
रोहतास: बिहार के रोहतास जिले में छह वर्ष पहले 10 वर्षीय बच्ची के साथ दुष्कर्म कर उसकी निर्मम हत्या करने के मामले में अदालत ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (एडीजे-7) अरविंद ने अभियुक्त बलिराम सिंह को दोषी करार देते हुए फांसी की सजा सुनाई है। अदालत ने इस मामले को ‘दुर्लभतम श्रेणी’ (Rarest of Rare) का अपराध मानते हुए मृत्युदंड दिया। साथ ही पीड़िता की मां को 50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता देने का भी आदेश दिया गया है।
दिवाली के दिन दिया था जघन्य वारदात को अंजाम
मामला 15 नवंबर 2020 का है। दिवाली के दिन आरोपी बलिराम सिंह ने 10 वर्षीय बच्ची को खिलौना और चॉकलेट का लालच देकर अपने घर बुलाया। वहां उसने बच्ची के साथ दुष्कर्म किया और पहचान उजागर होने के डर से उसकी हत्या कर दी।
वारदात के बाद आरोपी ने मासूम का शव अपने घर में रखे एक काठ के बक्से में छिपा दिया और खुद दूसरे घर में जाकर छिप गया।
एक गवाह की सूचना से खुला पूरा मामला
गांव के एक व्यक्ति ने आरोपी को बच्ची के साथ जाते हुए देखा था। इसी गवाही के आधार पर पुलिस ने आरोपी के घर की तलाशी ली, जहां बक्से से बच्ची का शव बरामद हुआ। इसके बाद पुलिस ने पॉक्सो एक्ट सहित विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।
11 गवाहों की गवाही ने दिलाई सजा
मुकदमे की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से 11 गवाहों की गवाही कराई गई। विशेष लोक अभियोजक हीरा प्रताप सिंह ने अदालत में मजबूत साक्ष्य और गवाहों के बयान प्रस्तुत किए, जिसके आधार पर अदालत ने आरोपी को दोषी ठहराया।
कोर्ट ने कहा- बच्चों के खिलाफ अपराध पर नहीं होगी कोई रियायत
फैसला सुनाते हुए एडीजे-7 अरविंद ने कहा कि मासूम बच्ची के साथ किया गया यह अपराध अत्यंत जघन्य, अमानवीय और दुर्लभतम श्रेणी का है। ऐसे मामलों में समाज को कड़ा संदेश देने के लिए फांसी की सजा ही उचित है। अदालत ने स्पष्ट किया कि बच्चों के खिलाफ होने वाले ऐसे अपराधों पर किसी भी प्रकार की नरमी नहीं बरती जा सकती।
पीड़ित परिवार को मिलेगी आर्थिक सहायता
अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि पीड़िता की मां को 50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाए, ताकि पीड़ित परिवार को कुछ राहत मिल सके।
फैसले से गया सख्त संदेश
इस फैसले के बाद पूरे बिहार में नाबालिग बच्चों के खिलाफ अपराध करने वालों के लिए कड़ा संदेश गया है। विशेष लोक अभियोजक हीरा प्रताप सिंह ने कहा,
“इस मामले में सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से कुल 11 गवाहों की गवाही कराई गई थी। अदालत में प्रस्तुत साक्ष्य एवं गवाहों के बयान के आधार पर एडीजे-7 अरविंद ने अभियुक्त बलिराम सिंह को घटना का दोषी पाया और ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए फांसी की सजा मुकर्रर की।”
पीड़ित परिवार ने अदालत के फैसले पर संतोष जताया है। वहीं कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला बच्चों के खिलाफ होने वाले जघन्य अपराधों पर न्यायपालिका के सख्त रुख का बड़ा उदाहरण है।


