पीरपैंती में बाल विवाह रोकथाम पर प्रशासन सख्त, जनप्रतिनिधियों से लेकर धर्मगुरुओं तक ने लिया जागरूकता का संकल्प

भागलपुर: बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीति पर प्रभावी रोक लगाने और समाज में व्यापक जनजागरूकता फैलाने के उद्देश्य से भागलपुर जिले के पीरपैंती प्रखंड मुख्यालय स्थित ट्रायसम भवन में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। अनुमंडल पदाधिकारी कृष्ण चंद्र गुप्ता की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में प्रशासनिक अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों, शिक्षा विभाग, स्वास्थ्य विभाग, जीविका समूह, पंचायत प्रतिनिधियों, धर्मगुरुओं और विवाह से जुड़े विभिन्न संस्थानों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। बैठक का मुख्य उद्देश्य बाल विवाह निषेध कानून का प्रभावी पालन सुनिश्चित करना और समाज के सभी वर्गों की भागीदारी से बाल विवाह मुक्त वातावरण तैयार करना था।

बैठक का आयोजन प्रखंड विकास पदाधिकारी अभिमन्यु कुमार के निर्देश पर किया गया। इसमें प्रखंड और पंचायत स्तर के सभी संबंधित अधिकारियों को आमंत्रित किया गया था, ताकि बाल विवाह रोकथाम के लिए एक समन्वित कार्ययोजना तैयार की जा सके। प्रशासन का मानना है कि केवल सरकारी प्रयासों से इस सामाजिक बुराई को समाप्त नहीं किया जा सकता, बल्कि समाज के हर वर्ग की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है।

बैठक में प्रखंड प्रमुख रश्मि कुमारी, पंचायत समिति सदस्य, सभी पंचायतों के मुखिया, सरपंच, पंचायत सचिव, थाना प्रभारी, प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी निलेश कुमार, चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. छोटे लाल, कल्याण विभाग के अधिकारी, जीविका के पदाधिकारी जाहिद इमाम, महिला पर्यवेक्षिकाएं, विकास मित्र, जीविका के सीएलएफ अध्यक्ष, दीदियां, काजी, पुजारी, डीजे संचालक और विवाह भवन संचालक सहित बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे। प्रशासन ने इस बैठक को समाज के विभिन्न वर्गों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बताया।

बैठक को संबोधित करते हुए अनुमंडल पदाधिकारी कृष्ण चंद्र गुप्ता ने कहा कि बाल विवाह केवल एक कानूनी अपराध नहीं, बल्कि समाज की प्रगति में सबसे बड़ी बाधाओं में से एक है। उन्होंने कहा कि कम उम्र में विवाह होने से बच्चों का शारीरिक, मानसिक और शैक्षणिक विकास प्रभावित होता है। विशेष रूप से बालिकाओं को शिक्षा से वंचित होना पड़ता है और उनके स्वास्थ्य पर भी गंभीर प्रभाव पड़ता है। इसलिए बाल विवाह को रोकना केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे समाज का सामूहिक दायित्व है।

उन्होंने सभी अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से अपने-अपने क्षेत्रों में लगातार जागरूकता अभियान चलाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि गांव-गांव जाकर लोगों को बाल विवाह के दुष्परिणामों और कानूनी प्रावधानों की जानकारी दी जानी चाहिए। यदि कहीं भी कम उम्र में विवाह होने की सूचना मिले तो तत्काल प्रशासन को इसकी जानकारी दी जाए, ताकि समय रहते आवश्यक कार्रवाई की जा सके।

बैठक के दौरान बाल विवाह निषेध अधिनियम के विभिन्न प्रावधानों की भी विस्तार से जानकारी दी गई। अधिकारियों ने बताया कि कानून के अनुसार निर्धारित आयु से पहले विवाह कराना दंडनीय अपराध है। यदि कोई व्यक्ति बाल विवाह कराता है, उसमें सहयोग करता है या उसकी व्यवस्था करता है, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। प्रशासन ने सभी उपस्थित लोगों से कानून का पूरी तरह पालन कराने में सहयोग देने की अपील की।

