सुपौल की एमवीआई ने प्रेमी के साथ मिलकर रची पति की हत्या की साजिश, ट्रेन में मारी गई गोली; लूटपाट की कहानी बनाकर पुलिस को करना चाहती थी गुमराह

कटिहार: बिहार में एक बार फिर रिश्तों के टूटते भरोसे और सुनियोजित अपराध की ऐसी कहानी सामने आई है, जिसने सभी को हैरान कर दिया। कटिहार जिले में जून महीने में चलती ट्रेन में हुई बिजली विभाग के कर्मचारी देव कुमार गुंजन की हत्या के मामले का रेल पुलिस ने बड़ा खुलासा किया है। जांच में सामने आया कि यह हत्या किसी लूटपाट का नतीजा नहीं थी, बल्कि मृतक की पत्नी और उसके प्रेमी ने मिलकर पूरी साजिश रची थी। हत्या को ट्रेन में लूटपाट के दौरान हुई वारदात का रूप देकर पुलिस को गुमराह करने की कोशिश की गई थी। हालांकि तकनीकी जांच, मोबाइल कॉल डिटेल और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के आधार पर रेल पुलिस ने पूरे षड्यंत्र का पर्दाफाश कर दिया।

11 जून को चलती ट्रेन में हुई थी हत्या

रेल पुलिस के अनुसार 11 जून को मानसी रेल थाना क्षेत्र के बदलाघाट के पास जनसाधारण एक्सप्रेस में यात्रा कर रहे बिजली विभाग के तकनीकी कर्मचारी देव कुमार गुंजन को गोली मार दी गई थी। घटना के बाद शुरुआती तौर पर ऐसा प्रतीत हुआ कि बदमाशों ने लूटपाट के दौरान उनकी हत्या कर दी है। मौके की परिस्थितियां भी इसी ओर इशारा कर रही थीं, लेकिन जांच आगे बढ़ने पर कई ऐसे तथ्य सामने आए, जिन्होंने पूरे मामले की दिशा बदल दी।

तकनीकी जांच ने खोला हत्या का राज

रेल पुलिस ने घटनास्थल से मिले साक्ष्यों के साथ-साथ मोबाइल कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर), लोकेशन ट्रैकिंग, डिजिटल एविडेंस और संदिग्धों की गतिविधियों का गहन विश्लेषण किया। जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि मृतक की पत्नी समिता कुमारी और नालंदा निवासी अजित कुमार के बीच लंबे समय से प्रेम संबंध थे। दोनों लगातार संपर्क में थे और हत्या से पहले भी कई बार बातचीत हुई थी। इसके बाद पुलिस का शक गहराया और पूछताछ का दायरा बढ़ाया गया।

पत्नी और प्रेमी ने मिलकर बनाई हत्या की योजना

पुलिस की जांच में सामने आया कि देव कुमार गुंजन दोनों के रिश्ते में सबसे बड़ी बाधा बन गए थे। इसी कारण समिता कुमारी और उसके प्रेमी अजित कुमार ने उन्हें रास्ते से हटाने की योजना बनाई। आरोप है कि दोनों ने मिलकर एक शूटर से संपर्क किया और उसे सुपारी देकर हत्या कराने का फैसला किया। पूरी योजना पहले से तैयार की गई ताकि हत्या के बाद किसी को उन पर शक न हो।

चार लाख रुपये में तय हुई सुपारी

पुलिस अधिकारियों के मुताबिक हत्या को अंजाम देने के लिए कथित तौर पर करीब चार लाख रुपये में सुपारी तय की गई थी। शूटर को चलती ट्रेन में वारदात करने का जिम्मा दिया गया ताकि घटना लूटपाट के दौरान हुई हत्या जैसी दिखाई दे। योजना के मुताबिक ट्रेन में देव कुमार को गोली मार दी गई और वारदात को सामान्य आपराधिक घटना साबित करने की कोशिश की गई।

पूछताछ में टूटे आरोपी, सामने आई पूरी साजिश

रेल पुलिस की सख्ती और तकनीकी साक्ष्यों के सामने आरोपी ज्यादा देर तक टिक नहीं सके। पूछताछ के दौरान कई अहम जानकारियां सामने आईं, जिसके बाद पुलिस ने पूरे घटनाक्रम का खुलासा कर दिया। पुलिस का दावा है कि आरोपियों ने हत्या की योजना, सुपारी और वारदात से जुड़े कई महत्वपूर्ण तथ्यों की जानकारी दी है।

चार आरोपी गिरफ्तार

इस मामले में रेल पुलिस ने मृतक की पत्नी समिता कुमारी, उसके प्रेमी अजित कुमार, कथित शूटर राजू कुमार उर्फ धीरज और एक अन्य आरोपी को गिरफ्तार किया है। सभी आरोपियों से पूछताछ जारी है। पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि इस साजिश में और कौन-कौन लोग शामिल थे तथा हत्या के लिए धन की व्यवस्था किस प्रकार की गई थी।

सुपौल में एमवीआई, प्रेमी बिजली विभाग में कर्मचारी

पुलिस के अनुसार समिता कुमारी सुपौल में मोटरयान निरीक्षक (एमवीआई) के पद पर कार्यरत हैं। वहीं उसका प्रेमी अजित कुमार नालंदा जिले में बिजली विभाग में ग्रेड-वन तकनीशियन है। दोनों की पहचान नौकरी के दौरान हुई थी और धीरे-धीरे उनके बीच नजदीकियां बढ़ गईं। पुलिस का कहना है कि यही संबंध बाद में हत्या की साजिश का कारण बना।

झारखंड के रहने वाले थे देव कुमार

मृतक देव कुमार गुंजन मूल रूप से झारखंड के गोड्डा जिले के निवासी थे और बिहार के जमुई जिले में बिजली विभाग में तकनीकी कर्मचारी के रूप में कार्यरत थे। परिवार के लोगों ने घटना के बाद हत्या की आशंका जताई थी और निष्पक्ष जांच की मांग की थी। अब पुलिस के खुलासे के बाद परिजनों का संदेह सही साबित हुआ है।

पुलिस ने क्या कहा?

रेल पुलिस के अधिकारियों का कहना है कि यदि जांच केवल घटनास्थल तक सीमित रहती तो यह मामला लूटपाट के दौरान हत्या मान लिया जाता। लेकिन वैज्ञानिक जांच, डिजिटल साक्ष्य और लगातार की गई पूछताछ ने पूरे षड्यंत्र को उजागर कर दिया। पुलिस का कहना है कि मामले में आगे भी जांच जारी रहेगी और यदि किसी अन्य व्यक्ति की संलिप्तता सामने आती है तो उसके खिलाफ भी सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

यह मामला एक बार फिर साबित करता है कि आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक जांच के सामने सुनियोजित अपराध भी ज्यादा समय तक छिप नहीं सकते। रिश्तों में विश्वासघात और लालच से जुड़ी इस वारदात ने पूरे बिहार को झकझोर दिया है।

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