
भागलपुर/सुल्तानगंज: विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेला 2026 के शुभारंभ में अब केवल 22 दिन शेष रह गए हैं। ऐसे में भागलपुर जिला प्रशासन ने सुल्तानगंज में मेले की तैयारियों को युद्ध स्तर पर शुरू कर दिया है। लाखों शिवभक्तों और कांवड़ यात्रियों के सुरक्षित, व्यवस्थित और सुविधाजनक प्रवास को ध्यान में रखते हुए नमामि गंगे घाट, अजगैविनाथ गंगा घाट, अजगैविनाथ मंदिर परिसर, कांवड़िया पथ, रेलवे स्टेशन और विभिन्न सार्वजनिक स्थलों पर तेजी से तैयारियां चल रही हैं। प्रशासन का उद्देश्य इस वर्ष मेले को पहले से अधिक सुव्यवस्थित, सुरक्षित और श्रद्धालुओं के लिए सुविधाजनक बनाना है।
हर वर्ष सावन महीने में देश के विभिन्न राज्यों से लाखों श्रद्धालु सुल्तानगंज पहुंचते हैं। यहां गंगा से पवित्र जल भरने के बाद कांवड़िए पैदल यात्रा करते हुए देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ धाम पहुंचकर जलाभिषेक करते हैं। इसी कारण सुल्तानगंज श्रावणी मेला देश के सबसे बड़े धार्मिक आयोजनों में गिना जाता है। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने इस बार भी व्यापक तैयारियां शुरू कर दी हैं।
नमामि गंगे घाट पर सौंदर्यीकरण का कार्य तेजी से किया जा रहा है। घाट परिसर में बैरिकेडिंग लगाई जा रही है ताकि श्रद्धालुओं की आवाजाही व्यवस्थित ढंग से हो सके। विभिन्न स्थानों पर दिशा-निर्देश संबंधी होर्डिंग, सूचना बोर्ड, बैनर और पोस्टर लगाए जा रहे हैं, जिससे बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी का सामना नहीं करना पड़े। घाट क्षेत्र को आकर्षक बनाने के लिए बाबा भोलेनाथ से जुड़ी कलाकृतियों और धार्मिक सजावट का भी कार्य जारी है।
श्रद्धालुओं के स्वागत के लिए बनाए जा रहे उद्घाटन स्थल को भी विशेष रूप से सजाया जा रहा है। इसके अलावा जर्मन हैंगर टेंटों को अंतिम रूप दिया जा रहा है, जहां बड़ी संख्या में कांवड़ यात्रियों के ठहरने की व्यवस्था होगी। प्रशासन का प्रयास है कि श्रद्धालुओं को सुरक्षित, स्वच्छ और सुविधाजनक वातावरण उपलब्ध कराया जाए, ताकि उनकी धार्मिक यात्रा सहज रूप से पूरी हो सके।
इस बार अजगैविनाथ मंदिर परिसर में भी विशेष तैयारियां की जा रही हैं। प्रशासन और मंदिर प्रबंधन श्रद्धालुओं को व्यवस्थित तरीके से जल अर्पित कराने की योजना पर काम कर रहे हैं। मंदिर परिसर में भीड़ प्रबंधन, प्रवेश और निकास मार्ग, सुरक्षा व्यवस्था तथा दर्शन व्यवस्था को लेकर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। श्रद्धालुओं को बिना किसी अव्यवस्था के पूजा-अर्चना करने का अवसर मिले, इसके लिए अलग-अलग व्यवस्थाएं विकसित की जा रही हैं।
जिला प्रशासन ने कांवड़ यात्रियों के लिए अस्थायी आवासीय सुविधाओं को भी प्राथमिकता दी है। जर्मन हैंगर टेंटों में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के रुकने की व्यवस्था की जा रही है। यहां भोजन, विश्राम, स्वच्छ पेयजल, बिजली, शौचालय और अन्य बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने की तैयारी चल रही है। इसके साथ ही श्रद्धालुओं के मनोरंजन और आध्यात्मिक वातावरण को ध्यान में रखते हुए सांस्कृतिक कार्यक्रमों के आयोजन की भी योजना बनाई गई है।
स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर भी व्यापक तैयारियां की जा रही हैं। मेला क्षेत्र में अस्थायी चिकित्सा शिविर स्थापित किए जाएंगे, जहां चिकित्सक, नर्सिंग कर्मी और आवश्यक दवाइयों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी। आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने के लिए एंबुलेंस सेवा और प्राथमिक उपचार केंद्र भी सक्रिय रहेंगे। प्रशासन का उद्देश्य है कि किसी भी स्वास्थ्य संबंधी समस्या का तत्काल समाधान किया जा सके।
