
समस्तीपुर: रेलवे के तत्काल टिकट सिस्टम में सेंध लगाकर करोड़ों के अवैध कारोबार को अंजाम देने वाले एक अंतरराज्यीय गिरोह का बड़ा खुलासा हुआ है। समस्तीपुर जंक्शन पर पवन एक्सप्रेस में टिकट जांच के दौरान चार यात्रियों के पास संदिग्ध और टेंपरिंग किए गए टिकट मिलने के बाद पूरे रैकेट का पर्दाफाश हुआ। मामले की जांच अब रेलवे सुरक्षा बल (RPF) ने शुरू कर दी है और गिरोह के मास्टरमाइंड की तलाश तेज कर दी गई है।
टीटीई की सतर्कता से खुला फर्जीवाड़ा
पवन एक्सप्रेस में नियमित टिकट जांच के दौरान टीटीई को चार यात्रियों के टिकटों पर ओवरराइटिंग और छेड़छाड़ के निशान मिले। संदेह होने पर यात्रियों से पूछताछ की गई और बाद में उन्हें समस्तीपुर आरपीएफ पोस्ट के हवाले कर दिया गया। पकड़े गए यात्रियों में दो पुरुष और दो महिलाएं शामिल हैं।
9,300 रुपये का टिकट 22 हजार में खरीदा
पूछताछ में मधुबनी निवासी यात्री मनीष कुमार ने बताया कि उन्होंने मुंबई जाने के लिए 9,300 रुपये का तत्काल टिकट 22,000 रुपये में खरीदा था। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि टिकट उन्हें मधुबनी निवासी कथित टिकट दलाल गुड्डू कुमार ने उपलब्ध कराया था।
मध्य प्रदेश से जुड़े मिले गिरोह के तार
जांच में सामने आया है कि इस अवैध टिकट नेटवर्क की जड़ें मध्य प्रदेश तक फैली हुई हैं। गिरोह के सदस्य वहां के विभिन्न रेलवे स्टेशनों से तत्काल काउंटर टिकट बुक कराते थे। इसके बाद टिकट बिहार लाकर जरूरतमंद यात्रियों को कई गुना अधिक कीमत पर बेच दिए जाते थे।
अब आरपीएफ मध्य प्रदेश पुलिस और रेलवे अधिकारियों के साथ समन्वय कर पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी है।
व्हाइटनर से मिटाई जाती थी टिकट की पहचान
जांच में यह भी खुलासा हुआ कि गिरोह टिकट की वास्तविक पहचान छिपाने के लिए बेहद शातिर तरीका अपनाता था। टिकट के निचले हिस्से में छपे स्टेशन के नाम पर व्हाइटनर या वाटरमार्क लगाकर उसे मिटा दिया जाता था, ताकि यह पता न चल सके कि टिकट किस काउंटर से जारी हुआ है। टीटीई ने इसी गड़बड़ी को पकड़कर पूरे फर्जीवाड़े का खुलासा किया।
RPF ने शुरू की बड़ी कार्रवाई
आरपीएफ ने मामले में प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश करने और मुख्य सरगना तक पहुंचने के लिए विशेष टीमें बनाई गई हैं। इस मामले के बाद समस्तीपुर रेल मंडल का वाणिज्य विभाग भी अलर्ट मोड में आ गया है।
समस्तीपुर आरपीएफ इंस्पेक्टर अविनाश करोसिया ने कहा,
“मुख्य सरगना की गिरफ्तारी के लिए दो से तीन टीमें गठित की गई हैं। समस्तीपुर रेल डिवीजन के वरिष्ठ मंडल सुरक्षा आयुक्त स्वयं पूरे मामले की निगरानी कर रहे हैं।”
रेलवे अधिकारियों का मानना है कि जांच आगे बढ़ने के साथ इस अंतरराज्यीय टिकट माफिया नेटवर्क से जुड़े कई और बड़े खुलासे हो सकते हैं।


