
पटना: बिहार में प्रस्तावित पंचायत परिसीमन को लेकर सरकार ने नया फॉर्मूला तैयार करना शुरू कर दिया है। सूत्रों के मुताबिक, 6 हजार से 8 हजार आबादी वाली पंचायतों को यथावत रखने पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है, जबकि इससे कम और अधिक आबादी वाली पंचायतों का नए सिरे से परिसीमन किया जाएगा। इसी परिसीमन के बाद राज्य में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव कराए जाएंगे।
तीन फॉर्मूलों पर चल रहा मंथन
सरकार पंचायत परिसीमन के लिए तीन अलग-अलग मॉडल पर विचार कर रही है। इनमें सबसे अधिक चर्चा तीसरे फॉर्मूले की हो रही है।
फॉर्मूला-1
- 7 हजार की आबादी पर एक पंचायत।
- 6 से 8 हजार आबादी वाली पंचायतों में कोई बदलाव नहीं।
- 12 से 17 हजार आबादी वाली पंचायतों को दो हिस्सों में बांटा जा सकता है।
- 18 हजार से अधिक आबादी वाली पंचायतों को तीन पंचायतों में विभाजित किया जा सकता है।
फॉर्मूला-2
- पूरे राज्य में 7 हजार की आबादी को आधार मानकर नए सिरे से परिसीमन।
- इस व्यवस्था में पंचायतों की संख्या वर्तमान से अधिक हो सकती है।
फॉर्मूला-3 (सबसे ज्यादा चर्चा में)
- 6 हजार से 8 हजार आबादी वाली सभी पंचायतें यथावत रहेंगी।
- 6 हजार से कम और 8 हजार से अधिक आबादी वाली पंचायतों का 7 हजार आबादी के मानक पर परिसीमन किया जाएगा।
2011 की जनगणना बनेगी आधार
सरकार ने स्पष्ट किया है कि पंचायतों का परिसीमन 2011 की जनगणना के आधार पर किया जाएगा। इसके लिए जल्द ही अधिसूचना जारी होने की संभावना है। परिसीमन प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही पंचायत चुनाव की नई तिथियां घोषित की जाएंगी।
चुनाव में होगी देरी
राज्य में मौजूदा पंचायतों का कार्यकाल इस वर्ष समाप्त हो रहा है, लेकिन परिसीमन में कम से कम एक वर्ष का समय लगने की संभावना है। ऐसे में पंचायत चुनाव 2027 में कराए जाने की संभावना जताई जा रही है।
क्या होगा फायदा?
सरकार का मानना है कि नए परिसीमन से:
- आबादी के अनुसार पंचायतों का संतुलित गठन होगा।
- प्रतिनिधित्व अधिक प्रभावी बनेगा।
- प्रशासनिक व्यवस्था मजबूत होगी।
- ग्रामीण विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में आसानी होगी।
अब अंतिम निर्णय राज्य सरकार की मंजूरी और अधिसूचना जारी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।


