बूथ पर बांट रहे थे पर्चियां, तभी आया दिल्ली से फोन… मिनटों में बदल गई किस्मत, BJP ने नीरज सिन्हा को बनाया बांकीपुर का उम्मीदवार

पटना: बिहार की राजनीति में शुक्रवार का दिन बेहद नाटकीय रहा। बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने अंतिम समय में उम्मीदवार बदलकर सभी को चौंका दिया। सबसे दिलचस्प बात यह रही कि भाजपा के नए उम्मीदवार नीरज कुमार सिन्हा को खुद भी इस फैसले की भनक नहीं थी। वह उस समय चुनावी अभियान में एक सामान्य कार्यकर्ता की तरह बूथ पर मतदाताओं को पर्चियां बांट रहे थे, जब अचानक उनकी राजनीतिक जिंदगी ने नया मोड़ ले लिया।

बूथ से सीधे प्रदेश कार्यालय का बुलावा

सूत्रों के अनुसार, नीरज कुमार सिन्हा कार्यकर्ताओं के साथ चुनाव प्रचार में जुटे थे और बूथ स्तर पर मतदाताओं को पर्चियां वितरित कर रहे थे। इसी दौरान उनके मोबाइल पर पार्टी नेतृत्व का फोन आया। उन्हें तुरंत पटना स्थित भाजपा प्रदेश कार्यालय पहुंचने के लिए कहा गया।

शुरुआत में उन्हें लगा कि संगठन से जुड़ा कोई सामान्य निर्देश होगा, लेकिन जब वे प्रदेश कार्यालय पहुंचे तो उन्हें बताया गया कि पार्टी ने उन्हें बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव का आधिकारिक उम्मीदवार घोषित कर दिया है।

यह फैसला इतना अचानक था कि न केवल नीरज कुमार सिन्हा, बल्कि वहां मौजूद कई भाजपा कार्यकर्ता भी हैरान रह गए। कुछ मिनट पहले तक जो नेता दूसरे उम्मीदवार के लिए चुनाव प्रचार कर रहे थे, वही अचानक पार्टी के चेहरे के रूप में सामने आ गए।

टिकट मिलने के बाद क्या बोले नीरज सिन्हा?

उम्मीदवार घोषित किए जाने के बाद नीरज कुमार सिन्हा ने भाजपा के केंद्रीय और प्रदेश नेतृत्व का आभार व्यक्त किया।

उन्होंने कहा कि उन्होंने कभी कल्पना भी नहीं की थी कि इतनी बड़ी जिम्मेदारी अचानक उनके कंधों पर आ जाएगी। उनके अनुसार भाजपा ऐसा संगठन है, जहां एक सामान्य कार्यकर्ता को भी मेहनत, समर्पण और संगठन के प्रति निष्ठा के आधार पर बड़ा अवसर मिल सकता है।

उन्होंने कहा कि पार्टी ने उन पर जो भरोसा जताया है, उस पर वे पूरी तरह खरा उतरने का प्रयास करेंगे और बांकीपुर की जनता का विश्वास जीतकर भाजपा को जीत दिलाने की कोशिश करेंगे।

प्रदेश कार्यालय में हुआ जोरदार स्वागत

उम्मीदवारी की घोषणा के बाद भाजपा प्रदेश कार्यालय में नीरज कुमार सिन्हा का भव्य स्वागत किया गया। कार्यकर्ताओं ने उन्हें फूल-मालाएं पहनाईं, मिठाई खिलाई और जोरदार नारे लगाए।

“भारतीय जनता पार्टी जिंदाबाद” और “नीरज कुमार सिन्हा जिंदाबाद” के नारों से प्रदेश कार्यालय का माहौल गूंज उठा। वरिष्ठ नेताओं ने भी उन्हें शुभकामनाएं देते हुए चुनाव में पूरी ताकत से जुटने का भरोसा दिलाया।

आखिर क्यों बदला गया उम्मीदवार?

बांकीपुर सीट से भाजपा ने पहले अभिषेक कुमार सिन्हा उर्फ बंटी को उम्मीदवार बनाया था। उन्होंने नामांकन भी दाखिल कर दिया था, लेकिन अगले ही दिन पारिवारिक कारणों का हवाला देते हुए चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया।

इसके बाद भाजपा नेतृत्व के सामने नए उम्मीदवार के चयन की चुनौती खड़ी हो गई। पार्टी ने तत्काल संगठन स्तर पर मंथन किया और लंबे समय से सक्रिय कार्यकर्ता नीरज कुमार सिन्हा के नाम पर सहमति बनाई।

पार्टी का मानना है कि नीरज सिन्हा की संगठन में मजबूत पकड़, कार्यकर्ताओं से बेहतर तालमेल और क्षेत्र में लगातार सक्रियता उन्हें इस चुनाव के लिए उपयुक्त उम्मीदवार बनाती है।

कौन हैं नीरज कुमार सिन्हा?

नीरज कुमार सिन्हा भाजपा के पुराने और समर्पित कार्यकर्ताओं में गिने जाते हैं। उन्होंने संगठन में बूथ स्तर से लेकर विभिन्न जिम्मेदारियों का निर्वहन किया है और लंबे समय से पार्टी के कार्यक्रमों में सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं।

स्थानीय स्तर पर उनकी अच्छी पहचान है और संगठन के साथ-साथ आम लोगों के बीच भी उनकी सक्रिय मौजूदगी रही है। यही वजह है कि अंतिम समय में पार्टी ने उन पर भरोसा जताया।

अब जल्द दाखिल करेंगे नामांकन

उम्मीदवार घोषित होने के बाद नीरज कुमार सिन्हा जल्द ही अपना नामांकन दाखिल करेंगे। भाजपा ने भी बांकीपुर में चुनाव प्रचार को नई गति देने की तैयारी शुरू कर दी है।

पार्टी का कहना है कि उम्मीदवार बदलने के बावजूद सभी कार्यकर्ता पूरी एकजुटता के साथ चुनाव मैदान में उतरेंगे और भाजपा की जीत सुनिश्चित करने के लिए पूरी ताकत लगाएंगे।

बिहार की राजनीति में चर्चा का विषय बना घटनाक्रम

बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में अंतिम समय पर उम्मीदवार बदलने का फैसला अब पूरे बिहार की राजनीति में चर्चा का विषय बन गया है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा ने संगठन के एक पुराने कार्यकर्ता को मौका देकर यह संदेश देने की कोशिश की है कि पार्टी में जमीनी स्तर पर काम करने वाले कार्यकर्ताओं के लिए भी बड़े अवसर मौजूद हैं।

अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि नीरज कुमार सिन्हा चुनावी मैदान में किस तरह अपनी रणनीति तैयार करते हैं और बांकीपुर की जनता उन्हें कितना समर्थन देती है।

बूथ पर पर्चियां बांटते-बांटते अचानक विधानसभा चुनाव का उम्मीदवार बन जाने की यह कहानी फिलहाल बिहार की राजनीति की सबसे चर्चित घटनाओं में शामिल हो गई है।

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