बिहार में हेली और एयर टूरिज्म सेवा की शुरुआत, पर्यटन और रोजगार को मिलेगा नया विस्तार

पटना से शुरू हुई नई पर्यटन पहल बिहार को देश के प्रमुख पर्यटन राज्यों की श्रेणी में पहुंचाने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है। राज्य सरकार ने हेली टूरिज्म और एयर टूरिज्म सेवा योजना की शुरुआत करते हुए पर्यटन क्षेत्र को नई गति देने का प्रयास किया है। इस योजना के जरिए अब आम लोग भी कम खर्च में बिहार के प्रमुख पर्यटन स्थलों की हवाई यात्रा कर सकेंगे। सरकार का मानना है कि यह पहल केवल यात्रा सुविधाओं तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इससे रोजगार, निवेश, स्थानीय व्यापार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।

राजधानी पटना स्थित मुख्यमंत्री सचिवालय के संवाद सभागार में आयोजित कार्यक्रम के दौरान इस महत्वाकांक्षी योजना का औपचारिक शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम में पर्यटन, नागरिक उड्डयन और प्रशासनिक विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ पर्यटन क्षेत्र से जुड़े हितधारकों और लाभार्थियों ने भी भाग लिया। सरकार ने इसे बिहार के पर्यटन इतिहास में एक नए अध्याय की शुरुआत बताया।

नई योजना के तहत शुरुआती चरण में पटना से राजगीर, वाल्मीकिनगर और कैमूर के लिए हेलीकॉप्टर सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इन स्थानों का चयन राज्य के प्रमुख धार्मिक, ऐतिहासिक और प्राकृतिक पर्यटन केंद्रों को ध्यान में रखते हुए किया गया है। राजगीर अपनी बौद्ध विरासत और ऐतिहासिक महत्व के लिए जाना जाता है, जबकि वाल्मीकिनगर अपनी वन संपदा और प्राकृतिक सौंदर्य के कारण पर्यटकों को आकर्षित करता है। वहीं कैमूर अपने पहाड़ी क्षेत्रों, जलप्रपातों और ऐतिहासिक स्थलों के लिए प्रसिद्ध है।

सरकार ने इस योजना को आम लोगों तक पहुंचाने के लिए टिकट दरों पर विशेष अनुदान देने का निर्णय लिया है। प्रति टिकट अधिकतम 15,422 रुपये तक की सब्सिडी उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे हवाई पर्यटन अब केवल सीमित वर्ग तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि मध्यम वर्ग और सामान्य परिवार भी इसका लाभ उठा सकेंगे। सरकार का उद्देश्य पर्यटन को जनसुलभ बनाना और अधिक से अधिक लोगों को बिहार की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ना है।

योजना के तहत बुकिंग प्रक्रिया 13 जुलाई 2026 से शुरू कर दी गई है, जबकि नियमित हेलीकॉप्टर सेवाओं का संचालन 18 जुलाई 2026 से प्रत्येक शनिवार और रविवार को किया जाएगा। सप्ताहांत में सेवाएं उपलब्ध होने से परिवारों और पर्यटकों को अपनी यात्रा की बेहतर योजना बनाने में सुविधा होगी। आने वाले समय में यात्रियों की संख्या और मांग को देखते हुए सेवाओं का विस्तार भी किया जा सकता है।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि बिहार केवल अतीत की गौरवशाली सभ्यता का प्रतीक नहीं है, बल्कि आधुनिक पर्यटन के क्षेत्र में भी तेजी से अपनी पहचान बना रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य बिहार को विश्व पर्यटन मानचित्र पर एक मजबूत स्थान दिलाना है ताकि देश और विदेश से अधिक संख्या में पर्यटक यहां पहुंचें।

उन्होंने कहा कि बिहार भगवान बुद्ध, भगवान महावीर, नालंदा विश्वविद्यालय और प्राचीन मगध साम्राज्य जैसी ऐतिहासिक धरोहरों का केंद्र रहा है। इसके बावजूद राज्य की पर्यटन संभावनाओं का पूरी तरह उपयोग नहीं हो पाया है। अब सरकार इन धरोहरों को आधुनिक सुविधाओं और बेहतर कनेक्टिविटी के माध्यम से वैश्विक पहचान दिलाने के लिए काम कर रही है।

सरकार का मानना है कि पर्यटन केवल घूमने-फिरने का माध्यम नहीं बल्कि आर्थिक विकास का मजबूत आधार भी है। पर्यटन गतिविधियों में वृद्धि होने से होटल उद्योग, परिवहन, स्थानीय बाजार, हस्तशिल्प और खानपान से जुड़े व्यवसायों को सीधे लाभ मिलेगा। इससे हजारों युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के अवसर पैदा होंगे।

विशेष रूप से होम स्टे योजना को बढ़ावा देने पर जोर दिया जा रहा है। इसके माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों के लोग अपने घरों को पर्यटकों के लिए आवास के रूप में विकसित कर सकेंगे। इससे ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ेगी और पर्यटकों को बिहार की स्थानीय संस्कृति और जीवनशैली को करीब से जानने का अवसर मिलेगा।

