
भागलपुर के प्रतिष्ठित (एबीवीपी) ने छात्र-हित से जुड़े लंबित मुद्दों को लेकर गुरुवार को प्रशासन के खिलाफ सख्त रुख अपनाया। परिषद की महाविद्यालय इकाई ने कॉलेज के प्राचार्य को 11 सूत्री मांगों का विस्तृत ज्ञापन सौंपते हुए स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि आवेदन प्राप्त होने की तिथि से 10 दिनों के भीतर समस्याओं के समाधान की दिशा में ठोस और सकारात्मक कार्रवाई नहीं की गई, तो संगठन चरणबद्ध लोकतांत्रिक आंदोलन शुरू करेगा। परिषद ने कहा कि ऐसी स्थिति में उत्पन्न होने वाले किसी भी विवाद या आंदोलन की पूरी जिम्मेदारी महाविद्यालय प्रशासन की होगी।
कॉलेज परिसर में ज्ञापन सौंपने के दौरान छात्र-छात्राओं और परिषद कार्यकर्ताओं की उपस्थिति ने इस मुद्दे को और गंभीर बना दिया। एबीवीपी का कहना है कि लंबे समय से महाविद्यालय में कई बुनियादी समस्याएं बनी हुई हैं, जिनका सीधा असर विद्यार्थियों की पढ़ाई, सुरक्षा और दैनिक सुविधाओं पर पड़ रहा है। परिषद ने आरोप लगाया कि इन समस्याओं को लेकर पहले भी कई बार प्रशासन को अवगत कराया गया, लेकिन अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। इसी कारण अब संगठन ने एक स्पष्ट समयसीमा तय करते हुए अल्टीमेटम जारी किया है।
ज्ञापन में छात्र-हित से जुड़े कुल 11 प्रमुख मुद्दों को शामिल किया गया है। परिषद की पहली मांग सत्र 2026–2030 के नवप्रवेशित विद्यार्थियों के लिए इंडक्शन प्रोग्राम आयोजित कराने की है। संगठन का कहना है कि नए छात्रों को कॉलेज की शैक्षणिक व्यवस्था, विभागीय संरचना, सुविधाओं और प्रशासनिक प्रक्रियाओं की जानकारी देने के लिए इंडक्शन प्रोग्राम बेहद आवश्यक है। इससे नए छात्रों को कॉलेज वातावरण में सहज होने में मदद मिलेगी।
दूसरी बड़ी मांग कॉलेज की आधारभूत सुविधाओं से जुड़ी है। परिषद ने सभी कक्षाओं में कार्यशील पंखों की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने और खराब पड़े पंखों की शीघ्र मरम्मत कराने की मांग उठाई है। छात्रों का कहना है कि गर्मी और उमस के मौसम में कई कक्षाओं में पंखे बंद पड़े रहते हैं, जिससे पढ़ाई प्रभावित होती है और कक्षाओं में बैठना मुश्किल हो जाता है। परिषद ने इसे छात्रों की बुनियादी जरूरतों से जुड़ा विषय बताया।
महिला छात्रों की सुविधाओं को लेकर भी एबीवीपी ने महत्वपूर्ण मुद्दा उठाया है। परिषद ने गर्ल्स कॉमन रूम में सैनिटरी पैड की स्थायी व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है। संगठन का कहना है कि यह केवल सुविधा का विषय नहीं बल्कि छात्राओं के स्वास्थ्य, गरिमा और सुरक्षा से जुड़ा मामला है। परिषद ने कहा कि आधुनिक शैक्षणिक संस्थानों में ऐसी बुनियादी व्यवस्था का होना आवश्यक है।
शुल्क वापसी का मुद्दा भी ज्ञापन में प्रमुखता से शामिल रहा। परिषद ने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग के छात्र-छात्राओं के साथ अन्य पात्र छात्राओं से नामांकन के समय ली गई राशि को शीघ्र वापस करने की मांग की है। इसके अलावा इंटर्नशिप शुल्क की वापसी का मुद्दा भी उठाया गया। संगठन का कहना है कि आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों पर अतिरिक्त शुल्क का बोझ उनकी पढ़ाई पर नकारात्मक असर डालता है। ऐसे में प्रशासन को इस विषय पर संवेदनशीलता दिखानी चाहिए।