बैठक में धर्मगुरुओं की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया गया। काजी, पुजारी और अन्य धार्मिक प्रतिनिधियों से आग्रह किया गया कि वे विवाह संपन्न कराने से पहले वर और वधू की आयु की पुष्टि अवश्य करें। यदि किसी विवाह में बाल विवाह की आशंका हो तो उसकी सूचना तुरंत प्रशासन को दें। अधिकारियों ने कहा कि धार्मिक और सामाजिक नेतृत्व की सकारात्मक भूमिका इस अभियान को सफल बनाने में काफी मददगार साबित होगी।

विवाह भवन संचालकों और डीजे संचालकों को भी इस अभियान से जोड़ा गया। प्रशासन ने उनसे कहा कि यदि किसी विवाह समारोह में बाल विवाह होने की जानकारी मिले तो वे इसकी सूचना संबंधित अधिकारियों को दें। इससे बाल विवाह की घटनाओं को समय रहते रोका जा सकेगा। अधिकारियों ने कहा कि समाज के प्रत्येक वर्ग का सहयोग मिलने पर इस सामाजिक कुरीति को समाप्त करना संभव होगा।

शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने बैठक में कहा कि विद्यालय स्तर पर भी विद्यार्थियों और अभिभावकों के बीच जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। स्कूलों में विशेष कार्यक्रम आयोजित कर बच्चों को शिक्षा के महत्व और बाल विवाह के दुष्परिणामों की जानकारी दी जाएगी। स्वास्थ्य विभाग के प्रतिनिधियों ने भी बताया कि कम उम्र में विवाह और गर्भधारण से किशोरियों के स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ता है, इसलिए इस विषय पर लोगों को लगातार जागरूक करना आवश्यक है।

जीविका समूहों की महिलाओं और विकास मित्रों से भी गांव स्तर पर अभियान चलाने की अपील की गई। अधिकारियों ने कहा कि ये समूह सीधे ग्रामीण परिवारों से जुड़े रहते हैं और समाज में जागरूकता फैलाने में उनकी भूमिका काफी प्रभावी हो सकती है। पंचायत प्रतिनिधियों से भी कहा गया कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में बाल विवाह रोकथाम के लिए निगरानी तंत्र को मजबूत करें।

बैठक के दौरान यह निर्णय लिया गया कि बाल विवाह रोकने के लिए प्रशासन, पंचायत प्रतिनिधियों, शिक्षा विभाग, स्वास्थ्य विभाग और सामाजिक संगठनों के बीच नियमित समन्वय स्थापित किया जाएगा। किसी भी संदिग्ध मामले की सूचना मिलते ही त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। इसके अलावा पंचायत स्तर पर जागरूकता शिविर, रैलियां और संवाद कार्यक्रम आयोजित करने की भी योजना बनाई गई।

बैठक की शुरुआत में सभी उपस्थित लोगों ने सामूहिक रूप से बाल विवाह मुक्त समाज बनाने का संकल्प लिया। सभी ने यह वादा किया कि वे अपने-अपने स्तर पर इस सामाजिक बुराई को समाप्त करने के लिए सक्रिय भूमिका निभाएंगे और किसी भी बाल विवाह की सूचना मिलने पर प्रशासन को तुरंत अवगत कराएंगे।

प्रशासन का मानना है कि बाल विवाह के खिलाफ केवल कानून बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि समाज की सोच में बदलाव लाना भी जरूरी है। जब तक लोग स्वयं इस कुप्रथा के खिलाफ आगे नहीं आएंगे, तब तक इसे पूरी तरह समाप्त करना कठिन होगा। इसलिए जागरूकता, शिक्षा और सामाजिक सहभागिता पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

पीरपैंती में आयोजित यह बैठक बाल विवाह रोकथाम अभियान को नई दिशा देने वाली महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है। प्रशासन को उम्मीद है कि पंचायत प्रतिनिधियों, सरकारी विभागों, धार्मिक नेताओं, जीविका समूहों और आम नागरिकों के सहयोग से बाल विवाह की घटनाओं में कमी आएगी और समाज में शिक्षा, स्वास्थ्य तथा महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा मिलेगा। आने वाले समय में इस तरह की बैठकों और जागरूकता अभियानों को और व्यापक स्तर पर आयोजित करने की भी तैयारी की जा रही है।

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