
कोलकाता, 16 जुलाई: श्रावणी मेले के दौरान हर वर्ष बिहार और झारखंड के विभिन्न हिस्सों से लाखों श्रद्धालु बाबा नगरी की यात्रा के लिए निकलते हैं। विशेष रूप से सुल्तानगंज से देवघर तक की कांवड़ यात्रा के कारण रेलवे स्टेशनों और ट्रेनों में यात्रियों की भारी भीड़ देखने को मिलती है। इसी बढ़ती भीड़ और यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए रेलवे ने इस वर्ष भागलपुर और रांची के बीच विशेष श्रावणी मेला ट्रेनों के संचालन का फैसला लिया है। इस निर्णय से बिहार और झारखंड के हजारों श्रद्धालुओं को यात्रा के दौरान बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
रेलवे अधिकारियों के अनुसार श्रावणी मेले के समय नियमित ट्रेनों में यात्रियों की संख्या कई गुना बढ़ जाती है। ऐसे में यात्रियों को टिकट प्राप्त करने और यात्रा करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। विशेष ट्रेनों के संचालन से न केवल अतिरिक्त भीड़ को नियंत्रित किया जा सकेगा, बल्कि श्रद्धालुओं को अधिक सुरक्षित और सुविधाजनक यात्रा का विकल्प भी मिलेगा।
रेलवे द्वारा जारी जानकारी के अनुसार भागलपुर और रांची के बीच दो अलग-अलग मार्गों से विशेष ट्रेनों का संचालन किया जाएगा। इन ट्रेनों को विशेष रूप से श्रावणी मेले के दौरान यात्रियों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है ताकि विभिन्न क्षेत्रों से आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर कनेक्टिविटी उपलब्ध कराई जा सके।
पहली विशेष ट्रेन राजाबेरा मार्ग से संचालित की जाएगी। यह ट्रेन रांची से प्रत्येक रविवार और बुधवार को शाम 5 बजकर 40 मिनट पर रवाना होगी और अगले दिन सुबह 6 बजकर 30 मिनट पर भागलपुर पहुंचेगी। वहीं वापसी यात्रा में यह ट्रेन भागलपुर से प्रत्येक सोमवार और गुरुवार को सुबह 9 बजकर 10 मिनट पर प्रस्थान करेगी और रात 10 बजकर 20 मिनट पर रांची पहुंचेगी।
रेलवे ने इस विशेष सेवा को जुलाई के अंतिम सप्ताह से सितंबर के दूसरे सप्ताह तक संचालित करने का निर्णय लिया है। इस अवधि में कुल 14 फेरे लगाए जाएंगे। इससे उन यात्रियों को विशेष लाभ मिलेगा जो श्रावणी मेले के दौरान सुल्तानगंज पहुंचकर जल भरने और कांवड़ यात्रा में शामिल होने की योजना बना रहे हैं।
दूसरी विशेष ट्रेन बरकाकाना मार्ग से संचालित की जाएगी। यह ट्रेन रांची से प्रत्येक सोमवार और शुक्रवार को शाम 5 बजकर 30 मिनट पर रवाना होगी और अगले दिन सुबह 6 बजकर 30 मिनट पर भागलपुर पहुंचेगी। वहीं वापसी में यह ट्रेन भागलपुर से प्रत्येक मंगलवार और शनिवार को सुबह 9 बजकर 10 मिनट पर प्रस्थान करेगी और रात 9 बजकर 40 मिनट पर रांची पहुंचेगी।
इस सेवा का संचालन भी श्रावणी मेले की अवधि के दौरान किया जाएगा और इसके अंतर्गत भी कुल 14 फेरे निर्धारित किए गए हैं। रेलवे का मानना है कि दो अलग-अलग मार्गों से विशेष ट्रेनों का संचालन करने से यात्रियों का दबाव एक ही रूट पर नहीं पड़ेगा और यात्रा अधिक व्यवस्थित तरीके से संचालित की जा सकेगी।
दोनों विशेष ट्रेनों का ठहराव पूर्व रेलवे क्षेत्राधिकार के अंतर्गत आने वाले सुल्तानगंज, जमालपुर और अभयपुर स्टेशनों पर किया जाएगा। सुल्तानगंज स्टेशन श्रावणी मेले के दौरान सबसे महत्वपूर्ण पड़ावों में से एक माना जाता है क्योंकि यहीं से श्रद्धालु गंगा जल लेकर पैदल यात्रा शुरू करते हैं। ऐसे में इस स्टेशन पर विशेष ट्रेनों का ठहराव यात्रियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा।
जमालपुर और अभयपुर स्टेशन पर ठहराव से आसपास के क्षेत्रों के यात्रियों को भी इन विशेष सेवाओं का लाभ मिलेगा। इससे भागलपुर और मुंगेर क्षेत्र के लोगों के लिए भी यात्रा आसान हो जाएगी और उन्हें लंबी दूरी तय कर अन्य बड़े स्टेशनों तक जाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।