स्थानीय हस्तशिल्प और पारंपरिक उत्पादों को भी इस योजना से नई पहचान मिलने की उम्मीद है। मधुबनी पेंटिंग, सिक्की कला, पत्थर शिल्प, हथकरघा उत्पाद और स्थानीय हस्तनिर्मित वस्तुओं की मांग बढ़ने से कारीगरों और छोटे उद्यमियों को सीधा लाभ मिलेगा। सरकार ग्रामीण पर्यटन को भी नई दिशा देने की तैयारी कर रही है ताकि गांवों की संस्कृति, परंपराएं और प्राकृतिक सुंदरता पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बन सकें।

कार्यक्रम के दौरान यह भी कहा गया कि राज्य में पर्यटन क्षेत्र में निजी निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए सार्वजनिक-निजी भागीदारी मॉडल को बढ़ावा दिया जाएगा। सरकार का मानना है कि निजी क्षेत्र की भागीदारी से आधुनिक होटल, रिसॉर्ट, एडवेंचर टूरिज्म और अन्य पर्यटन सुविधाओं का तेजी से विकास संभव होगा।

राजधानी पटना में नए होटल प्रोजेक्ट्स पर भी तेजी से काम किया जा रहा है। इन परियोजनाओं से राज्य को राजस्व प्राप्त होने के साथ-साथ रोजगार के नए अवसर भी उपलब्ध होंगे। इसके अलावा विभिन्न पर्यटन सर्किटों के विकास पर भी सरकार विशेष ध्यान दे रही है ताकि पर्यटक एक ही यात्रा में कई महत्वपूर्ण स्थलों का भ्रमण कर सकें।

राजगीर और बोधगया जैसे बौद्ध स्थलों के अलावा वैशाली, लछुआर, सोनपुर, वाल्मीकिनगर और कैमूर को भी पर्यटन की दृष्टि से विकसित किया जा रहा है। भीमबांध के जंगल, नालंदा की ऐतिहासिक धरोहर और बिहार की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने की योजना बनाई जा रही है।

बिहार म्यूजियम और बापू टॉवर जैसे आधुनिक पर्यटन केंद्र भी लगातार पर्यटकों को आकर्षित कर रहे हैं। राज्य सरकार का मानना है कि आने वाले वर्षों में ऐसे और कई प्रोजेक्ट विकसित किए जाएंगे जो बिहार की नई पहचान बनेंगे। इसी दिशा में जेपी गंगा पथ से सोनपुर स्थित हरिहरनाथ मंदिर तक रोपवे परियोजना पर भी विचार किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि बिहार का हर नागरिक राज्य का सबसे बड़ा प्रतिनिधि और ब्रांड एंबेसडर है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे अपने व्यवहार, आतिथ्य और सकारात्मक सोच के माध्यम से बिहार की अच्छी छवि को देश और दुनिया तक पहुंचाएं। यदि राज्य का प्रत्येक नागरिक पर्यटन को बढ़ावा देने में योगदान देता है तो बिहार की पहचान और अधिक मजबूत होगी।

उन्होंने राज्य की आधारभूत संरचना का उल्लेख करते हुए कहा कि बिहार के गांव अब सड़क, बिजली और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं से लैस हो चुके हैं। बेहतर सड़क नेटवर्क और बढ़ती कनेक्टिविटी पर्यटन विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। ग्रामीण क्षेत्रों तक आसान पहुंच होने से पर्यटकों को नए स्थानों की खोज का अवसर मिलेगा।

कार्यक्रम के दौरान पर्यटन नीति 2023 के अंतर्गत विभिन्न हितधारकों को डमी चेक प्रदान किए गए तथा होम स्टे प्रोत्साहन योजना के लाभार्थियों को प्रमाण पत्र भी वितरित किए गए। इसके अलावा पर्यटन क्षेत्र में योगदान देने वाले कई लोगों को सम्मानित भी किया गया।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह योजना सफल रहती है तो आने वाले वर्षों में बिहार देश के सबसे तेजी से उभरते पर्यटन राज्यों में शामिल हो सकता है। हेली टूरिज्म और एयर टूरिज्म जैसी आधुनिक सेवाएं राज्य को नई पहचान देने के साथ-साथ आर्थिक विकास की रफ्तार को भी बढ़ाने का काम करेंगी।

बिहार की ऐतिहासिक विरासत, धार्मिक महत्व, प्राकृतिक सौंदर्य और आधुनिक पर्यटन सुविधाओं का यह संगम आने वाले समय में राज्य को पर्यटन उद्योग के नए केंद्र के रूप में स्थापित कर सकता है। सरकार को उम्मीद है कि यह योजना न केवल पर्यटकों की संख्या बढ़ाएगी बल्कि रोजगार, निवेश और क्षेत्रीय विकास के नए रास्ते भी खोलेगी।

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