UDISE+ रिपोर्ट 2025-26: बिहार के सरकारी स्कूलों में सुविधाएं बढ़ीं, लेकिन 6 साल में 29 लाख छात्र हुए कम

पटना: बिहार के सरकारी स्कूलों की तस्वीर तेजी से बदली है। नए स्कूल खुले हैं, शिक्षकों की संख्या बढ़ी है, बिजली, पानी, शौचालय और इंटरनेट जैसी सुविधाओं का विस्तार हुआ है। लेकिन UDISE+ 2025-26 की रिपोर्ट एक बड़ी चिंता भी सामने लाती है—सरकारी विद्यालयों में नामांकन लगातार घट रहा है।

6 साल में 29 लाख छात्र कम

शिक्षाविद् डॉ. विद्यार्थी विकास के अनुसार, वर्ष 2019-20 से 2025-26 के बीच सरकारी स्कूलों में करीब 1.31 लाख शिक्षक बढ़े, लेकिन इसी अवधि में करीब 29 लाख छात्र कम हो गए।

इस दौरान राज्य में 3,825 नए सरकारी विद्यालय भी शुरू हुए, जिनमें 946 स्कूल पिछले एक वर्ष में खोले गए। इसके बावजूद सिर्फ एक साल में 4.37 लाख छात्रों का नामांकन घट गया।

पढ़ाई पूरी करने वाले छात्रों की संख्या बढ़ी

रिपोर्ट का सकारात्मक पक्ष यह है कि बच्चों के स्कूल में टिके रहने की स्थिति पहले से बेहतर हुई है।

  • 2019-20: कक्षा 1 में दाखिला लेने वाले 100 बच्चों में केवल 19 छात्र 12वीं तक पहुंचते थे।
  • 2025-26: अब यह संख्या बढ़कर 39 छात्र हो गई है।

हालांकि अब भी 100 में 61 बच्चे 12वीं तक पहुंचने से पहले पढ़ाई छोड़ देते हैं।

स्कूलों में सुविधाओं का विस्तार

राज्य के 76,435 सरकारी विद्यालयों में अब अधिकांश जगह बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध हैं।

  • 76,069 स्कूलों में बिजली
  • 76,318 स्कूलों में पेयजल
  • 75,777 स्कूलों में बालिकाओं के लिए कार्यशील शौचालय
  • 76,228 स्कूलों में उपयोग योग्य शौचालय

डिजिटल शिक्षा की ओर बढ़ते कदम

रिपोर्ट के अनुसार:

  • 99.4% स्कूलों में हैंडवॉश सुविधा
  • 72.2% स्कूलों में पुस्तकालय
  • लगभग 38% स्कूलों में कंप्यूटर सुविधा
  • 91.3% विद्यालय इंटरनेट से जुड़े

हालांकि आज भी करीब 68% सरकारी स्कूलों में कंप्यूटर शिक्षा उपलब्ध नहीं है, जिसे विशेषज्ञ भविष्य की सबसे बड़ी चुनौती मान रहे हैं।

विशेषज्ञों की राय

वरिष्ठ पत्रकार लक्ष्मीकांत सजल का कहना है कि सरकारी स्कूलों का ढांचा पहले से मजबूत हुआ है, लेकिन लगातार घटते नामांकन के कारणों पर गंभीर शोध की जरूरत है। उनका मानना है कि यह पता लगाया जाना चाहिए कि बच्चे सरकारी स्कूलों से दूर क्यों हो रहे हैं और उन्हें 12वीं तक स्कूल में कैसे बनाए रखा जाए।

रिपोर्ट का बड़ा संदेश

UDISE+ 2025-26 की रिपोर्ट दो स्पष्ट संकेत देती है—

  • सरकारी स्कूलों में सुविधाएं, शिक्षक और डिजिटल संसाधन तेजी से बढ़े हैं।
  • लेकिन घटता नामांकन और बीच में पढ़ाई छोड़ने वाले बच्चों की संख्या अब भी शिक्षा व्यवस्था की सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है।

अब सरकार के सामने सिर्फ नए स्कूल खोलना ही नहीं, बल्कि अधिक से अधिक बच्चों को सरकारी विद्यालयों से जोड़ना और उन्हें 12वीं तक पढ़ाई पूरी कराने की चुनौती भी है।

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