
भागलपुर जिले के कहलगांव अनुमंडल में बेटियों के सशक्तिकरण और बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीतियों के उन्मूलन की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल शुरू की जा रही है। विश्व जनसंख्या दिवस के अवसर पर अनुमंडल प्रशासन ने “शक्ति संवाद” नाम से एक विशेष अभियान की शुरुआत करने का निर्णय लिया है। यह अभियान केवल एक औपचारिक कार्यक्रम तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसे संस्थागत स्वरूप देते हुए अनुमंडल के सभी 84 उच्च माध्यमिक विद्यालयों में प्रत्येक माह नियमित रूप से आयोजित किया जाएगा। प्रशासन का उद्देश्य छात्राओं को सुरक्षित वातावरण, सही मार्गदर्शन और जीवन से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों की जानकारी उपलब्ध कराकर उन्हें आत्मनिर्भर और जागरूक बनाना है।
इस अभियान का उद्घाटन कहलगांव स्थित शारदा पाठशाला में जिला पदाधिकारी की उपस्थिति में किया जाएगा। उद्घाटन समारोह के साथ ही “शक्ति संवाद” अभियान की औपचारिक शुरुआत होगी, जिसके बाद यह कार्यक्रम अनुमंडल के सभी 84 उच्च माध्यमिक विद्यालयों में प्रत्येक महीने के अंतिम शनिवार को आयोजित किया जाएगा। यदि अंतिम शनिवार को अवकाश रहेगा तो कार्यक्रम उससे पहले के कार्य दिवस पर आयोजित किया जाएगा, ताकि इसकी निरंतरता बनी रहे।
प्रशासन के अनुसार “शक्ति संवाद” का उद्देश्य केवल छात्राओं को जानकारी देना नहीं, बल्कि उनके साथ खुला संवाद स्थापित करना है। प्रत्येक विद्यालय में एक महिला पदाधिकारी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगी और छात्राओं से सीधे बातचीत करेंगी। इस दौरान छात्राएं बिना किसी झिझक के अपनी समस्याएं, सवाल और भविष्य से जुड़े विचार साझा कर सकेंगी। प्रशासन का मानना है कि संवाद की यह प्रक्रिया छात्राओं में आत्मविश्वास बढ़ाने और उन्हें सही दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
कार्यक्रम के दौरान जीवन से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। इनमें बाल विवाह की रोकथाम, मासिक धर्म स्वच्छता, एनीमिया से बचाव, संतुलित पोषण, मानसिक स्वास्थ्य, लैंगिक समानता, महिला अधिकार, साइबर सुरक्षा, सुरक्षित व्यवहार, करियर मार्गदर्शन, कौशल विकास और आर्थिक सशक्तिकरण जैसे विषय प्रमुख होंगे। विशेषज्ञों और महिला अधिकारियों द्वारा इन विषयों पर सरल भाषा में जानकारी दी जाएगी, ताकि छात्राएं अपने अधिकारों और जिम्मेदारियों को बेहतर ढंग से समझ सकें।
स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता को भी इस अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया है। कार्यक्रम के दौरान छात्राओं को आयरन और फोलिक एसिड (आईएफए) की गोलियां उपलब्ध कराई जाएंगी। साथ ही उनका हीमोग्लोबिन परीक्षण भी कराया जाएगा, ताकि एनीमिया जैसी समस्या की समय रहते पहचान हो सके। स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से संतुलित आहार, पोषण और नियमित स्वास्थ्य जांच के महत्व पर भी विशेष जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। प्रशासन का मानना है कि स्वस्थ और शिक्षित बेटी ही समाज के बेहतर भविष्य की आधारशिला बन सकती है।
“शक्ति संवाद” अभियान की शुरुआत से पहले व्यापक जनजागरूकता अभियान भी चलाया गया। नौ जुलाई को अनुमंडल के सभी उच्च माध्यमिक विद्यालयों में बाल विवाह उन्मूलन विषय पर चित्रकला प्रतियोगिता आयोजित की गई, जिसमें बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने भाग लिया। प्रतियोगिता के माध्यम से विद्यार्थियों ने बाल विवाह के दुष्परिणामों और बालिकाओं की शिक्षा के महत्व को अपनी कला के जरिए प्रस्तुत किया। उद्घाटन समारोह में प्रतियोगिता के विजेताओं को सम्मानित किया जाएगा।
इसके अलावा 10 जुलाई को विभिन्न विद्यालयों और स्थानीय समुदायों में प्रभात फेरियों का आयोजन किया गया, जिसके माध्यम से लोगों को बाल विवाह रोकने, बेटियों की शिक्षा और महिला सशक्तिकरण के प्रति जागरूक किया गया। अभियान के दौरान छात्र-छात्राएं, शिक्षक और स्थानीय नागरिकों ने समाज से बाल विवाह जैसी कुप्रथा को समाप्त करने का संदेश दिया।
