विक्रमशिला सेतु पर क्षतिग्रस्त स्लैब के बाद फेरी सेवा शुरू करने की तैयारी तेज, भागलपुर में उच्चस्तरीय बैठक में बनी रणनीति

भागलपुर। विक्रमशिला सेतु के एक स्लैब के क्षतिग्रस्त होने के बाद गंगा नदी के दोनों किनारों के बीच आवागमन को सुचारु बनाए रखने के लिए जिला प्रशासन ने वैकल्पिक परिवहन व्यवस्था को लेकर तैयारियां तेज कर दी हैं। इसी कड़ी में सोमवार को समाहरणालय स्थित समीक्षा भवन में जिलाधिकारी अलंकृता पाण्डेय की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में फेरी सेवा और कार्गो परिवहन को जल्द शुरू करने की दिशा में आवश्यक तैयारियों, सुरक्षा व्यवस्था, प्रशासनिक समन्वय तथा यात्रियों की सुविधा से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई।

जिला प्रशासन का उद्देश्य विक्रमशिला सेतु पर उत्पन्न स्थिति के कारण आम लोगों को होने वाली परेशानी को कम करना और गंगा के दोनों किनारों के बीच सुरक्षित एवं सुचारु आवागमन सुनिश्चित करना है। बैठक में अधिकारियों ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि वैकल्पिक परिवहन व्यवस्था को जल्द से जल्द शुरू किया जाए, ताकि यात्रियों, व्यापारियों और आवश्यक वस्तुओं के परिवहन पर किसी प्रकार का प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।

बैठक के दौरान विक्रमशिला सेतु की वर्तमान स्थिति की समीक्षा की गई और उसके कारण उत्पन्न यातायात संबंधी चुनौतियों पर विस्तार से विचार-विमर्श हुआ। अधिकारियों ने बताया कि सेतु के एक स्लैब के क्षतिग्रस्त होने के बाद वैकल्पिक मार्गों और परिवहन साधनों की आवश्यकता पहले से अधिक बढ़ गई है। इसी को ध्यान में रखते हुए फेरी सेवा और कार्गो संचालन को प्राथमिकता के आधार पर शुरू करने की योजना बनाई जा रही है।

समीक्षा बैठक में संभावित फेरी घाटों के चयन पर भी विस्तार से चर्चा की गई। अधिकारियों ने उन स्थानों का आकलन किया जहां से यात्रियों और वाहनों की आवाजाही सुरक्षित एवं सुगम तरीके से कराई जा सकती है। घाटों की उपलब्धता, नदी की स्थिति, जलस्तर, पहुंच मार्ग और अन्य तकनीकी पहलुओं का भी मूल्यांकन किया गया, ताकि सेवा शुरू होने के बाद किसी प्रकार की समस्या उत्पन्न न हो।

बैठक में यातायात प्रबंधन को लेकर भी विस्तृत रणनीति तैयार की गई। अधिकारियों ने कहा कि फेरी सेवा शुरू होने के बाद घाटों के आसपास वाहनों की संख्या बढ़ सकती है। इसलिए यातायात व्यवस्था को व्यवस्थित रखने के लिए पहले से ही आवश्यक योजना तैयार की जाएगी। इसके तहत वाहनों की आवाजाही, पार्किंग, प्रवेश और निकास मार्गों का निर्धारण करने सहित अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाएंगी।

यात्रियों की सुरक्षा बैठक का प्रमुख विषय रही। जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया कि फेरी सेवा शुरू करने से पहले सभी सुरक्षा मानकों का पूरी तरह पालन किया जाएगा। फेरी संचालन में शामिल नौकाओं और कार्गो पोतों की तकनीकी जांच, सुरक्षा उपकरणों की उपलब्धता, लाइफ जैकेट, आपातकालीन बचाव व्यवस्था तथा प्रशिक्षित कर्मियों की तैनाती जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। अधिकारियों ने कहा कि किसी भी स्थिति में सुरक्षा से समझौता नहीं किया जाएगा।

बैठक में यात्रियों की सुविधा को लेकर भी कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर विचार किया गया। घाटों पर प्रतीक्षालय, पेयजल, शौचालय, टिकट व्यवस्था, सूचना केंद्र और अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने की योजना पर चर्चा हुई। प्रशासन का मानना है कि यदि वैकल्पिक परिवहन व्यवस्था को व्यवस्थित ढंग से संचालित किया जाए तो लोगों को कम से कम असुविधा होगी।

