बांकीपुर उपचुनाव: ‘यहीं खत्म हो सकती है पीके की राजनीति’, मंत्री प्रमोद चंद्रवंशी का बड़ा बयान

पटना: बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव को लेकर बिहार की राजनीति पूरी तरह गरमा गई है। जन सुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर खुद चुनावी मैदान में उतर चुके हैं और भारतीय जनता पार्टी को सीधी चुनौती दे रहे हैं। इसी बीच सोमवार, 6 जुलाई से नामांकन प्रक्रिया भी शुरू हो गई है, जो 13 जुलाई तक चलेगी। हालांकि भाजपा और महागठबंधन दोनों ने अब तक अपने उम्मीदवारों की घोषणा नहीं की है।

‘यहीं खत्म हो सकती है राजनीति की यात्रा’

प्रशांत किशोर की उम्मीदवारी पर बिहार सरकार के खान एवं भूतत्व मंत्री प्रमोद चंद्रवंशी ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि कहीं बांकीपुर से ही उनकी राजनीतिक यात्रा समाप्त न हो जाए।

उन्होंने कहा कि प्रशांत किशोर खुद को जितना बड़ा नेता और मुख्यमंत्री बनने योग्य मानते हैं, उससे कहीं अधिक बिहार की जनता समझदार है।

243 सीटों का भी किया जिक्र

प्रमोद चंद्रवंशी ने कहा,

“अभी कुछ दिन पहले ही वह 243 सीटों पर चुनाव लड़ रहे थे और परिणाम सबके सामने है। शून्य पर सिमट गए। अब खुद चुनाव लड़ रहे हैं तो अच्छी बात है। मैं बढ़-चढ़कर बातें करने वाली राजनीति नहीं करता, लेकिन समय आने पर सबको परिणाम दिखाई देगा।”

जमानत बचाने पर भी उठाए सवाल

जब उनसे पूछा गया कि क्या प्रशांत किशोर के लिए अपनी जमानत बचाना भी मुश्किल हो सकता है, तो मंत्री ने कहा कि इसका जवाब समय देगा।

उन्होंने कहा,

“चुनाव लड़ना उनका अधिकार है, लेकिन ऐसा भी हो सकता है कि यहीं से उनकी राजनीतिक यात्रा समाप्त हो जाए। भाजपा पूरी मजबूती के साथ चुनाव लड़ेगी और जीत दर्ज करेगी।”

भाजपा के लिए प्रतिष्ठा का चुनाव

बांकीपुर विधानसभा सीट भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन के इस्तीफे के बाद खाली हुई है। इसी सीट पर जन सुराज ने अपने सबसे बड़े चेहरे प्रशांत किशोर को उम्मीदवार बनाया है।

भाजपा ने अभी तक अपना प्रत्याशी घोषित नहीं किया है, जबकि महागठबंधन भी उम्मीदवार के नाम पर मंथन कर रहा है।

प्रशांत किशोर की राजनीतिक परीक्षा

चुनावी रणनीतिकार के रूप में राष्ट्रीय पहचान बना चुके प्रशांत किशोर पहली बार किसी बड़े शहरी विधानसभा क्षेत्र से खुद चुनाव लड़ रहे हैं।

पिछले विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी ने सभी 243 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे, लेकिन अधिकांश उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई थी। ऐसे में बांकीपुर उपचुनाव को उनकी राजनीतिक साख की बड़ी परीक्षा माना जा रहा है।

भाजपा में भी तेज हुई तैयारियां

उधर भाजपा इस सीट को प्रतिष्ठा का प्रश्न मान रही है। प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और वरिष्ठ नेताओं के साथ कई दौर की बैठकें कर चुके हैं।

भाजपा का कहना है कि चूंकि यह सीट पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन की रही है, इसलिए उम्मीदवार के नाम पर अंतिम निर्णय पार्टी का शीर्ष नेतृत्व करेगा। पार्टी ने यह भी स्पष्ट किया है कि प्रत्याशी कोई भी हो, भाजपा के सभी वरिष्ठ नेता घर-घर जाकर चुनाव प्रचार करेंगे।

30 जुलाई को मतदान

बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव के लिए 30 जुलाई को मतदान होगा, जबकि 3 अगस्त को मतगणना होगी।

अब सबकी नजर इस बात पर है कि भाजपा अपनी परंपरागत मजबूत सीट बचाने में सफल रहती है या प्रशांत किशोर अपनी पहली बड़ी चुनावी लड़ाई में नया राजनीतिक संदेश देने में कामयाब होते हैं।

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