
दरभंगा: बिहार के चर्चित दरभंगा नगर निगम शौचालय टेंडर मामले में सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व मेयर, पूर्व डिप्टी मेयर समेत नौ पूर्व जनप्रतिनिधियों को बड़ा झटका दिया है। सर्वोच्च अदालत ने बिहार सरकार के नगर विकास एवं आवास विभाग की कार्रवाई को सही ठहराते हुए उनकी याचिका खारिज कर दी। इसके साथ ही उनके नगर निकाय चुनाव लड़ने पर लगी रोक भी बरकरार रखी गई है।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला वर्ष 2016 से 2019 के बीच सार्वजनिक शौचालयों के टेंडर से जुड़ा है। वर्ष 2018 में तत्कालीन वार्ड पार्षद मधुबाला सिन्हा, पूर्व पार्षद प्रदीप गुप्ता सहित अन्य पार्षदों ने प्रमंडलीय आयुक्त से शिकायत की थी।
शिकायत में आरोप लगाया गया था कि नगर निगम प्रशासन ने नियमों की अनदेखी करते हुए एक निजी ठेकेदार को करीब 27.19 लाख रुपये का अनुचित वित्तीय लाभ पहुंचाया, जिससे नगर निगम को राजस्व का नुकसान हुआ।
जांच में मिली अनियमितता
जांच में वित्तीय अनियमितता की पुष्टि होने के बाद दिसंबर 2021 में नगर विकास एवं आवास विभाग ने तत्कालीन मेयर बैजयंती देवी खेड़िया, डिप्टी मेयर बदरुज्मा खान तथा सशक्त स्थायी समिति के सदस्यों सोहन यादव, अजय जलान सहित कुल नौ जनप्रतिनिधियों को पद से हटा दिया था।
हाईकोर्ट के बाद सुप्रीम कोर्ट से भी राहत नहीं
सरकार की कार्रवाई को चुनौती देते हुए सभी आरोपियों ने पहले पटना हाईकोर्ट और बाद में सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। हालांकि दोनों अदालतों ने उनकी याचिकाएं खारिज करते हुए विभागीय कार्रवाई को वैध माना।
चुनाव लड़ने पर रोक रहेगी
वर्तमान नियमों के अनुसार वित्तीय अनियमितता या भ्रष्टाचार के आरोप में पद से हटाए गए जनप्रतिनिधि नगर निकाय चुनाव लड़ने के पात्र नहीं होते। ऐसे में पूर्व मेयर, पूर्व डिप्टी मेयर समेत सभी नौ लोगों के 2027 के नगर निकाय चुनाव लड़ने पर फिलहाल रोक बनी रहेगी।
27.19 लाख रुपये की वसूली का निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार की कार्रवाई को बरकरार रखते हुए संबंधित सभी आरोपियों से नगर निगम को हुए 27.19 लाख रुपये के नुकसान की वसूली करने का भी निर्देश दिया है।
विशेषज्ञों के अनुसार, भविष्य में यदि सभी कानूनी और विभागीय प्रक्रियाएं पूरी होती हैं तथा वसूली संबंधी शर्तों का पालन किया जाता है, तभी उनकी चुनावी पात्रता पर आगे कोई निर्णय लिया जा सकेगा।


