भरत तिवारी एनकाउंटर मामला: जगदीशपुर की बहुजन महापंचायत स्थगित, प्रशासन ने नहीं दी अनुमति

भोजपुर: भरत तिवारी एनकाउंटर मामले को लेकर रविवार को जगदीशपुर में प्रस्तावित बहुजन महापंचायत को तत्काल प्रभाव से स्थगित कर दिया गया है। आयोजन समिति ने प्रशासन से अनुमति नहीं मिलने और कार्यक्रम स्थल के आसपास धारा 144 लागू किए जाने के बाद यह निर्णय लिया। समिति के सभी सदस्यों ने सर्वसम्मति से महापंचायत को फिलहाल टालने का फैसला लिया है।

अनुमति मिलने के बाद घोषित होगी नई तारीख

आयोजन समिति ने बताया कि प्रशासन से आवश्यक अनुमति मिलने के बाद महापंचायत की नई तिथि जल्द घोषित की जाएगी। समिति का कहना है कि वर्तमान प्रशासनिक परिस्थितियों में निर्धारित तिथि पर कार्यक्रम आयोजित करना संभव नहीं था।

प्रशासन ने सुरक्षा और कानून-व्यवस्था का दिया हवाला

इससे पहले अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीएम) और अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (एसडीपीओ) ने संयुक्त आदेश जारी कर कार्यक्रम की अनुमति देने से इनकार कर दिया था।

प्रशासन के अनुसार, महापंचायत में बड़ी संख्या में लोगों के जुटने की संभावना थी, जिससे कानून-व्यवस्था और यातायात व्यवस्था प्रभावित हो सकती थी।

शांति बनाए रखने की अपील

हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (HAM) के प्रदेश महासचिव रणविजय सिंह उर्फ बड़क कुशवाहा ने समर्थकों और आम लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की।

उन्होंने कहा,

“सभी समर्थकों, कार्यकर्ताओं एवं आम लोगों से शांति और संयम बनाए रखने की अपील है। किसी भी प्रकार की अफवाह पर ध्यान न दें। प्रशासनिक अनुमति मिलने के बाद महापंचायत की नई तिथि की आधिकारिक घोषणा की जाएगी।”

उन्होंने यह भी कहा,

“हम संविधान और कानून का सम्मान करने वाले लोग हैं। प्रशासन के आदेश को देखते हुए हमने महापंचायत स्थगित करने का निर्णय लिया है।”

जीतन राम मांझी ने भी कार्यक्रम में आने से किया इंकार

इस महापंचायत में केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होने वाले थे। लेकिन सूत्रों के अनुसार, एक गोपनीय आईबी रिपोर्ट के बाद उन्होंने कार्यक्रम में शामिल होने से मना कर दिया। इसके बाद भोजपुर प्रशासन ने पहले दी गई अनुमति भी वापस ले ली।

क्या है भरत तिवारी मामला?

17 जून को भोजपुर जिले में पुलिस कार्रवाई के दौरान भरत तिवारी को गोली लगी थी। बाद में पटना में इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।

परिजनों ने आरोप लगाया कि भरत तिवारी ने पुलिस के सामने हथियार फेंककर आत्मसमर्पण कर दिया था, इसके बावजूद उन्हें गोली मारी गई। घटना के बाद पुलिस पर फर्जी एनकाउंटर के आरोप लगे।

सरकार ने मामले की जांच शुरू कर कुछ पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की है, लेकिन परिजन अब भी निष्पक्ष जांच और न्याय की मांग कर रहे हैं। उन्होंने इस मामले को लेकर उच्चतम न्यायालय तक जाने की बात भी कही है।

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