
मुजफ्फरपुर जिले के मुशहरी प्रखंड स्थित रोहुआ इलाके में शुक्रवार को उस समय हड़कंप मच गया, जब नाला निर्माण कार्य के दौरान पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) की पाइपलाइन क्षतिग्रस्त हो गई। पाइपलाइन टूटने के बाद तेजी से गैस का रिसाव शुरू हो गया, जिससे आसपास के क्षेत्र में दहशत का माहौल बन गया। गैस फैलने के कारण वहां से गुजर रही पांच स्कूली छात्राओं की तबीयत अचानक बिगड़ गई और वे बेहोश होकर गिर पड़ीं। घटना के बाद स्थानीय लोगों ने तुरंत छात्राओं को अस्पताल पहुंचाया, जबकि प्रशासन ने एहतियात के तौर पर आसपास के स्कूलों में छुट्टी घोषित कर दी।
घटना के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। गैस रिसाव की सूचना मिलते ही स्थानीय लोग अपने घरों और दुकानों से बाहर निकल आए। कुछ समय के लिए लोगों में यह आशंका भी बनी रही कि यदि समय रहते गैस आपूर्ति बंद नहीं की गई तो बड़ा हादसा हो सकता है। प्रशासन और तकनीकी टीम ने तुरंत मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास शुरू किया।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार रोहुआ क्षेत्र में बुडको की ओर से नाला निर्माण का कार्य कराया जा रहा था। निर्माण कार्य के दौरान जेसीबी मशीन से खुदाई की जा रही थी। इसी दौरान जमीन के नीचे बिछी पीएनजी पाइपलाइन मशीन की चपेट में आ गई और क्षतिग्रस्त हो गई। पाइपलाइन टूटते ही तेज दबाव के साथ गैस का रिसाव शुरू हो गया। देखते ही देखते आसपास का इलाका गैस की गंध से भर गया, जिससे लोगों में घबराहट फैल गई।
गैस रिसाव के समय कई छात्र-छात्राएं स्कूल जा रहे थे। इसी दौरान पांच छात्राएं गैस की चपेट में आ गईं। सांस लेने में दिक्कत और दम घुटने जैसी स्थिति पैदा होने के कारण सभी छात्राएं बेहोश हो गईं। आसपास मौजूद लोगों ने बिना देर किए उन्हें सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया और तत्काल मुशहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया।
अस्पताल में चिकित्सकों ने सभी छात्राओं का प्राथमिक उपचार शुरू किया। डॉक्टरों की निगरानी में ऑक्सीजन और अन्य आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं। स्वास्थ्य अधिकारियों ने बताया कि समय पर इलाज मिलने से सभी छात्राओं की स्थिति फिलहाल स्थिर है और उनकी लगातार निगरानी की जा रही है। चिकित्सकों ने परिजनों को भी घबराने की जरूरत नहीं बताते हुए कहा कि सभी छात्राएं खतरे से बाहर हैं।
अस्पताल प्रशासन के अनुसार प्रभावित छात्राओं में दसवीं कक्षा की दिव्या, नाहिद, अमृता और राखी के अलावा ग्यारहवीं कक्षा की छात्रा विशाखा शामिल हैं। गैस का असर होने के कारण सभी को सांस लेने में परेशानी हुई, जिसके बाद वे बेहोश हो गईं। इलाज के दौरान डॉक्टरों ने उनकी स्वास्थ्य जांच की और आवश्यक दवाएं दीं। घटना की जानकारी मिलते ही परिजन भी अस्पताल पहुंच गए, जहां कुछ समय तक अफरा-तफरी का माहौल बना रहा।
गैस रिसाव की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन, पुलिस और गैस पाइपलाइन संचालित करने वाली कंपनी की तकनीकी टीम मौके पर पहुंच गई। अधिकारियों ने सबसे पहले पाइपलाइन की गैस आपूर्ति बंद कराई ताकि रिसाव को रोका जा सके। इसके बाद तकनीकी कर्मचारियों ने क्षतिग्रस्त पाइपलाइन की मरम्मत का काम शुरू किया। साथ ही आसपास के लोगों को कुछ समय तक सुरक्षित दूरी बनाए रखने और किसी भी प्रकार की आग या चिंगारी का इस्तेमाल नहीं करने की सलाह दी गई।
घटना के बाद प्रशासन ने एहतियात के तौर पर आसपास के स्कूलों में छुट्टी करा दी ताकि बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। शिक्षकों ने सभी विद्यार्थियों को व्यवस्थित तरीके से स्कूल परिसर से बाहर निकाला और अभिभावकों को घटना की जानकारी दी। प्रशासन का कहना है कि छात्रों और स्थानीय लोगों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है, इसलिए तत्काल एहतियाती कदम उठाए गए।
घटनास्थल पर पहुंचे अधिकारियों ने पूरे इलाके का निरीक्षण किया और निर्माण कार्य से जुड़े कर्मचारियों से भी जानकारी ली। प्रशासन यह पता लगाने में जुटा है कि खुदाई शुरू करने से पहले भूमिगत पाइपलाइन की सही जानकारी ली गई थी या नहीं। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि निर्माण कार्य के दौरान निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था या नहीं।
विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी क्षेत्र में भूमिगत गैस पाइपलाइन के आसपास निर्माण कार्य शुरू करने से पहले संबंधित विभागों से समन्वय करना आवश्यक होता है। पाइपलाइन का सटीक स्थान चिन्हित किए बिना भारी मशीनों से खुदाई करने पर इस तरह की दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ जाती है। ऐसे मामलों में सुरक्षा संबंधी दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन किया जाना बेहद जरूरी माना जाता है।
स्थानीय लोगों ने भी घटना के बाद चिंता जताई और कहा कि निर्माण कार्य के दौरान अधिक सतर्कता बरती जानी चाहिए थी। उनका कहना है कि यदि गैस रिसाव पर समय रहते नियंत्रण नहीं पाया जाता तो स्थिति और गंभीर हो सकती थी। कई लोगों ने भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए निर्माण एजेंसियों की जवाबदेही तय करने की मांग भी की।
पुलिस ने पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि दुर्घटना के सभी पहलुओं की विस्तार से जांच की जाएगी। जांच में यदि किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो संबंधित एजेंसी या जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन ने यह भी कहा कि भविष्य में ऐसे निर्माण कार्यों के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
फिलहाल तकनीकी टीम ने गैस रिसाव को नियंत्रित कर लिया है और क्षतिग्रस्त पाइपलाइन की मरम्मत का कार्य जारी है। प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है। प्रभावित छात्राओं का इलाज जारी है और चिकित्सकों के अनुसार उनकी हालत पहले से बेहतर है। इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि सार्वजनिक उपयोगिताओं से जुड़ी भूमिगत पाइपलाइन के आसपास निर्माण कार्य करते समय सुरक्षा मानकों का पालन कितनी गंभीरता से किया जा रहा है। प्रशासन का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद दुर्घटना के वास्तविक कारणों का खुलासा किया जाएगा और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।


