बाबूपुर गंगा घाट पर मालवाहक वाहनों और कथित अवैध मिट्टी कटाई के खिलाफ ग्रामीणों का विरोध, जिला प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग

भागलपुर जिले के सबौर प्रखंड स्थित रजंदीपुर पंचायत के बाबूपुर गांव में गंगा घाट से मालवाहक वाहनों के संचालन और गंगा किनारे कथित अवैध मिट्टी कटाई को लेकर ग्रामीणों का विरोध तेज हो गया है। स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग करते हुए जिला पदाधिकारी को एक आवेदन सौंपा है। ग्रामीणों का कहना है कि बाबूपुर गंगा घाट से जहाज के माध्यम से माल की ढुलाई के कारण भारी वाहनों की आवाजाही लगातार बढ़ रही है, जिससे गांव के लोगों को रोजाना कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इसके साथ ही गंगा किनारे कथित रूप से हो रही मिट्टी कटाई से भविष्य में कटाव का खतरा और बढ़ने की आशंका जताई गई है।

ग्रामीणों के अनुसार बाबूपुर एक घनी आबादी वाला गांव है, जहां से होकर गुजरने वाली सड़क काफी संकरी है। यही सड़क गांव के लोगों के आवागमन का मुख्य मार्ग है। भारी मालवाहक वाहनों के लगातार आने-जाने से सड़क पर अक्सर जाम की स्थिति बन जाती है, जिससे आम लोगों के साथ-साथ विद्यार्थियों, महिलाओं और बुजुर्गों को भी भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। लोगों का कहना है कि कई बार घंटों तक वाहन फंसे रहने के कारण पूरे इलाके में यातायात प्रभावित हो जाता है।

ग्रामीणों ने आवेदन में उल्लेख किया है कि यह सड़क केवल स्थानीय आवागमन के लिए ही नहीं, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं की दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण है। इसी मार्ग से एंबुलेंस सहित अन्य आपातकालीन सेवाएं गांव तक पहुंचती हैं। ऐसे में यदि सड़क पर भारी वाहनों की वजह से जाम लगता है तो मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाने में भी गंभीर परेशानी उत्पन्न हो सकती है। लोगों का कहना है कि किसी भी आपात स्थिति में यह समस्या जानलेवा साबित हो सकती है।

स्थानीय निवासियों का कहना है कि मालवाहक वाहनों की संख्या बढ़ने से सड़क की स्थिति भी लगातार खराब होती जा रही है। संकरी सड़क पर बड़े ट्रकों और अन्य भारी वाहनों के संचालन से दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। स्कूल जाने वाले बच्चों और पैदल चलने वाले लोगों के लिए यह मार्ग पहले की तुलना में अधिक जोखिमपूर्ण हो गया है। ग्रामीणों का कहना है कि गांव की आधारभूत संरचना इतनी बड़ी संख्या में भारी वाहनों के संचालन के लिए उपयुक्त नहीं है।

ग्रामीणों ने आवेदन में गंगा किनारे कथित अवैध मिट्टी कटाई का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया है। उनका आरोप है कि नदी तट से मिट्टी निकालकर दूसरे स्थानों पर बेची जा रही है। यदि ऐसा लगातार जारी रहा तो गंगा के कटाव का खतरा और बढ़ सकता है। ग्रामीणों का कहना है कि बाबूपुर पहले से ही गंगा कटाव से प्रभावित क्षेत्र माना जाता है और नदी अब गांव की आबादी के काफी करीब पहुंच चुकी है। ऐसे में तट से मिट्टी हटाए जाने से प्राकृतिक संतुलन प्रभावित होने की आशंका है।

ग्रामीणों के अनुसार वर्तमान में गंगा नदी गांव की आबादी से लगभग 100 मीटर की दूरी पर है। लोगों का कहना है कि यदि कटाव की गति बढ़ती है तो भविष्य में गांव के कई हिस्से खतरे की जद में आ सकते हैं। यही कारण है कि ग्रामीण इस मामले को केवल यातायात की समस्या नहीं, बल्कि पर्यावरण और जन सुरक्षा से जुड़ा गंभीर विषय मान रहे हैं।

आवेदन में जिला प्रशासन से मांग की गई है कि बाबूपुर गंगा घाट से भारी मालवाहक वाहनों के संचालन की समीक्षा कर आवश्यक कार्रवाई की जाए। ग्रामीण चाहते हैं कि यदि वैकल्पिक व्यवस्था संभव हो तो माल ढुलाई के लिए किसी अन्य उपयुक्त मार्ग या स्थान का चयन किया जाए, ताकि गांव के लोगों को रोजमर्रा की परेशानियों से राहत मिल सके।

इसके साथ ही ग्रामीणों ने कथित अवैध मिट्टी कटाई की निष्पक्ष जांच कराने की भी मांग की है। उनका कहना है कि यदि जांच में नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए। ग्रामीणों का मानना है कि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले दिनों में गंगा कटाव और अधिक गंभीर रूप ले सकता है।

स्थानीय लोगों ने यह भी कहा कि विकास कार्यों और व्यापारिक गतिविधियों का वे विरोध नहीं कर रहे हैं, लेकिन किसी भी व्यवस्था का संचालन इस प्रकार होना चाहिए कि आम नागरिकों के जीवन, सुरक्षा और पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े। उनका कहना है कि यदि भारी वाहनों का संचालन जारी रखना आवश्यक है तो पहले सड़क को चौड़ा करने, यातायात प्रबंधन की व्यवस्था करने और सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम किए जाने चाहिए।

ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से पूरे मामले का स्थलीय निरीक्षण कराने की भी मांग की है। उनका कहना है कि संबंधित विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचकर सड़क की स्थिति, भारी वाहनों के संचालन, गंगा किनारे की वर्तमान परिस्थिति और मिट्टी कटाई से जुड़े आरोपों की वास्तविक स्थिति का आकलन करें। इससे तथ्यों के आधार पर उचित निर्णय लेने में आसानी होगी।

प्रशासन की ओर से इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। हालांकि ग्रामीणों को उम्मीद है कि जिला प्रशासन उनके आवेदन पर गंभीरता से विचार करेगा और आवश्यक जांच कराएगा। यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो नियमानुसार कार्रवाई किए जाने की संभावना है।

फिलहाल बाबूपुर गांव के लोगों की निगाहें जिला प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। ग्रामीणों का कहना है कि उनकी मांग केवल यातायात व्यवस्था सुधारने तक सीमित नहीं है, बल्कि गांव की सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और भविष्य में गंगा कटाव से होने वाले संभावित नुकसान को रोकना भी इसका प्रमुख उद्देश्य है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन इस पूरे मामले की जांच किस प्रकार कराता है और स्थानीय लोगों की चिंताओं के समाधान के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।

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