
पटना: बिहार की हाई-प्रोफाइल बांकीपुर विधानसभा सीट पर 30 जुलाई को होने वाले उपचुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। इस चुनाव में जन सुराज और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के बीच सीधा मुकाबला होने की संभावना है। राजनीतिक विश्लेषकों की नजर इस सीट पर टिकी हुई है, क्योंकि यह चुनाव दोनों पक्षों के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न माना जा रहा है।
दोनों दलों के लिए अहम मुकाबला
बांकीपुर लंबे समय से भाजपा का मजबूत गढ़ माना जाता रहा है। वहीं, जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर के लिए यह सक्रिय चुनावी राजनीति की अब तक की सबसे बड़ी परीक्षा होगी।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि प्रशांत किशोर जीत दर्ज करते हैं तो उनकी पार्टी को बड़ा राजनीतिक संदेश मिलेगा। वहीं, यदि भाजपा अपनी परंपरागत सीट बचाने में सफल रहती है तो इसे उसके संगठन और जनाधार की मजबूती के रूप में देखा जाएगा।
विपक्षी समर्थन की चर्चाएं
सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस विपक्षी एकजुटता की रणनीति के तहत प्रशांत किशोर का समर्थन करने के पक्ष में सकारात्मक संकेत दे चुकी है।
कांग्रेस का मानना है कि पिछले लगभग तीन दशकों से भाजपा के कब्जे वाली इस सीट पर विपक्ष यदि एकजुट होकर चुनाव लड़े तो मुकाबला अधिक मजबूत हो सकता है।
वहीं, राष्ट्रीय जनता दल (राजद) की ओर से भी इस प्रस्ताव पर सकारात्मक रुख की चर्चा है। हालांकि सीट और रणनीति को लेकर अंतिम निर्णय अभी होना बाकी है।
भाजपा ने तेज की चुनावी तैयारी
भाजपा ने अभी तक अपने उम्मीदवार की घोषणा नहीं की है, लेकिन चुनावी तैयारियां तेज कर दी हैं।
प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने दावा किया कि बांकीपुर की जनता एक बार फिर भाजपा को समर्थन देगी।
उन्होंने कहा कि पूर्व विधायक नितिन नवीन द्वारा क्षेत्र में कराए गए विकास कार्यों के आधार पर पार्टी जनता के बीच जाएगी और उपचुनाव में जीत दर्ज करेगी।
422 बूथों पर विशेष रणनीति
भाजपा ने बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र के 422 बूथों के लिए सात चरणों में चुनावी रणनीति तैयार की है।
इसके तहत—
- बूथ स्तर पर संगठन को मजबूत करना,
- कार्यकर्ताओं की बैठकें,
- जनसंपर्क अभियान,
- और प्रभावी बूथ प्रबंधन पर विशेष फोकस किया जा रहा है।
चुनाव प्रचार को गति देने के लिए बिहार के विभिन्न जिलों से पार्टी के विधायकों और वरिष्ठ नेताओं को भी अलग-अलग जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं।
30 जुलाई को होने वाला मतदान और 3 अगस्त को आने वाला परिणाम न केवल बांकीपुर की राजनीति, बल्कि बिहार की भविष्य की राजनीतिक दिशा को लेकर भी महत्वपूर्ण संकेत दे सकता है।