रेलवे ने यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए इन विशेष ट्रेनों में विभिन्न श्रेणियों के डिब्बों की व्यवस्था की है। इनमें सामान्य द्वितीय श्रेणी, शयनयान श्रेणी और वातानुकूलित श्रेणी के कोच उपलब्ध होंगे। इससे अलग-अलग आर्थिक वर्ग के यात्रियों को अपनी सुविधा और बजट के अनुसार यात्रा का विकल्प मिलेगा।
सामान्य श्रेणी के डिब्बों में यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं को अतिरिक्त सीटों का लाभ मिलेगा, जबकि लंबी दूरी की यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए शयनयान श्रेणी अधिक सुविधाजनक साबित होगी। इसके अलावा वातानुकूलित कोचों की उपलब्धता उन यात्रियों के लिए राहत लेकर आएगी जो आरामदायक यात्रा को प्राथमिकता देते हैं।
श्रावणी मेले के दौरान भागलपुर और सुल्तानगंज क्षेत्र में देश के विभिन्न राज्यों से लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं। बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों से आने वाले श्रद्धालुओं के कारण रेलवे नेटवर्क पर अतिरिक्त दबाव बनता है। ऐसे में विशेष ट्रेनों का संचालन हर वर्ष यात्रियों की सुविधा सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की अतिरिक्त सेवाएं न केवल भीड़ प्रबंधन में मदद करती हैं बल्कि स्टेशन परिसरों में अव्यवस्था और भीड़भाड़ को कम करने में भी सहायक होती हैं। इससे यात्रियों की सुरक्षा और यात्रा अनुभव दोनों में सुधार होता है।
रेलवे प्रशासन ने यह भी संकेत दिया है कि यदि यात्रियों की संख्या अपेक्षा से अधिक बढ़ती है तो आवश्यकतानुसार अतिरिक्त डिब्बे जोड़ने या अन्य विशेष सेवाएं शुरू करने पर भी विचार किया जा सकता है। हालांकि फिलहाल घोषित ट्रेनों को ही श्रावणी मेले के लिए मुख्य अतिरिक्त सेवा के रूप में संचालित किया जाएगा।
टिकट बुकिंग को लेकर यात्रियों में काफी उत्सुकता देखी जा रही है। रेलवे ने बताया है कि इन विशेष ट्रेनों की बुकिंग की तारीखों की घोषणा जल्द की जाएगी। जैसे ही आरक्षण प्रक्रिया शुरू होगी, यात्री सामान्य रेलवे बुकिंग व्यवस्था के माध्यम से टिकट प्राप्त कर सकेंगे।
रेलवे अधिकारियों ने यात्रियों से अपील की है कि वे यात्रा से पहले अपने टिकट की स्थिति और ट्रेन के समय की जानकारी अवश्य प्राप्त करें ताकि किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। साथ ही भीड़भाड़ के समय स्टेशन पर समय से पहले पहुंचने की भी सलाह दी गई है।
श्रावणी मेला केवल धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि पूर्वी भारत के सबसे बड़े सांस्कृतिक और आध्यात्मिक आयोजनों में से एक माना जाता है। इस दौरान लाखों श्रद्धालु सुल्तानगंज से जल लेकर पैदल देवघर तक की यात्रा पूरी करते हैं। श्रद्धालुओं की इसी आस्था और उत्साह को देखते हुए रेलवे हर वर्ष विशेष व्यवस्थाएं करता है।
इस बार भागलपुर और रांची के बीच शुरू की जा रही विशेष ट्रेन सेवाओं से न केवल श्रद्धालुओं को राहत मिलेगी बल्कि क्षेत्रीय संपर्क और यात्रा सुविधा को भी मजबूती मिलेगी। माना जा रहा है कि इन सेवाओं के शुरू होने के बाद नियमित ट्रेनों पर दबाव कम होगा और यात्रियों को अधिक व्यवस्थित और आरामदायक यात्रा का अनुभव मिलेगा।
श्रावणी मेले की तैयारियों के बीच रेलवे का यह फैसला लाखों यात्रियों और श्रद्धालुओं के लिए एक बड़ी सौगात माना जा रहा है। आने वाले दिनों में टिकट बुकिंग शुरू होने के बाद इन विशेष ट्रेनों को लेकर यात्रियों के बीच भारी उत्साह देखने को मिल सकता है।


