
भागलपुर, 17 जुलाई: विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेले की शुरुआत में अब कुछ ही दिन शेष रह गए हैं। ऐसे में मेला क्षेत्र में चल रही तैयारियों को लेकर राज्य सरकार और प्रशासनिक अधिकारियों की सक्रियता लगातार बढ़ती जा रही है। इसी क्रम में बिहार सरकार के पथ निर्माण मंत्री इंजीनियर शैलेन्द्र कुमार गुरुवार को सुल्तानगंज पहुंचे और श्रावणी मेले से जुड़ी तैयारियों का विस्तृत निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने विभिन्न विभागों के अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और स्थानीय लोगों के साथ बैठक कर व्यवस्थाओं की समीक्षा की तथा आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए।
सुल्तानगंज स्थित अजगैविनाथ धाम पहुंचने के बाद मंत्री ने सबसे पहले मेला क्षेत्र में चल रहे विकास और निर्माण कार्यों की जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों से अब तक हुए कार्यों की प्रगति रिपोर्ट मांगी और शेष बचे कार्यों को तय समय सीमा के भीतर पूरा करने का निर्देश दिया। श्रावणी मेले के दौरान लाखों श्रद्धालुओं के आगमन को देखते हुए प्रशासनिक तैयारियों को लेकर सरकार किसी प्रकार की लापरवाही नहीं चाहती है।
निरीक्षण कार्यक्रम के दौरान मंत्री ने मसदी पंचायत स्थित डाक बंगला निरीक्षण भवन में पुल निर्माण विभाग और अन्य संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। बैठक में मेला क्षेत्र में चल रहे निर्माण कार्यों, सड़क मरम्मत, यातायात व्यवस्था और श्रद्धालुओं की सुविधाओं को लेकर विस्तार से चर्चा की गई।
इसके बाद नगर परिषद सुल्तानगंज के सभागार में एक व्यापक समीक्षा बैठक आयोजित की गई, जिसमें स्थानीय जनप्रतिनिधियों, नगर परिषद के अधिकारियों, विभिन्न विभागों के पदाधिकारियों और वार्ड पार्षदों ने भाग लिया। बैठक में श्रावणी मेले के दौरान आने वाली संभावित चुनौतियों और उनके समाधान पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।
समीक्षा बैठक में मेला क्षेत्र में पेयजल, प्रकाश व्यवस्था, साफ-सफाई, चिकित्सा सुविधा, यातायात नियंत्रण और सुरक्षा व्यवस्था जैसे मुद्दों को प्राथमिकता के आधार पर उठाया गया। अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े और सभी आवश्यक व्यवस्थाएं समय से पहले पूरी कर ली जाएं।
मंत्री ने कहा कि श्रावणी मेला केवल बिहार ही नहीं बल्कि पूरे देश की आस्था से जुड़ा एक महत्वपूर्ण आयोजन है। हर वर्ष लाखों श्रद्धालु सुल्तानगंज पहुंचते हैं और यहां गंगा जल लेकर बाबा बैद्यनाथ धाम के लिए अपनी यात्रा शुरू करते हैं। ऐसे में राज्य सरकार की जिम्मेदारी है कि श्रद्धालुओं को सुरक्षित और सुविधाजनक वातावरण उपलब्ध कराया जाए।
बैठक के दौरान वार्ड पार्षदों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने भी अपनी-अपनी समस्याओं और सुझावों को रखा। कई जनप्रतिनिधियों ने कांवड़िया पथ, पार्किंग स्थल, शौचालय, जलापूर्ति और प्रकाश व्यवस्था से जुड़ी समस्याओं की ओर ध्यान आकर्षित कराया। मंत्री ने सभी सुझावों को गंभीरता से लेते हुए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए।
इसके बाद मंत्री ने स्थानीय प्रबुद्ध नागरिकों और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ भी बैठक की। मारवाड़ी युवा मंच में आयोजित इस संवाद कार्यक्रम में मेला प्रबंधन, श्रद्धालुओं की सुविधा और स्थानीय स्तर पर आवश्यक सुधारों को लेकर सुझाव लिए गए। स्थानीय लोगों ने प्रशासनिक तैयारियों की गति बढ़ाने और अधूरे कार्यों को जल्द पूरा करने की मांग उठाई।
मंत्री ने कहा कि किसी भी बड़े आयोजन की सफलता स्थानीय लोगों और प्रशासन के सहयोग पर निर्भर करती है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार हर सुझाव को गंभीरता से ले रही है और व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने के लिए लगातार काम किया जा रहा है।
समीक्षा बैठकों के बाद मंत्री ने मेला क्षेत्र का स्थलीय निरीक्षण भी किया। उन्होंने अजगैविनाथ गंगा घाट, नमामि गंगे घाट और कच्ची कांवड़िया पथ का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों को कई स्थानों पर आवश्यक सुधार कार्यों को तेजी से पूरा करने के निर्देश दिए गए।
