
बगहा/वाल्मीकिनगर: भारत-नेपाल सीमा से सटे बिहार के वाल्मीकिनगर में 10 फीट लंबे किंग कोबरा का रेस्क्यू करना स्थानीय स्नेक रेस्क्यूअर जानकी देवी को भारी पड़ गया। जहरीले सांप को पकड़ने के दौरान किंग कोबरा ने उन्हें डंस लिया, जिसके बाद गंभीर हालत में उन्हें नेपाल के त्रिवेणी स्थित मिलिट्री कैंप में भर्ती कराया गया। समय पर इलाज मिलने से उनकी जान बच गई।
घर में घुसे 10 फीट लंबे किंग कोबरा का कर रही थीं रेस्क्यू
जानकारी के अनुसार वाल्मीकिनगर के बिसहा गांव निवासी मुनी लाल के घर में एक विशालकाय किंग कोबरा घुस गया था। सूचना मिलने पर स्नेक रेस्क्यूअर जानकी देवी मौके पर पहुंचीं और सांप को पकड़ लिया।
इसी दौरान वन विभाग की प्रशिक्षित रेस्क्यू टीम भी घटनास्थल पर पहुंच गई। बाद में वन विभाग ने किंग कोबरा को अपने कब्जे में लेकर सुरक्षित जंगल में छोड़ दिया।
रील बनाने के दौरान काटने का आरोप
वन प्रमंडल-2 के रेंजर सत्यम कुमार ने बताया कि प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि जानकी देवी ने वन विभाग की अनुमति के बिना किंग कोबरा का रेस्क्यू किया।
वन विभाग का आरोप है कि वह सोशल मीडिया पर वीडियो (रील) बनाने के लिए सांप को गले में डालकर प्रदर्शन कर रही थीं। इसी दौरान किंग कोबरा ने उन्हें काट लिया।
वन विभाग करेगा कानूनी कार्रवाई
रेंजर सत्यम कुमार ने बताया कि मामले में जानकी देवी को नोटिस जारी किया जा रहा है। उनके खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।
वन विभाग का कहना है कि वन्यजीवों के साथ इस तरह का व्यवहार न केवल बेहद खतरनाक है, बल्कि कानून का उल्लंघन भी है।
लोगों से वन विभाग की अपील
वन विभाग ने बरसात के मौसम को देखते हुए लोगों से विशेष सावधानी बरतने की अपील की है।
अधिकारियों ने कहा कि यदि किसी घर या आबादी वाले क्षेत्र में जहरीला सांप दिखाई दे तो उसे पकड़ने या उसके साथ फोटो-वीडियो बनाने की कोशिश न करें। ऐसी स्थिति में तुरंत वन विभाग की प्रशिक्षित रेस्क्यू टीम को सूचना दें।
कई जहरीले सांपों का कर चुकी हैं रेस्क्यू
जानकी देवी इलाके में “स्नेक लेडी” के नाम से जानी जाती हैं। उन्होंने अपनी जान जोखिम में डालकर अब तक कई जहरीले सांपों का सफल रेस्क्यू किया है। उनकी बहादुरी की स्थानीय लोग सराहना भी करते हैं।
हालांकि इस बार किंग कोबरा का रेस्क्यू और कथित तौर पर सोशल मीडिया रील बनाने की कोशिश उनके लिए जानलेवा साबित होते-बचते रह गई। अब इस मामले में वन विभाग की जांच और कानूनी कार्रवाई आगे की दिशा तय करेगी।


