निलंबित ड्रग इंस्पेक्टर दीपक राम शराब के नशे में गिरफ्तार, मेडिकल जांच में पुष्टि के बाद मद्यनिषेध कानून के तहत कार्रवाई

लखीसराय: बिहार में पूर्ण शराबबंदी लागू होने के बावजूद शराब सेवन के मामलों में कार्रवाई लगातार जारी है। इसी कड़ी में लखीसराय जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने प्रशासनिक महकमे में हलचल पैदा कर दी है। निलंबित ड्रग इंस्पेक्टर दीपक राम को कथित रूप से शराब के नशे की हालत में पुलिस ने हिरासत में लिया है। प्रारंभिक कार्रवाई के दौरान कराई गई मेडिकल जांच में शराब सेवन की पुष्टि होने के बाद उनके खिलाफ बिहार मद्यनिषेध एवं उत्पाद अधिनियम के तहत कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

यह मामला इसलिए भी चर्चा का विषय बना हुआ है क्योंकि दीपक राम पहले से ही कई विवादों और विभागीय जांचों का सामना कर रहे हैं। हाल ही में उनके निलंबन की कार्रवाई हुई थी और अब शराबबंदी कानून के उल्लंघन के आरोप ने उनकी मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।

मेडिकल जांच में शराब सेवन की पुष्टि

पुलिस सूत्रों के अनुसार, संदिग्ध स्थिति में पाए जाने के बाद दीपक राम को हिरासत में लिया गया और निर्धारित प्रक्रिया के तहत उनका मेडिकल परीक्षण कराया गया। जांच रिपोर्ट में शराब सेवन की पुष्टि होने की बात सामने आई। इसके बाद पुलिस ने बिहार मद्यनिषेध एवं उत्पाद अधिनियम के तहत आवश्यक कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी।

अधिकारियों का कहना है कि कानून सभी नागरिकों पर समान रूप से लागू होता है। चाहे कोई सरकारी अधिकारी हो या आम व्यक्ति, शराबबंदी कानून का उल्लंघन पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाती है।

पहले से विवादों में रहा है नाम

दीपक राम का नाम हाल के महीनों में कई कारणों से चर्चा में रहा है। विभागीय स्तर पर उनके खिलाफ विभिन्न आरोपों की जांच चल रही थी। इसी दौरान उन्हें निलंबित भी किया गया था। अब शराब सेवन के मामले में हुई गिरफ्तारी ने इस पूरे प्रकरण को और अधिक गंभीर बना दिया है।

प्रशासनिक अधिकारियों का मानना है कि यदि कोई सरकारी पद पर रहते हुए नियमों का उल्लंघन करता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई आवश्यक होती है, ताकि शासन-प्रशासन की पारदर्शिता और जवाबदेही बनी रहे।

ऑडियो वायरल प्रकरण के बाद बढ़ी थी चर्चा

दीपक राम इससे पहले बिहार सरकार के कृषि मंत्री विजय कुमार सिंहा से जुड़े कथित ऑडियो वायरल प्रकरण को लेकर भी सुर्खियों में रहे थे। उस मामले के सामने आने के बाद भी उनका नाम काफी चर्चा में रहा और विभागीय स्तर पर कई पहलुओं की समीक्षा की गई थी।

हालांकि उस प्रकरण में संबंधित एजेंसियों द्वारा अलग से जांच की जा रही थी, लेकिन लगातार विवादों में नाम आने से उनकी कार्यशैली पर सवाल उठने लगे थे।

दवा जब्ती मामले में भी चल रही थी जांच

करीब एक माह पूर्व रामगढ़ चौक थाना क्षेत्र में जब्त की गई दवाओं से जुड़े मामले में भी दीपक राम पर गंभीर आरोप लगे थे। आरोप था कि जब्त दवाओं की विधिवत सुपुर्दगी नहीं की गई और मामले में आवश्यक प्राथमिकी भी दर्ज नहीं कराई गई। इस पूरे प्रकरण को गंभीर मानते हुए विभाग ने जांच शुरू की थी।

जांच के दौरान कई दस्तावेजों और प्रक्रियाओं की समीक्षा की गई। इसी मामले में उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई आगे बढ़ी और एक मामला भी दर्ज किया गया। बाद में उन्हें निलंबित कर दिया गया था।

शराबबंदी कानून के तहत होगी आगे की कार्रवाई

बिहार में वर्ष 2016 से पूर्ण शराबबंदी लागू है। राज्य सरकार ने शराब के निर्माण, बिक्री, परिवहन, भंडारण और सेवन पर सख्त प्रतिबंध लगाया हुआ है। ऐसे मामलों में पुलिस द्वारा मेडिकल जांच, साक्ष्य संग्रह और कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया जाता है।

दीपक राम के मामले में भी पुलिस अब मेडिकल रिपोर्ट, मौके पर जुटाए गए साक्ष्य और अन्य तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई कर रही है। आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद उन्हें न्यायालय में प्रस्तुत किया जाएगा।

अधिकारियों ने कहा, जांच निष्पक्ष तरीके से जारी

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पूरे मामले की जांच निष्पक्ष तरीके से की जा रही है। किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सभी आवश्यक साक्ष्यों का परीक्षण किया जाएगा। यदि जांच के दौरान कोई अन्य तथ्य सामने आते हैं तो उन्हें भी केस डायरी में शामिल किया जाएगा।

प्रशासन का कहना है कि कानून के पालन में किसी भी प्रकार की ढिलाई नहीं बरती जाएगी और सभी प्रक्रियाएं नियमानुसार पूरी की जाएंगी।

विभागीय कार्रवाई पर भी रहेगी नजर

इस गिरफ्तारी के बाद अब विभागीय स्तर पर भी मामले की समीक्षा होने की संभावना है। चूंकि दीपक राम पहले से निलंबित हैं और उनके खिलाफ विभागीय जांच चल रही है, ऐसे में शराबबंदी कानून से जुड़े इस नए मामले का प्रभाव विभागीय कार्रवाई पर भी पड़ सकता है।

प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, यदि कानूनी प्रक्रिया में आरोप पुष्ट होते हैं तो विभाग अपने सेवा नियमों के अनुसार आगे का निर्णय ले सकता है। हालांकि अंतिम फैसला जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही लिया जाएगा।

कानून सभी के लिए समान

बिहार में शराबबंदी कानून को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए पुलिस और उत्पाद विभाग लगातार अभियान चला रहे हैं। समय-समय पर आम लोगों के साथ-साथ सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों पर भी कार्रवाई की जाती रही है। सरकार का स्पष्ट रुख है कि कानून के उल्लंघन के मामलों में किसी भी व्यक्ति को विशेष छूट नहीं दी जाएगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में निष्पक्ष जांच और त्वरित कानूनी कार्रवाई से कानून के प्रति लोगों का विश्वास मजबूत होता है और प्रशासनिक व्यवस्था में जवाबदेही बनी रहती है।

पुलिस जुटा रही है सभी साक्ष्य

फिलहाल पुलिस मेडिकल जांच रिपोर्ट, घटनास्थल से जुड़े तथ्यों और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों को एकत्र कर रही है। जांच पूरी होने के बाद विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाएगी और उसी आधार पर आगे की कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

इस बीच प्रशासन पूरे मामले पर नजर बनाए हुए है। अधिकारियों का कहना है कि जांच के दौरान यदि किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ भी कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल निलंबित ड्रग इंस्पेक्टर दीपक राम के विरुद्ध बिहार मद्यनिषेध एवं उत्पाद अधिनियम के तहत कार्रवाई जारी है और मामले की विस्तृत जांच की जा रही है।

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