20 साल बाद 10 सर्कुलर रोड से निकली लालू की ऐतिहासिक महिंद्रा जीप, फिर चर्चा में आया कर्पूरी ठाकुर से जुड़ा वह चर्चित किस्सा

पटना: पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के करीब 20 वर्षों बाद 10 सर्कुलर रोड स्थित सरकारी आवास खाली कर कौटिल्य नगर स्थित निजी आवास में शिफ्ट होने के साथ ही राष्ट्रीय जनता दल अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव की चर्चित महिंद्रा जीप एक बार फिर सुर्खियों में आ गई है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार यह ऐतिहासिक जीप अब नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के सरकारी आवास पहुंच चुकी है। लेकिन इस जीप की चर्चा के साथ बिहार की राजनीति का एक पुराना और चर्चित प्रसंग भी फिर लोगों की जुबान पर लौट आया है।

जब बीमार कर्पूरी ठाकुर को विधानसभा जाने के लिए चाहिए थी एक गाड़ी

यह घटना उस दौर की है जब जननायक कर्पूरी ठाकुर बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष थे। तबीयत खराब होने के बावजूद वे विधानसभा की महत्वपूर्ण कार्यवाही में शामिल होना चाहते थे। लोकतंत्र में विपक्ष की भूमिका को लेकर वे बेहद गंभीर थे, लेकिन उनके सामने सबसे बड़ी समस्या यह थी कि उनके पास विधानसभा जाने के लिए कोई वाहन नहीं था।

अपने सहयोगी और लोकदल नेता शिवनंदन पासवान से उन्होंने किसी तरह गाड़ी की व्यवस्था करने को कहा। शिवनंदन पासवान को सबसे पहले लालू प्रसाद यादव का ख्याल आया, जो उस समय उभरते हुए युवा नेता थे और उनके पास अपनी महिंद्रा जीप थी।

संकर्षण ठाकुर की किताब में दर्ज है पूरा घटनाक्रम

वरिष्ठ पत्रकार संकर्षण ठाकुर ने अपनी चर्चित पुस्तक “बंधु बिहारी : कहानी लालू यादव व नीतीश कुमार की” में इस घटना का विस्तार से उल्लेख किया है। पुस्तक के अनुसार जब शिवनंदन पासवान ने लालू यादव से कर्पूरी ठाकुर के लिए जीप देने का आग्रह किया तो कथित तौर पर लालू यादव ने जवाब दिया—

“आप कर्पूरी जी से खुद के लिए एक कार खरीदने को क्यों नहीं कहते? वह तो बड़े नेता हैं।”

बताया जाता है कि यह जवाब सुनकर शिवनंदन पासवान निराश लौट आए और पूरी बात कर्पूरी ठाकुर को बताई। जननायक ने इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी, लेकिन यह घटना लंबे समय तक उनके करीबी लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी रही।

गुरु-शिष्य के रिश्ते में आई दूरी

पुस्तक में यह भी उल्लेख है कि लालू यादव को राजनीति की मुख्यधारा में स्थापित करने में कर्पूरी ठाकुर की बड़ी भूमिका रही थी। 1977 में लोकसभा चुनाव का टिकट दिलाने से लेकर बाद में विधानसभा की राजनीति तक, कर्पूरी ठाकुर ने लालू यादव पर भरोसा जताया। हालांकि लेखक के अनुसार बाद के वर्षों में लालू यादव ने अपनी अलग राजनीतिक पहचान स्थापित करने की कोशिश की और सार्वजनिक जीवन में कर्पूरी ठाकुर के योगदान का उल्लेख धीरे-धीरे कम होता गया।

कैसे खरीदी गई थी यह महिंद्रा जीप?

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक 1977 में सांसद बनने के बाद लालू प्रसाद यादव कोलकाता गए थे, जहां सेना की डिस्पोजल गाड़ियों की नीलामी होती थी। वहीं से उन्होंने करीब 5 हजार रुपये में यह महिंद्रा जीप खरीदी थी।

करीब डेढ़ दशक तक यही जीप लालू यादव की राजनीतिक यात्राओं की साथी बनी रही। गांव-गांव के दौरे, चुनाव प्रचार, जनसभाएं और संगठन विस्तार—सब कुछ इसी जीप के सहारे हुआ। वर्ष 1990 में मुख्यमंत्री बनने के बाद ही उन्होंने पहली बार सरकारी वाहन का इस्तेमाल शुरू किया।

आज भी राजनीति की विरासत मानी जाती है यह जीप

बताया जाता है कि समाजवादी नेता शरद यादव समेत कई बड़े नेताओं ने भी इसी जीप में सफर किया। कई बार रास्ते में खराब होने पर नेता और कार्यकर्ता मिलकर इसे धक्का लगाते थे। 24 नवंबर 2021 को लालू यादव ने स्वयं इस जीप को चलाते हुए सोशल मीडिया पर वीडियो भी साझा किया था, जिसे समर्थकों ने पुराने दौर की याद बताते हुए खूब पसंद किया।

आज जब यह ऐतिहासिक जीप फिर चर्चा में है, तब इसके साथ जुड़ा कर्पूरी ठाकुर वाला प्रसंग भी एक बार फिर बिहार की राजनीति के इतिहास का अहम अध्याय बनकर सामने आ गया है। यह सिर्फ एक वाहन की कहानी नहीं, बल्कि रिश्तों, समाजवादी राजनीति और बदलते राजनीतिक दौर की भी कहानी मानी जाती है।

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