पटना में 20 हजार रुपये रिश्वत लेते शिक्षा विभाग का अफसर गिरफ्तार, निगरानी ब्यूरो की बड़ी कार्रवाई

बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के बीच निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने एक बार फिर बड़ी कार्रवाई करते हुए शिक्षा विभाग के एक अधिकारी को रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। राजधानी पटना में हुई इस कार्रवाई ने सरकारी दफ्तरों में व्याप्त भ्रष्टाचार पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। निगरानी ब्यूरो की इस कार्रवाई को वर्ष 2026 की महत्वपूर्ण ट्रैप कार्रवाई में शामिल माना जा रहा है।

निगरानी अन्वेषण ब्यूरो, बिहार द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार शिक्षा विभाग के वेतन सत्यापन कोषांग में कार्यरत एक अधिकारी को 20 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए पकड़ा गया। यह गिरफ्तारी पटना के गर्दनीबाग क्षेत्र स्थित एक स्थान पर की गई, जहां ब्यूरो की टीम पहले से जाल बिछाकर मौजूद थी। आरोपी अधिकारी के खिलाफ लंबे समय से शिकायत मिल रही थी कि वह एक फाइल के भुगतान को आगे बढ़ाने के बदले रिश्वत की मांग कर रहा था।

मामले की शुरुआत तब हुई जब नालंदा जिले के एक परिवादी ने निगरानी अन्वेषण ब्यूरो से संपर्क कर शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में आरोप लगाया गया कि शिक्षा विभाग के वेतन सत्यापन कोषांग में पदस्थापित अधिकारी फाइल क्लियर करने और भुगतान जारी करने के बदले रिश्वत मांग रहा है। शिकायतकर्ता ने यह भी बताया कि बिना अवैध भुगतान के संबंधित प्रशासनिक प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ाई जा रही थी, जिससे उसे आर्थिक और मानसिक दोनों तरह की परेशानी झेलनी पड़ रही थी

पटना में 20 हजार रुपये रिश्वत लेते शिक्षा विभाग का अफसर गिरफ्तार, निगरानी ब्यूरो की बड़ी कार्रवाई

शिकायत मिलने के बाद निगरानी ब्यूरो ने मामले को गंभीरता से लिया और प्राथमिक जांच शुरू की। जांच के दौरान शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए आरोपों का सत्यापन किया गया। ब्यूरो के अधिकारियों ने बातचीत, परिस्थितियों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर पाया कि रिश्वत मांगने का आरोप प्रथम दृष्टया सही है। इसके बाद विशेष टीम गठित कर ट्रैप की योजना तैयार की गई।

योजना के तहत शिकायतकर्ता को निर्देश दिए गए और निगरानी टीम ने पूरे ऑपरेशन पर नजर बनाए रखी। तय रणनीति के अनुसार आरोपी अधिकारी को रिश्वत की रकम सौंपी गई। जैसे ही उसने 20 हजार रुपये अपने कब्जे में लिए, निगरानी ब्यूरो की टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए उसे रंगे हाथ पकड़ लिया। गिरफ्तारी के दौरान मौके पर मौजूद अधिकारियों ने रिश्वत की राशि भी बरामद कर ली।

प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार गिरफ्तार अधिकारी अनोद मिश्रा हैं, जो शिक्षा विभाग, बिहार के वेतन सत्यापन कोषांग में अवर सचिव स्तर के पद पर कार्यरत थे। गिरफ्तारी के बाद उनसे पूछताछ की गई और उनके खिलाफ संबंधित कानूनी धाराओं में मामला दर्ज किया गया। ब्यूरो ने बताया कि आरोपी को विशेष न्यायालय में पेश करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है और आगे की जांच जारी है।

इस कार्रवाई के साथ ही वर्ष 2026 में निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की ट्रैप कार्रवाई के आंकड़े भी चर्चा में आ गए हैं। ब्यूरो के मुताबिक यह वर्ष 2026 का 79वां प्राथमिकी दर्ज होने वाला मामला है। वहीं यह 74वां ट्रैप केस बताया गया है, जिसमें अब तक कुल 74 आरोपियों को रंगे हाथ गिरफ्तार किया जा चुका है। यह आंकड़ा बताता है कि राज्य में भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई लगातार तेज हुई है।