प्रशासन ने इस अभियान को केवल विद्यालयों तक सीमित नहीं रखा है, बल्कि समाज के विभिन्न वर्गों को भी इससे जोड़ने की रणनीति बनाई है। पंचायत प्रतिनिधियों, धार्मिक स्थलों से जुड़े लोगों, विवाह भवन संचालकों, टेंट व्यवसायियों, डीजे संचालकों, कार्ड प्रिंटिंग से जुड़े व्यवसायियों, वाहन संचालकों और अन्य संबंधित हितधारकों के साथ अलग-अलग बैठकें आयोजित की गईं। इन बैठकों में सभी से बाल विवाह नहीं कराने और ऐसी किसी भी घटना की जानकारी प्रशासन को देने का संकल्प लिया गया। इसके लिए संबंधित लोगों से प्रतिज्ञा पत्र और बांड भी भरवाए गए हैं।
जीविका समूहों से जुड़ी महिलाओं की भूमिका को भी इस अभियान में महत्वपूर्ण माना गया है। प्रशासन ने जीविका दीदियों को गांव-गांव जाकर लोगों को जागरूक करने, बाल विवाह की संभावित घटनाओं की जानकारी देने और जरूरत पड़ने पर प्रशासन की मदद करने के लिए प्रेरित किया है। अभियान में उत्कृष्ट कार्य करने वाली जीविका दीदियों को उद्घाटन समारोह में सम्मानित भी किया जाएगा, ताकि अन्य महिलाएं भी इस सामाजिक अभियान से प्रेरित होकर जुड़ सकें।
अभियान के प्रभावी संचालन के लिए प्रशासन ने बहुस्तरीय निगरानी प्रणाली विकसित की है। प्रखंड स्तर पर विभिन्न विभागों के अधिकारियों की संयुक्त समिति गठित की गई है, जो अभियान की नियमित समीक्षा करेगी। वहीं पंचायत स्तर पर पंचायत सचिव, विकास मित्र, जीविका समूह, टोला सेवक, तालीमी मरकज, आंगनबाड़ी सेविका और विद्यालय प्रतिनिधियों को जोड़कर स्थानीय सहायता तंत्र तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य किसी भी संभावित बाल विवाह की सूचना समय रहते प्राप्त करना और तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करना है।
डिजिटल माध्यमों का उपयोग भी इस अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा होगा। प्रत्येक प्रखंड में “शक्ति संवाद” नाम से व्हाट्सएप समूह बनाए जाएंगे, जिनके माध्यम से बाल विवाह से जुड़ी किसी भी सूचना को तुरंत संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाया जाएगा। इससे सूचना के आदान-प्रदान में तेजी आएगी और समय पर आवश्यक कार्रवाई करना संभव होगा।
विद्यालयों में ‘बडी सिस्टम’ भी लागू किया जाएगा। इस व्यवस्था के तहत प्रत्येक छात्रा अपनी सहेली के साथ एक सहयोगी समूह का हिस्सा होगी। यदि किसी छात्रा के बाल विवाह की आशंका होती है तो उसकी सहेली विद्यालय प्रबंधन या प्रशासन को तत्काल सूचना दे सकेगी। प्रशासन का मानना है कि यह व्यवस्था छात्राओं के बीच आपसी विश्वास को मजबूत करेगी और बाल विवाह जैसी घटनाओं को समय रहते रोकने में प्रभावी साबित होगी।
कार्यक्रम के दौरान छात्र-छात्राओं, शिक्षकों, जनप्रतिनिधियों और अन्य उपस्थित लोगों को बाल विवाह के खिलाफ सामूहिक शपथ भी दिलाई जाएगी। इसका उद्देश्य समाज में इस कुरीति के प्रति सामूहिक जिम्मेदारी की भावना विकसित करना है, ताकि बाल विवाह रोकना केवल प्रशासन की जिम्मेदारी न रहकर पूरे समाज का साझा अभियान बन सके।
राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस-5) के आंकड़ों का हवाला देते हुए प्रशासन ने बताया कि बिहार में बड़ी संख्या में लड़कियों का विवाह अभी भी 18 वर्ष से कम आयु में हो जाता है, जो चिंता का विषय है। इसी चुनौती को ध्यान में रखते हुए “शक्ति संवाद” अभियान की परिकल्पना की गई है, ताकि प्रत्येक बेटी को शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा और समान अवसर उपलब्ध कराए जा सकें।
अनुमंडल पदाधिकारी कृष्ण चंद्र गुप्ता ने कहा कि किसी भी समाज का भविष्य उसकी बेटियों की शिक्षा, सुरक्षा और आत्मविश्वास पर निर्भर करता है। उन्होंने कहा कि “शक्ति संवाद” का उद्देश्य ऐसा वातावरण तैयार करना है, जहां प्रत्येक छात्रा बिना किसी डर के अपनी बात रख सके, अपने अधिकारों को समझ सके और अपने सपनों को पूरा करने का आत्मविश्वास हासिल कर सके। उन्होंने कहा कि इस अभियान का लक्ष्य केवल बाल विवाह रोकना नहीं, बल्कि बेटियों के लिए सम्मान, समान अवसर और सशक्त भविष्य का निर्माण करना है। प्रशासन को उम्मीद है कि यह पहल आने वाले समय में सामाजिक परिवर्तन की मजबूत नींव साबित होगी और भागलपुर के साथ-साथ पूरे बिहार के लिए एक प्रेरणादायक मॉडल बनकर उभरेगी।


