गांवों में भी लगेगा होल्डिंग टैक्स, 50 से 5000 रुपये तक होगी वार्षिक वसूली; बिहार कैबिनेट ने ग्राम पंचायत कर-दर शुल्क नियमावली 2026 को दी मंजूरी

पटना: बिहार सरकार ने ग्रामीण प्रशासन और पंचायतों को आर्थिक रूप से अधिक सशक्त बनाने की दिशा में बड़ा फैसला लिया है। राज्य कैबिनेट ने ग्राम पंचायत कर-दर शुल्क नियमावली, 2026 को मंजूरी दे दी है। इस फैसले के बाद अब गांवों में भी निर्धारित श्रेणियों के अनुसार होल्डिंग टैक्स और अन्य स्थानीय शुल्क वसूले जाएंगे। नई व्यवस्था के तहत मकानों, दुकानों, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों, पेट्रोल पंप, सिनेमा हॉल, ईंट-भट्ठों और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों पर तय दरों के अनुसार टैक्स लगाया जाएगा। सरकार का कहना है कि इस व्यवस्था से ग्राम पंचायतों की आय बढ़ेगी और स्थानीय स्तर पर विकास कार्यों को गति मिलेगी।

इसी कैबिनेट बैठक में राज्य सरकार ने ग्राम पंचायत, पंचायत समिति, जिला परिषद और वार्डों के नए परिसीमन को भी मंजूरी दी। इसके अलावा भागलपुर-मुंगेर ग्रीनफील्ड हवाई अड्डा परियोजना के लिए 1329 करोड़ रुपये की स्वीकृति भी प्रदान की गई। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई बैठक में कुल 25 महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर मुहर लगी।

गांवों में पहली बार स्पष्ट नियमों के तहत होगी टैक्स वसूली

अब तक पंचायतों को कर वसूलने का अधिकार तो था, लेकिन इसके लिए विस्तृत नियमावली नहीं होने के कारण अधिकांश पंचायतों में टैक्स संग्रह प्रभावी ढंग से नहीं हो पाता था। नई नियमावली लागू होने के बाद कर निर्धारण और वसूली की पूरी प्रक्रिया स्पष्ट हो जाएगी। पंचायतें निर्धारित दरों के अनुसार टैक्स वसूल सकेंगी और प्राप्त राशि का उपयोग स्थानीय विकास कार्यों में किया जाएगा।

सरकार का मानना है कि पंचायतों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए उनका स्वयं का राजस्व बढ़ाना आवश्यक है। इसी उद्देश्य से यह नई व्यवस्था लागू की जा रही है।

किस पर कितना लगेगा होल्डिंग टैक्स

नई नियमावली के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों में संपत्तियों की श्रेणी के आधार पर वार्षिक होल्डिंग टैक्स निर्धारित किया गया है।

  • अर्द्ध पक्का मकान – 50 रुपये प्रतिवर्ष
  • पक्का मकान – 100 रुपये प्रतिवर्ष
  • कच्चे मकानों पर होल्डिंग टैक्स नहीं लगेगा।
  • प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बने ग्रामीण आवास पर 25 रुपये प्रतिवर्ष का प्रावधान किया गया है, जिसकी राशि ग्रामीण विकास विभाग वहन करेगा।
  • सफाई शुल्क – 30 रुपये प्रतिवर्ष
  • जलापूर्ति शुल्क – 30 रुपये प्रतिमाह

व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर भी तय होगा शुल्क

नई व्यवस्था के तहत गांवों में संचालित व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर भी टैक्स लगाया जाएगा। इसमें पेट्रोल पंप, एलपीजी गैस एजेंसी, ईंट-भट्ठा, सिनेमा हॉल तथा अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठान शामिल हैं। इन प्रतिष्ठानों से निर्धारित वार्षिक शुल्क लिया जाएगा। सरकार का मानना है कि इससे पंचायतों को नियमित आय का स्रोत मिलेगा और ग्रामीण क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं के विकास के लिए अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध होंगे।

पंचायतों की आय बढ़ाने पर सरकार का जोर

राज्य सरकार का कहना है कि पंचायतों को अधिक वित्तीय अधिकार देने के साथ-साथ उनकी आय बढ़ाना भी जरूरी है। अब तक पंचायतें विकास योजनाओं के लिए मुख्य रूप से सरकारी अनुदान पर निर्भर रहती थीं। नई कर व्यवस्था लागू होने के बाद पंचायतें स्थानीय स्तर पर भी राजस्व जुटा सकेंगी। इससे सड़क, नाली, पेयजल, स्ट्रीट लाइट, सफाई और अन्य जनसुविधाओं से जुड़े कार्यों में तेजी आने की उम्मीद है।

वार्ड, पंचायत और जिला परिषद का होगा नया परिसीमन

कैबिनेट ने पंचायतों के नए परिसीमन को भी मंजूरी दे दी है। यह प्रक्रिया वर्ष 2011 की जनगणना के आधार पर पूरी की जाएगी। नए परिसीमन के बाद पंचायतों, वार्डों और जिला परिषद क्षेत्रों की सीमाएं पुनर्निर्धारित होंगी। इसके बाद राज्य में होने वाले अगले पंचायत चुनाव नई सीमाओं के अनुसार कराए जाएंगे।

सरकार का कहना है कि परिसीमन का उद्देश्य बढ़ती आबादी के अनुरूप प्रतिनिधित्व को संतुलित बनाना है, ताकि प्रत्येक क्षेत्र को उचित प्रतिनिधित्व मिल सके।

भागलपुर-मुंगेर ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट परियोजना को मिली बड़ी मंजूरी

कैबिनेट बैठक में भागलपुर-मुंगेर ग्रीनफील्ड हवाई अड्डा परियोजना के लिए भी महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया। परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण मद में 1329 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है। प्रस्तावित हवाई अड्डे के निर्माण से पूर्वी बिहार के लाखों लोगों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है। इससे भागलपुर, मुंगेर, बांका, जमुई, लखीसराय और आसपास के जिलों की हवाई संपर्क व्यवस्था मजबूत होगी।

सरकार का मानना है कि एयरपोर्ट बनने से उद्योग, व्यापार, पर्यटन और निवेश को भी बढ़ावा मिलेगा तथा रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।

ग्रामीण विकास की दिशा में अहम कदम

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पंचायतों द्वारा एकत्रित राजस्व का पारदर्शी और योजनाबद्ध उपयोग किया गया तो ग्रामीण क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिल सकता है। हालांकि नई कर व्यवस्था को लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता अभियान चलाने की भी आवश्यकता होगी, ताकि लोग नियमों को समझ सकें और कर भुगतान को लेकर किसी प्रकार की भ्रम की स्थिति उत्पन्न न हो।

राज्य सरकार जल्द ही नई नियमावली की अधिसूचना जारी कर इसके क्रियान्वयन की प्रक्रिया शुरू करेगी। इसके बाद पंचायतों को कर निर्धारण, वसूली और अभिलेख संधारण से संबंधित दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे। नई व्यवस्था लागू होने के साथ ही बिहार के ग्रामीण प्रशासन में वित्तीय प्रबंधन और स्थानीय विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल सकता है।

  • ये भी पढ़े..

    मुंगेर में पहली एकदिवसीय ग्रामीण प्रशिक्षण शिविर-सह-कार्यशाला आयोजित, श्रमिकों को योजनाओं की दी गई विस्तृत जानकारी

    Share Add as a preferred…

    भागलपुर से मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का बड़ा ऐलान, नए डिग्री कॉलेज का उद्घाटन और 211 महाविद्यालयों को मिली मान्यता

    Share Add as a preferred…