विजिलेंस ब्यूरो द्वारा साझा आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2026 में अब तक रिश्वत के मामलों में कुल 28,05,300 रुपये की बरामदगी की जा चुकी है। यह रकम विभिन्न ट्रैप मामलों में पकड़ी गई रिश्वत राशि का कुल योग है। पिछले वर्ष यानी 2025 के आंकड़ों पर नजर डालें तो कुल 101 ट्रैप मामले दर्ज किए गए थे और लगभग 37,80,300 रुपये की रिश्वत राशि बरामद हुई थी। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि बिहार में भ्रष्टाचार के मामलों पर निगरानी एजेंसियां लगातार सक्रिय हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि सरकारी कार्यालयों में फाइलों के निष्पादन, भुगतान, नियुक्ति, सत्यापन और अनुमोदन जैसे कार्यों में रिश्वतखोरी की शिकायतें लंबे समय से सामने आती रही हैं। ऐसे मामलों में ट्रैप कार्रवाई न केवल दोषियों के खिलाफ कानूनी कदम होती है बल्कि यह अन्य अधिकारियों के लिए भी कड़ा संदेश बनती है। जब वरिष्ठ स्तर के अधिकारी रिश्वत लेते पकड़े जाते हैं तो इससे शासन-प्रशासन की जवाबदेही पर व्यापक बहस शुरू हो जाती है।

हाल के दिनों में बिहार सरकार ने भ्रष्टाचार पर सख्त रुख अपनाने की बात कई मंचों से दोहराई है। मुख्यमंत्री भी स्पष्ट कर चुके हैं कि भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति अपनाई जाएगी और किसी भी स्तर पर लिप्त पाए जाने वाले अधिकारी या कर्मचारी को बख्शा नहीं जाएगा। इसी क्रम में निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की भूमिका और महत्वपूर्ण हो गई है।

निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने आम लोगों से भी अपील की है कि यदि किसी सरकारी अधिकारी या कर्मचारी द्वारा रिश्वत मांगी जाती है तो उसकी सूचना तुरंत विभाग को दें। ब्यूरो ने इसके लिए हेल्पलाइन नंबर, मोबाइल संपर्क और व्हाट्सऐप माध्यम उपलब्ध कराए हैं ताकि लोग बिना डर शिकायत दर्ज करा सकें। अधिकारियों का कहना है कि शिकायतकर्ता की पहचान गोपनीय रखी जाती है और हर शिकायत की गंभीरता से जांच की जाती है।

भ्रष्टाचार के खिलाफ यह कार्रवाई आम नागरिकों के लिए राहत का संकेत मानी जा रही है। खासकर शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण विभाग में रिश्वतखोरी का मामला सामने आना चिंता का विषय है, क्योंकि इससे सीधे तौर पर प्रशासनिक व्यवस्था और सार्वजनिक सेवाओं की विश्वसनीयता प्रभावित होती है। अब इस मामले में आगे की जांच से यह भी स्पष्ट होगा कि आरोपी अकेले काम कर रहा था या किसी बड़े नेटवर्क का हिस्सा था।

फिलहाल पटना में हुई इस कार्रवाई ने साफ कर दिया है कि बिहार में निगरानी एजेंसियां सक्रिय हैं और रिश्वतखोरी के खिलाफ कार्रवाई लगातार जारी रहेगी। आने वाले दिनों में इस तरह की और कार्रवाइयों से भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने की कोशिशें और तेज हो सकती हैं।

  • ये भी पढ़े..

    20 साल बाद खाली हुआ 10 सर्कुलर रोड: राबड़ी देवी ने छोड़ा सरकारी बंगला, अब कौटिल्य नगर स्थित निजी आवास में रहेंगी

    Share Add as a preferred…

    अश्लील वीडियो कांड में बड़ा अपडेट: पुलिस दबिश के बाद रेहान खलीफा ने पटना में किया सरेंडर, स्पीडी ट्रायल की तैयारी

    Share Add as a preferred…