सुरक्षा व्यवस्था को भी इस बार विशेष रूप से मजबूत किया जा रहा है। मेला क्षेत्र, घाट, मंदिर परिसर, रेलवे स्टेशन और प्रमुख मार्गों पर पर्याप्त संख्या में पुलिस बल और सुरक्षा कर्मियों की तैनाती की जाएगी। भीड़ नियंत्रण, यातायात प्रबंधन और संवेदनशील स्थानों की निगरानी के लिए विशेष व्यवस्था की जा रही है। आधुनिक निगरानी प्रणाली और कंट्रोल रूम के माध्यम से पूरे मेला क्षेत्र पर नजर रखी जाएगी ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई की जा सके।
रेलवे प्रशासन भी श्रावणी मेला को लेकर अपनी तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुटा हुआ है। सुल्तानगंज रेलवे स्टेशन परिसर को आकर्षक ढंग से सजाया जा रहा है। स्टेशन पर यात्रियों के बैठने, ठहरने और आवागमन की सुविधाओं को बेहतर बनाया जा रहा है। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा बल की तैनाती की जाएगी। यात्रियों के मार्गदर्शन के लिए सूचना केंद्र, हेल्प डेस्क और उद्घोषणा प्रणाली को भी मजबूत किया जा रहा है।
रेलवे स्टेशन पर स्वास्थ्य सुविधाओं का भी विशेष इंतजाम किया जा रहा है। प्राथमिक उपचार केंद्र, पेयजल, स्वच्छता व्यवस्था और यात्रियों की सहायता के लिए विशेष टीमें तैनात रहेंगी। इसके अलावा स्टेशन परिसर में साफ-सफाई और प्रकाश व्यवस्था को बेहतर बनाने का कार्य भी तेजी से चल रहा है ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार श्रावणी मेला के दौरान लाखों श्रद्धालुओं के आगमन की संभावना को देखते हुए सभी विभागों के बीच लगातार समन्वय स्थापित किया जा रहा है। नगर निकाय, स्वास्थ्य विभाग, पुलिस प्रशासन, अग्निशमन सेवा, बिजली विभाग, जलापूर्ति विभाग और रेलवे सहित सभी एजेंसियों को समयबद्ध तरीके से अपनी तैयारियां पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं।
साफ-सफाई पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। घाटों, मंदिर परिसर, कांवड़िया पथ और सार्वजनिक स्थलों पर नियमित सफाई व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है। कचरा निस्तारण, मोबाइल शौचालय, पेयजल व्यवस्था और स्वच्छता अभियान को प्रभावी बनाने के लिए अलग-अलग टीमों की तैनाती की जा रही है। प्रशासन का उद्देश्य श्रद्धालुओं को स्वच्छ और सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना है।
यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए भी विशेष योजना तैयार की जा रही है। मेला अवधि के दौरान वाहनों के संचालन, पार्किंग व्यवस्था और पैदल यात्रियों के लिए अलग मार्ग निर्धारित किए जाएंगे। इससे भीड़ के दबाव को नियंत्रित करने और आवागमन को सुगम बनाने में मदद मिलेगी।
श्रावणी मेला केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि बिहार की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान का महत्वपूर्ण प्रतीक भी है। इसी कारण जिला प्रशासन इस आयोजन को सफल, सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने के लिए हर स्तर पर तैयारियों में जुटा हुआ है। प्रशासन का प्रयास है कि देशभर से आने वाले श्रद्धालुओं को इस बार पहले से अधिक बेहतर सुविधाएं मिलें और उनकी यात्रा सुरक्षित, सुगम तथा यादगार बने। आने वाले दिनों में तैयारियों की रफ्तार और तेज होने की उम्मीद है ताकि मेला शुरू होने से पहले सभी व्यवस्थाएं पूरी तरह तैयार हो जाएं।


