
पटना/बिहारशरीफ: बिहार सरकार ने हर ग्रामीण परिवार से सालाना ₹1,200 पंचायत टैक्स वसूले जाने की चर्चाओं पर स्थिति स्पष्ट कर दी है। पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश ने साफ कहा कि राज्य सरकार आम लोगों पर किसी भी प्रकार का अतिरिक्त आर्थिक बोझ नहीं डालेगी और फिलहाल ऐसा कोई टैक्स लागू करने का निर्णय नहीं लिया गया है।
शुक्रवार को नालंदा के बिहारशरीफ स्थित सर्किट हाउस में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में मंत्री ने बताया कि पंचायतों की आय बढ़ाने को लेकर 16वें वित्त आयोग ने पेयजल, साफ-सफाई जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए प्रत्येक ग्रामीण परिवार से सालाना ₹1,200 शुल्क लेने का सुझाव दिया था। हालांकि बिहार सरकार इस व्यवस्था से सहमत नहीं है।

सरकार का साफ संदेश—ग्रामीणों पर नहीं पड़ेगा बोझ
दीपक प्रकाश ने कहा कि बिहार सरकार का स्पष्ट मत है कि राज्य के ग्रामीण परिवारों पर किसी प्रकार का नया कर लगाना उचित नहीं होगा। उन्होंने कहा कि सरकार ने इस संबंध में अपनी आपत्ति केंद्र सरकार और संबंधित मंत्रालय के समक्ष दर्ज करा दी है तथा बिहार की आर्थिक परिस्थितियों का हवाला देते हुए शुरुआती दौर में इस व्यवस्था से राज्य को छूट देने की मांग की है।
पंचायतों की आय बढ़ाने के लिए होंगे वैकल्पिक उपाय
मंत्री ने बताया कि पंचायतों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए सरकार दूसरे विकल्पों पर काम कर रही है। पंचायतों की खाली सरकारी जमीन का बेहतर उपयोग कर तालाब विकसित करने, मत्स्य पालन और अन्य आय सृजन गतिविधियों को बढ़ावा देने की योजना बनाई जा रही है। इससे पंचायतों की आय भी बढ़ेगी और ग्रामीणों पर किसी तरह का अतिरिक्त आर्थिक बोझ भी नहीं पड़ेगा।
उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य पंचायतों को आत्मनिर्भर बनाना है, लेकिन यह काम जनता पर नया टैक्स लगाए बिना किया जाएगा।


