भागलपुर में सड़क किनारे मिला नवजात, कुत्तों के भौंकने से बची जान; ग्रामीण की पहल से मिला नया आशियाना

भागलपुर जिले के सबौर थाना क्षेत्र से मानवता को झकझोर देने वाली एक घटना सामने आई है। सरधो पंचायत के बड़ी सरधो नवटोलिया गांव में सड़क किनारे एक नवजात शिशु लावारिस हालत में मिला। बताया जा रहा है कि शिशु को एक कपड़े और मच्छरदानी (मुसहरी) में लपेटकर सड़क किनारे छोड़ दिया गया था। यदि समय रहते ग्रामीणों की नजर उस पर नहीं पड़ती, तो कोई बड़ा हादसा हो सकता था। कुत्तों के लगातार भौंकने और नवजात के रोने की आवाज ने गांव के लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा, जिसके बाद उसकी जान बचाई जा सकी।

स्थानीय लोगों के अनुसार सुबह के समय गांव के पास से गुजर रहे कुछ लोगों ने कुत्तों के तेज भौंकने की आवाज सुनी। शुरुआत में लोगों ने इसे सामान्य घटना समझा, लेकिन जब उसी स्थान से एक नवजात बच्चे के रोने की आवाज भी सुनाई दी, तो ग्रामीण मौके की ओर दौड़े। वहां पहुंचने पर लोगों ने देखा कि एक नवजात शिशु मुसहरी में लिपटा हुआ सड़क किनारे पड़ा है। आसपास कोई व्यक्ति मौजूद नहीं था।

घटना की जानकारी मिलते ही गांव में बड़ी संख्या में लोग इकट्ठा हो गए। ग्रामीणों ने बिना देर किए इसकी सूचना सबौर थाना पुलिस और डायल 112 की टीम को दी। सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और पूरे मामले की जांच शुरू की। पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और आसपास मौजूद लोगों से पूछताछ कर जानकारी जुटाई।

ग्रामीणों ने पुलिस को बताया कि यदि कुत्तों के भौंकने की आवाज नहीं आती, तो संभव है कि किसी की नजर नवजात पर नहीं पड़ती। लोगों का कहना है कि बच्चे के रोने की आवाज सुनकर ही उन्हें स्थिति की गंभीरता का एहसास हुआ। इसके बाद सभी ने मिलकर बच्चे को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया और पुलिस के आने तक उसकी देखभाल की।

प्रारंभिक जांच में पुलिस को आशंका है कि किसी अज्ञात महिला ने नवजात को जन्म देने के बाद उसे सड़क किनारे छोड़ दिया। हालांकि अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि शिशु को वहां किस परिस्थिति में छोड़ा गया और इसके पीछे क्या कारण था। पुलिस आसपास के इलाकों में जानकारी जुटाने के साथ-साथ संभावित सुराग तलाशने में जुटी है।

घटनास्थल पर मौजूद पुलिस अधिकारियों ने सबसे पहले नवजात को सुरक्षित अपने संरक्षण में लिया। इसके बाद उसे चिकित्सकीय जांच के लिए अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टरों ने बच्चे की स्वास्थ्य जांच की और आवश्यक प्राथमिक उपचार उपलब्ध कराया। चिकित्सकीय परीक्षण के बाद शिशु की साफ-सफाई कराई गई ताकि उसे सुरक्षित वातावरण मिल सके।

इस बीच गांव के निवासी नीरज यादव ने एक सराहनीय पहल करते हुए नवजात की जिम्मेदारी उठाने की इच्छा जताई। उन्होंने पुलिस के सामने बच्चे को गोद लेकर उसका पालन-पोषण करने की बात कही। नीरज यादव ने कहा कि कोई भी मासूम इस तरह लावारिस जीवन जीने के लिए पैदा नहीं होता और यदि उन्हें अवसर मिलता है तो वे बच्चे को अपने परिवार का हिस्सा बनाकर उसका बेहतर भविष्य सुनिश्चित करेंगे।

पुलिस ने नीरज यादव का आवेदन और बयान दर्ज किया। इसके बाद आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी की गई। संबंधित अधिकारियों की मौजूदगी में नवजात की चिकित्सकीय जांच रिपोर्ट और अन्य औपचारिकताओं के बाद बच्चे को उनकी देखरेख में सौंप दिया गया। पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया कि बच्चे की सुरक्षा और भविष्य को ध्यान में रखते हुए आगे की सभी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन कराया जाएगा।

पुलिस अधिकारियों ने नीरज यादव को स्पष्ट निर्देश दिए कि नवजात की देखभाल में किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं बरती जानी चाहिए। समय-समय पर बच्चे के स्वास्थ्य, पोषण और अन्य आवश्यक जरूरतों का ध्यान रखना होगा। साथ ही यदि भविष्य में किसी प्रकार की कानूनी या प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी करनी होगी, तो उसमें भी पूरा सहयोग करना होगा।

इस घटना ने एक ओर जहां समाज के सामने कई सवाल खड़े किए हैं, वहीं दूसरी ओर मानवता की एक सकारात्मक तस्वीर भी पेश की है। एक मासूम को सड़क किनारे छोड़ देने जैसी घटना बेहद चिंताजनक है, लेकिन उसी समाज में ऐसे लोग भी मौजूद हैं जो बिना किसी स्वार्थ के किसी अनजान बच्चे को अपना परिवार देने का निर्णय लेते हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए समाज में जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता है। यदि किसी महिला को किसी कारणवश ऐसी कठिन परिस्थिति का सामना करना पड़ रहा है, तो उसे कानूनी और सामाजिक सहायता उपलब्ध कराई जानी चाहिए, ताकि किसी नवजात को इस तरह असुरक्षित हालत में छोड़ने जैसी नौबत न आए।

सबौर थाना पुलिस फिलहाल पूरे मामले की गंभीरता से जांच कर रही है। आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज, स्थानीय लोगों से पूछताछ और अन्य तकनीकी माध्यमों से यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि नवजात को वहां कौन छोड़कर गया। पुलिस का कहना है कि मामले से जुड़े सभी पहलुओं की जांच की जा रही है और दोषी की पहचान होने पर कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।

ग्रामीणों की सतर्कता और त्वरित सूचना के कारण एक मासूम की जान बच सकी। वहीं नीरज यादव द्वारा नवजात को अपनाने की इच्छा ने इस घटना के बीच उम्मीद की एक नई किरण भी दिखाई है। अब सभी की निगाहें पुलिस जांच पर टिकी हैं कि आखिर इस मासूम को सड़क किनारे छोड़ने के पीछे कौन जिम्मेदार था और किन परिस्थितियों में यह घटना हुई।

स्थानीय पुलिस का कहना है कि जांच जारी है और जैसे-जैसे नए तथ्य सामने आएंगे, उसी आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल नवजात सुरक्षित है और उसकी देखभाल सुनिश्चित की जा रही है, जबकि पुलिस अज्ञात महिला की तलाश में जुटी हुई है।

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