
भागलपुर: भागलपुर के चर्चित काजवलीचक विस्फोट मामले में अदालत द्वारा दो आरोपितों को दोषी ठहराए जाने के बाद जांच से जुड़े कई महत्वपूर्ण तथ्य फिर चर्चा में हैं। पुलिस जांच में सामने आया था कि मुख्य आरोपित मोहम्मद आजाद ने काजवलीचक स्थित मकान अवैध पटाखा निर्माण और भंडारण के लिए किराये पर लिया था। इसी मकान में विस्फोटक सामग्री रखकर पटाखा बनाने का काम चल रहा था, जिसके कारण 3 मार्च 2022 की रात भीषण धमाका हुआ और पूरा मकान मलबे में तब्दील हो गया।
जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि मकान को लीलावती देवी किराये पर चलाती थीं। आरोप है कि मोहम्मद आजाद अवैध पटाखा कारोबार में लीलावती की मदद करता था। विस्फोट में लीलावती देवी, उनकी दो बेटियों तथा नाती-नतिनी सहित परिवार के कई सदस्यों की मौत हो गई थी। पड़ोस में रहने वाले महेंद्र मंडल के परिवार के सदस्य भी इस हादसे की चपेट में आ गए, जिसमें कई लोगों की जान चली गई और एक सदस्य गंभीर रूप से घायल हुआ था।
घटना के बाद स्थानीय पुलिस के साथ एटीएस, एफएसएल और अन्य जांच एजेंसियों ने मौके का निरीक्षण किया। शुरुआती जांच में आतंकवादी घटना की आशंका भी जताई गई थी, लेकिन बाद की जांच में यह स्पष्ट हुआ कि विस्फोट अवैध रूप से संचालित पटाखा फैक्ट्री में रखे विस्फोटक पदार्थों के कारण हुआ था। पुलिस ने पश्चिम बंगाल तक छापेमारी कर विस्फोटक सामग्री की आपूर्ति और नेटवर्क की जांच की।
जांच एजेंसियों ने यह भी पाया कि मकान में बड़े पैमाने पर पटाखा निर्माण के लिए विस्फोटक सामग्री रखी गई थी। धमाका इतना शक्तिशाली था कि तीन मंजिला इमारत पूरी तरह ध्वस्त हो गई और आसपास के कई मकानों को भी नुकसान पहुंचा। मलबा हटाने का काम कई घंटों तक चला, जिसके बाद मृतकों के शव निकाले जा सके।
इस मामले में पुलिस ने पांच आरोपितों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया था। हाल ही में अदालत ने मोहम्मद आजाद और नवीन मंडल को दोषी करार दिया है। वहीं, साक्ष्यों के अभाव में तीन अन्य आरोपितों को बरी कर दिया गया। अब 20 जुलाई को अदालत दोषी ठहराए गए आरोपितों की सजा पर सुनवाई करेगी।
गौरतलब है कि काजवलीचक विस्फोट भागलपुर की सबसे दर्दनाक घटनाओं में से एक माना जाता है। इस हादसे में कुल 15 लोगों की मौत हुई थी, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल थे। घटना के बाद अवैध पटाखा निर्माण और विस्फोटक पदार्थों के भंडारण को लेकर प्रशासन ने व्यापक अभियान चलाया था। अब अदालत के फैसले के बाद इस बहुचर्चित मामले में न्यायिक प्रक्रिया अपने अंतिम चरण की ओर बढ़ रही है।