कार्गो सेवा को लेकर भी अधिकारियों ने विस्तृत समीक्षा की। गंगा नदी के माध्यम से आवश्यक वस्तुओं और मालवाहक परिवहन को सुचारु बनाए रखने के लिए संबंधित एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित करने पर बल दिया गया। प्रशासन का कहना है कि व्यापारिक गतिविधियों पर किसी प्रकार का प्रतिकूल प्रभाव न पड़े, इसके लिए कार्गो सेवा को भी जल्द शुरू करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है।

बैठक में विभिन्न प्रशासनिक विभागों के बीच बेहतर समन्वय पर भी विशेष जोर दिया गया। अधिकारियों ने कहा कि फेरी सेवा का सफल संचालन तभी संभव होगा जब जिला प्रशासन, पुलिस, नगर निगम, परिवहन विभाग, आपदा प्रबंधन, जल संसाधन विभाग और संबंधित एजेंसियां मिलकर कार्य करें। इसलिए सभी विभागों को अपनी-अपनी जिम्मेदारियों के अनुसार आवश्यक तैयारियां पूरी करने के निर्देश दिए गए।

जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों से कहा कि फेरी सेवा शुरू करने से पहले सभी आवश्यक प्रशासनिक अनुमतियां समय पर पूरी कर ली जाएं। साथ ही संबंधित एजेंसियों के साथ नियमित समन्वय बनाए रखते हुए प्रत्येक चरण की निगरानी की जाए। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकार की तकनीकी या प्रशासनिक बाधा आने पर उसका तत्काल समाधान किया जाए ताकि सेवा शुरू करने में अनावश्यक विलंब न हो।

बैठक में इस बात पर भी चर्चा हुई कि फेरी सेवा के संचालन के दौरान संभावित चुनौतियों का पहले से आकलन कर उनके समाधान की योजना तैयार की जाए। मानसून के मौसम, नदी के जलस्तर में संभावित बदलाव, मौसम संबंधी परिस्थितियों और यात्रियों की बढ़ती संख्या को ध्यान में रखते हुए आवश्यक रणनीति बनाने पर बल दिया गया।

जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया कि आम लोगों की सुविधा सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसलिए विक्रमशिला सेतु पर उत्पन्न स्थिति के बावजूद यह सुनिश्चित किया जाएगा कि लोगों की आवाजाही और आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति प्रभावित न हो। अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि फेरी सेवा शुरू होने के बाद उसकी नियमित निगरानी भी की जाए ताकि किसी प्रकार की समस्या आने पर तत्काल समाधान किया जा सके।

इस महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक में वरीय पुलिस अधीक्षक, नवगछिया के पुलिस अधीक्षक, नगर आयुक्त, सभी अनुमंडल पदाधिकारी, विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी, फेरी एवं कार्गो सेवा से जुड़ी एजेंसियों के प्रतिनिधि तथा संचालक मौजूद रहे। सभी ने अपने-अपने विभाग से संबंधित तैयारियों की जानकारी दी और आवश्यक सुझाव भी प्रस्तुत किए।

जिला प्रशासन का मानना है कि विक्रमशिला सेतु पर आई वर्तमान चुनौती के बीच फेरी सेवा एक प्रभावी वैकल्पिक परिवहन व्यवस्था साबित हो सकती है। यदि सभी तैयारियां समय पर पूरी हो जाती हैं तो गंगा नदी के दोनों किनारों के बीच यात्रियों और मालवाहक परिवहन को सुरक्षित एवं व्यवस्थित ढंग से संचालित किया जा सकेगा।

प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि फेरी सेवा और कार्गो परिचालन को लेकर सभी आवश्यक कदम तेजी से उठाए जा रहे हैं। सुरक्षा, सुविधा और प्रशासनिक समन्वय को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए वैकल्पिक परिवहन व्यवस्था को जल्द शुरू करने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि विक्रमशिला सेतु पर उत्पन्न स्थिति के बावजूद आम लोगों के दैनिक जीवन और आर्थिक गतिविधियों पर न्यूनतम प्रभाव पड़े।

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