विक्रमशिला विश्वविद्यालय भूमि अधिग्रहण में बड़ी लापरवाही, जिला भू-अर्जन पदाधिकारी का वेतन रोका गया

भागलपुर में विक्रमशिला केंद्रीय विश्वविद्यालय के लिए भूमि अधिग्रहण और किसानों को मुआवजा भुगतान में लापरवाही बरतने के मामले में जिला प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है। जिलाधिकारी ने जिला भू-अर्जन पदाधिकारी राकेश कुमार से इस मामले में स्पष्टीकरण मांगा है और जवाब मिलने तक उनके वेतन पर रोक लगाने का निर्देश दिया है।

प्रशासन के इस फैसले के बाद भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया और मुआवजा वितरण व्यवस्था पर कई सवाल खड़े हो गए हैं।

किसानों को समय पर नहीं मिला मुआवजा

जानकारी के अनुसार, विश्वविद्यालय निर्माण के लिए अधिग्रहित जमीन के बदले किसानों को मुआवजा देने की प्रक्रिया में काफी देरी हुई है। कहलगांव अनुमंडल पदाधिकारी कार्यालय की ओर से 10 जुलाई को 184, 11 जुलाई को 22 और 12 जुलाई को 69 आवेदन भेजे गए थे।

तीन दिनों में कुल 275 आवेदन जिला भू-अर्जन कार्यालय को उपलब्ध कराए गए, लेकिन इसके मुकाबले सिर्फ 127 किसानों को ही मुआवजे की राशि का भुगतान किया जा सका। बाकी किसानों को अब तक भुगतान नहीं मिलने से नाराजगी बढ़ गई है।

समीक्षा बैठक के बाद सामने आई लापरवाही

भूमि अधिग्रहण और मुआवजा भुगतान की समीक्षा को लेकर 24 जून को बैठक आयोजित की गई थी। बैठक में निर्देश दिया गया था कि कहलगांव एसडीओ कार्यालय से भेजे गए सभी आवेदनों का भुगतान अधिकतम 72 घंटे के भीतर सुनिश्चित किया जाए।

इसके बावजूद बड़ी संख्या में किसानों को समय पर मुआवजा नहीं मिल पाया। मामले को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी ने इसे प्रशासनिक लापरवाही माना है।

24 घंटे के भीतर मांगा गया जवाब

जिलाधिकारी ने जिला भू-अर्जन पदाधिकारी को 24 घंटे के भीतर तथ्यात्मक स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया है। साथ ही चेतावनी दी गई है कि यदि संतोषजनक जवाब नहीं मिला तो उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की अनुशंसा की जाएगी।

डीएम ने अपने पत्र में कहा है कि इस स्थिति से स्पष्ट होता है कि संबंधित अधिकारी अपने कार्यालय पर प्रभावी नियंत्रण रखने और अधीनस्थ कर्मचारियों से समय पर कार्य कराने में असफल रहे हैं।

विभागीय कार्रवाई की भी चेतावनी

प्रशासन ने साफ कर दिया है कि यदि मामले में संतोषजनक जवाब नहीं मिलता है तो इसे उच्चाधिकारियों के निर्देशों की अवहेलना और कार्य में लापरवाही माना जाएगा। ऐसे में संबंधित अधिकारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की सिफारिश राज्य सरकार से की जा सकती है।

विक्रमशिला केंद्रीय विश्वविद्यालय परियोजना बिहार की महत्वाकांक्षी योजनाओं में शामिल है। ऐसे में भूमि अधिग्रहण और मुआवजा भुगतान में हो रही देरी को लेकर जिला प्रशासन अब पूरी तरह सख्त नजर आ रहा है।

  • ये भी पढ़े..

    एसबीआई ऑफिसर्स एसोसिएशन का 25वां रक्तदान शिविर, छह शहरों में 211 यूनिट रक्तदान

    Share Add as a preferred…

    भागलपुर में 19 जुलाई से शुरू होंगे सरस्वती विद्या निकेतन, मुख्यमंत्री बेगूसराय से करेंगे राज्यव्यापी शुभारंभ

    Share Add as a preferred…