गंगा घाटों पर श्रद्धालुओं की सुरक्षा, स्नान की व्यवस्था और भीड़ प्रबंधन को लेकर भी अधिकारियों से चर्चा की गई। घाटों पर बैरिकेडिंग, प्रकाश व्यवस्था और साफ-सफाई की स्थिति की समीक्षा की गई। अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि मेले की शुरुआत से पहले सभी घाट पूरी तरह तैयार स्थिति में होने चाहिए।
कच्ची कांवड़िया पथ की स्थिति को लेकर भी मंत्री ने अधिकारियों से जानकारी ली। उन्होंने कहा कि इस मार्ग से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पैदल यात्रा करते हैं, इसलिए रास्ते को सुरक्षित और सुविधाजनक बनाना बेहद जरूरी है। जहां कहीं भी सड़क खराब है या जलजमाव की समस्या है, वहां तत्काल सुधार कार्य शुरू करने के निर्देश दिए गए।
मीडिया से बातचीत करते हुए मंत्री ने बताया कि श्रावणी मेले की तैयारियों को लेकर संबंधित अधिकारियों, वार्ड पार्षदों और स्थानीय नागरिकों से सुझाव प्राप्त किए गए हैं। इन सुझावों के आधार पर व्यवस्थाओं को और बेहतर बनाने की दिशा में काम किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि सभी विभागों को 22 जुलाई तक अपने-अपने कार्यों को पूरा करने की स्पष्ट समय सीमा दी गई है। यदि किसी विभाग की ओर से लापरवाही बरती जाती है तो उसके लिए जवाबदेही तय की जाएगी। सरकार की प्राथमिकता श्रद्धालुओं को बेहतर से बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना है।
उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकार लगातार मेला तैयारियों की निगरानी कर रही है और उच्च स्तर पर समीक्षा की जा रही है। मुख्यमंत्री की ओर से भी सभी संबंधित विभागों को आवश्यक निर्देश दिए गए हैं ताकि श्रावणी मेले का आयोजन सफल और व्यवस्थित तरीके से संपन्न हो सके।
निरीक्षण के दौरान फोरलेन सड़क पर आई दरारों का मुद्दा भी सामने आया। इस संबंध में मंत्री ने कहा कि यदि उद्घाटन से पहले सड़क में किसी प्रकार की तकनीकी समस्या सामने आई है तो उसे गंभीरता से लिया जाएगा और संबंधित विभाग के अधिकारियों को तत्काल सुधार कार्य कराने के निर्देश दिए जाएंगे।
उन्होंने कहा कि गुणवत्ता से किसी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा और जहां कहीं भी तकनीकी खामियां पाई जाएंगी, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर ठीक कराया जाएगा। सरकार का उद्देश्य केवल निर्माण कार्य पूरा करना नहीं बल्कि टिकाऊ और सुरक्षित आधारभूत संरचना तैयार करना है।
श्रावणी मेले के दौरान हर वर्ष लाखों श्रद्धालु सुल्तानगंज पहुंचते हैं। इस कारण सड़क, यातायात, स्वास्थ्य सेवाओं और सुरक्षा व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। इसी को ध्यान में रखते हुए प्रशासन की ओर से विशेष कार्य योजना तैयार की जा रही है।
मेला क्षेत्र में चिकित्सा शिविर, नियंत्रण कक्ष, आपातकालीन सेवाएं और सुरक्षा बलों की तैनाती को लेकर भी तैयारियां चल रही हैं। प्रशासन का प्रयास है कि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की समस्या का सामना न करना पड़े और वे सुरक्षित वातावरण में अपनी यात्रा पूरी कर सकें।
निरीक्षण और समीक्षा बैठक के दौरान कई जनप्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता, वार्ड पार्षद और विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे। सभी ने मिलकर श्रावणी मेले को सफल और व्यवस्थित बनाने के लिए सहयोग का भरोसा दिया।
विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेला केवल धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि बिहार की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा भी माना जाता है। ऐसे में सरकार और प्रशासन इस आयोजन को बेहतर बनाने के लिए लगातार प्रयासरत हैं। अब सभी की निगाहें 22 जुलाई की निर्धारित समय सीमा पर टिकी हैं, क्योंकि इसी दिन तक अधिकांश तैयारियों को पूरा करने का लक्ष्य तय किया गया है।
आने वाले दिनों में लाखों श्रद्धालुओं के सुल्तानगंज पहुंचने की उम्मीद है। ऐसे में प्रशासनिक तैयारियों की सफलता ही यह तय करेगी कि श्रद्धालुओं को कितनी सुविधाजनक, सुरक्षित और व्यवस्थित यात्रा का अनुभव मिल पाता है।


