ऊर्जा आधारित परिवहन व्यवस्था भविष्य के लिए एक महत्वपूर्ण विकल्प बनकर उभर रही है।

बिहार सरकार का यह कदम राज्य में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देने की व्यापक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। सरकार भविष्य में चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने, इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग को आसान बनाने और निवेश को आकर्षित करने की दिशा में भी कई योजनाओं पर काम कर रही है। यदि चार्जिंग स्टेशनों का नेटवर्क तेजी से विकसित होता है तो लोगों का भरोसा इलेक्ट्रिक वाहनों पर और बढ़ेगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ती ईंधन कीमतों और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकता को देखते हुए इलेक्ट्रिक वाहन आने वाले समय में परिवहन व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकते हैं। ऐसे में सरकारी सब्सिडी आम लोगों के लिए बड़ी राहत साबित हो सकती है और वाहन खरीदने का फैसला आसान बना सकती है।

फिलहाल राज्य सरकार की इस योजना का लाभ उन्हीं लोगों को मिलेगा जो निर्धारित नियमों और पात्रता की शर्तों को पूरा करते हुए 100 प्रतिशत इलेक्ट्रिक वाहन खरीदेंगे। सरकार को उम्मीद है कि इस पहल से बिहार में इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या में तेजी से वृद्धि होगी, प्रदूषण में कमी आएगी और स्वच्छ एवं टिकाऊ परिवहन व्यवस्था को नई गति मिलेगी। आने वाले वर्षों में यह योजना राज्य की हरित विकास नीति का एक महत्वपूर्ण आधार बन सकती है।

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