बिहार में बाढ़ को लेकर सरकार हाई अलर्ट पर, उपमुख्यमंत्री ने तटबंधों की निगरानी, रात्रि निरीक्षण और एक सप्ताह में सभी तैयारी पूरी करने के दिए निर्देश

बिहार में संभावित बाढ़ 2026 को लेकर राज्य सरकार ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। मानसून के सक्रिय होने और कई नदियों के जलस्तर में धीरे-धीरे बढ़ोतरी की संभावना को देखते हुए जल संसाधन विभाग ने बाढ़ सुरक्षा से जुड़े सभी कार्यों की व्यापक समीक्षा की है। उपमुख्यमंत्री एवं जल संसाधन विभाग के प्रभारी विजय कुमार चौधरी ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया है कि बाढ़ से जुड़ी सभी तैयारियां एक सप्ताह के भीतर हर हाल में पूरी कर ली जाएं। उन्होंने तटबंधों की चौबीसों घंटे निगरानी, रात्रिकालीन औचक निरीक्षण, संवेदनशील क्षेत्रों में पर्याप्त संसाधनों की उपलब्धता और लापरवाही पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए।

पटना स्थित सिंचाई भवन के सभागार में आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में राज्य के सभी बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों की तैयारियों का विस्तार से आकलन किया गया। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से विभिन्न बाढ़ परिक्षेत्रों के मुख्य अभियंताओं ने अपने-अपने क्षेत्रों की वर्तमान स्थिति, कटाव निरोधक कार्यों की प्रगति और आपदा प्रबंधन की तैयारियों की जानकारी दी। बैठक का उद्देश्य संभावित बाढ़ की स्थिति से पहले सभी आवश्यक व्यवस्थाओं को अंतिम रूप देना था ताकि किसी भी आपात स्थिति में त्वरित कार्रवाई की जा सके।

समीक्षा के दौरान उपमुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य अब बाढ़ के मौसम में प्रवेश कर चुका है और इस समय किसी भी प्रकार की लापरवाही की कोई गुंजाइश नहीं है। उन्होंने कहा कि कटाव निरोधक योजनाओं को वर्ष की शुरुआत में ही स्वीकृति इसलिए दी गई थी ताकि मानसून के चरम पर पहुंचने से पहले सभी कार्य पूरे हो जाएं। अधिकारियों ने जानकारी दी कि अधिकांश स्थानों पर कटाव निरोधक कार्य पूरे हो चुके हैं, जबकि कुछ स्थानों पर कार्य अंतिम चरण में है। इस पर उपमुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि सभी शेष कार्य एक सप्ताह के भीतर हर हाल में पूरे किए जाएं।

बैठक में तटबंधों की निगरानी व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने पर विशेष जोर दिया गया। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि मुख्यालय स्तर से विभागीय अधिकारी लगातार फील्ड की स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और वरिष्ठ अभियंता नियमित रूप से विभिन्न तटबंधों का निरीक्षण कर रहे हैं। इसके साथ ही क्षेत्रीय अधिकारियों को भी निर्देश दिया गया कि वे तटबंधों के अंतिम छोर तक नियमित निरीक्षण करें और नदियों के जलस्तर में होने वाले प्रत्येक बदलाव पर लगातार निगरानी रखें।

उन्होंने सभी मुख्य अभियंताओं को निर्देश दिया कि वे प्रत्येक सप्ताह कम-से-कम दो बार रात्रि के समय औचक निरीक्षण करें। इन निरीक्षणों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होगा कि संबंधित अभियंता, तकनीकी कर्मचारी और श्रमिक निर्धारित स्थलों पर मौजूद रहें तथा बाढ़ संघर्षात्मक कार्यों के लिए बनाए गए कैंप पूरी तरह सक्रिय हों। उन्होंने कहा कि केवल कागजी समीक्षा पर्याप्त नहीं होगी, बल्कि अधिकारियों को स्वयं मौके पर जाकर तैयारियों की वास्तविक स्थिति का आकलन करना होगा।

उपमुख्यमंत्री ने संवेदनशील और अतिसंवेदनशील तटबंधों पर विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि ऐसे स्थानों पर आवश्यक सामग्री पहले से पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध कराई जाए ताकि आपात स्थिति आने पर किसी प्रकार की देरी न हो। अधिकारियों से कहा गया कि नदी में अधिक जल प्रवाह शुरू होने का इंतजार करने के बजाय अभी से सभी संवेदनशील क्षेत्रों में बालू की बोरियां, बोल्डर, जियोटेक्सटाइल सामग्री और अन्य आवश्यक संसाधनों का भंडारण सुनिश्चित किया जाए।

बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि एक सप्ताह बाद मुख्यालय और जिला प्रशासन की संयुक्त टीम विभिन्न स्थलों का निरीक्षण करेगी और वहां उपलब्ध संसाधनों तथा तैयारियों का भौतिक सत्यापन करेगी। इसके लिए सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि वे जिला प्रशासन के साथ समन्वय बनाए रखें और सभी आवश्यक आंकड़े तथा जानकारी समय पर साझा करें।

उपमुख्यमंत्री ने कहा कि तटबंधों की सुरक्षा केवल मरम्मत कार्यों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सभी संवेदनशील स्थलों पर पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था सुनिश्चित की जाए ताकि रात के समय भी निगरानी में किसी प्रकार की परेशानी न हो। इसके अलावा आपातकालीन स्थिति में राहत सामग्री और मशीनरी तुरंत पहुंच सके, इसके लिए तटबंधों तक जाने वाले सभी संपर्क मार्गों को पहले से दुरुस्त रखने के निर्देश भी दिए गए।

समीक्षा बैठक में तटबंधों पर अतिक्रमण की समस्या पर भी चर्चा हुई। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि यदि किसी तटबंध पर अवैध अतिक्रमण पाया जाता है तो संबंधित अधिकारी तुरंत जिला प्रशासन के साथ समन्वय स्थापित कर आवश्यक कार्रवाई करें। उनका कहना था कि तटबंधों की सुरक्षा में किसी भी प्रकार की बाधा को गंभीरता से लिया जाएगा क्योंकि इससे बाढ़ के समय बड़े नुकसान की आशंका बढ़ सकती है।

उन्होंने वर्षा के दौरान दिखाई नहीं देने वाले रैट होल्स और फॉक्स होल्स की समय रहते मरम्मत कराने के निर्देश भी दिए। अधिकारियों से कहा गया कि इन छोटे-छोटे तकनीकी दोषों को नजरअंदाज नहीं किया जाए क्योंकि बाढ़ के दौरान यही कमजोर स्थान बड़े खतरे का कारण बन सकते हैं। सभी अभियंताओं को निर्देश दिया गया कि ऐसे स्थानों की पहचान कर शीघ्र मरम्मत सुनिश्चित करें।

उपमुख्यमंत्री ने कहा कि बाढ़ प्रबंधन केवल विभागीय जिम्मेदारी नहीं बल्कि पूरी प्रशासनिक व्यवस्था की परीक्षा है। यदि सभी अधिकारी पूरी ईमानदारी, सतर्कता और समन्वय के साथ कार्य करेंगे तो किसी भी संभावित आपदा का प्रभावी ढंग से सामना किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि उत्कृष्ट कार्य करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों को प्रोत्साहित किया जाएगा, जबकि जानबूझकर लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।

बैठक के दौरान जल संसाधन विभाग के सचिव डॉ. चंद्रशेखर सिंह ने भी अधिकारियों को मौसम विभाग के पूर्वानुमानों पर लगातार नजर रखने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि केवल जलस्तर बढ़ने के बाद सक्रिय होने की बजाय पहले से पूरी तैयारी के साथ कार्य करना आवश्यक है। सभी अधिकारियों को चौबीसों घंटे सतर्क रहने और किसी भी आपात स्थिति में तत्काल कार्रवाई के लिए तैयार रहने को कहा गया।

उन्होंने यह भी कहा कि जिला प्रशासन, आपदा प्रबंधन विभाग और जल संसाधन विभाग के बीच बेहतर समन्वय बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। बाढ़ की संभावित स्थिति में त्वरित निर्णय और संसाधनों की समय पर उपलब्धता ही नुकसान को कम करने में सबसे प्रभावी साबित होगी। इसलिए सभी संबंधित एजेंसियों के बीच लगातार संवाद बनाए रखने पर जोर दिया गया।

बैठक में विभाग के तकनीकी विशेषज्ञों और वरिष्ठ अभियंताओं ने भी विभिन्न परियोजनाओं की प्रगति की जानकारी दी तथा बाढ़ सुरक्षा से जुड़े तकनीकी पहलुओं पर चर्चा की। अधिकारियों ने बताया कि कई संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त निगरानी व्यवस्था पहले ही शुरू कर दी गई है और जलस्तर में होने वाले बदलाव की लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है।

राज्य सरकार का मानना है कि समय पर की गई तैयारियां संभावित बाढ़ से होने वाले नुकसान को काफी हद तक कम कर सकती हैं। इसी उद्देश्य से तटबंधों की मजबूती, कटाव निरोधक कार्यों की गुणवत्ता, संसाधनों की उपलब्धता और अधिकारियों की जवाबदेही पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। आने वाले दिनों में मानसून की गतिविधियों और नदियों के जलस्तर के अनुसार विभाग लगातार स्थिति की समीक्षा करता रहेगा, ताकि किसी भी चुनौती का समय रहते प्रभावी ढंग से सामना किया जा सके।

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