कॉलेज परिसर में पेयजल की समस्या को भी गंभीर बताया गया। परिषद ने शुद्ध और शीतल पेयजल की व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की। छात्रों के अनुसार गर्मी के मौसम में पर्याप्त पेयजल उपलब्ध नहीं होने से परेशानी बढ़ जाती है। कई छात्रों को बाहर से पानी खरीदना पड़ता है, जो अनावश्यक आर्थिक बोझ पैदा करता है।
तकनीकी और व्यावसायिक शिक्षा से जुड़े विभागों की स्थिति पर भी सवाल उठाए गए। एबीवीपी ने बीसीए और बायोटेक विभाग में एयर कंडीशनर लगाने की मांग की है। संगठन का कहना है कि इन विभागों में प्रयोगशाला और कंप्यूटर आधारित अध्ययन अधिक होता है, इसलिए उपयुक्त वातावरण जरूरी है। साथ ही बीसीए विभाग में अधूरे रंगाई-पुताई कार्य को जल्द पूरा करने की मांग भी रखी गई।
छात्रावास की समस्याएं भी परिषद के एजेंडे में शामिल रहीं। एबीवीपी ने कहा कि हॉस्टल में रहने वाले छात्रों को कई मूलभूत समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। साफ-सफाई, रखरखाव, बिजली-पानी और सुरक्षा जैसे मुद्दों पर प्रशासन को तत्काल ध्यान देना चाहिए। संगठन का कहना है कि हॉस्टल केवल रहने की जगह नहीं बल्कि छात्रों के शैक्षणिक जीवन का अहम हिस्सा है, इसलिए उसकी सुविधाएं बेहतर होना आवश्यक है।
कॉलेज परिसर की सुरक्षा व्यवस्था और रात्रिकालीन प्रकाश व्यवस्था को लेकर भी गंभीर चिंता जताई गई। परिषद ने कहा कि कई स्थानों पर पर्याप्त रोशनी नहीं होने से शाम और रात के समय छात्रों, विशेषकर छात्राओं, को असुरक्षा महसूस होती है। ज्ञापन में परिसर में बेहतर लाइटिंग और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग रखी गई ताकि किसी भी अप्रिय घटना की संभावना को कम किया जा सके।
महाविद्यालय में अनुशासित और गरिमापूर्ण शैक्षणिक वातावरण बनाए रखने के लिए ड्रेस कोड लागू करने की मांग भी की गई। परिषद का मानना है कि ड्रेस कोड से एक समान शैक्षणिक संस्कृति विकसित होगी और अनुशासन को बढ़ावा मिलेगा। हालांकि इस मांग पर छात्रों के बीच अलग-अलग राय भी देखने को मिल रही है।
महाविद्यालय इकाई अध्यक्ष सुमित सिंह ने कहा कि टीएनबी महाविद्यालय में छात्र-हित से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दे लंबे समय से लंबित हैं। परिषद ने बार-बार प्रशासन को इन समस्याओं की जानकारी दी, लेकिन स्थिति में कोई ठोस सुधार नहीं दिखा। उन्होंने कहा कि संगठन हमेशा छात्रों के अधिकारों और हितों की रक्षा के लिए सक्रिय रहा है और आगे भी रहेगा। यदि 10 दिनों के भीतर समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो परिषद लोकतांत्रिक और चरणबद्ध आंदोलन के जरिए अपनी आवाज और मजबूत करेगी।
महाविद्यालय इकाई मंत्री लक्ष्मण कुमार ने कहा कि किसी भी शिक्षण संस्थान की पहचान केवल शैक्षणिक उपलब्धियों से नहीं होती, बल्कि छात्रों को दी जाने वाली सुविधाओं से भी होती है। उन्होंने कहा कि पेयजल, छात्रावास, सुरक्षा, शुल्क वापसी और इंडक्शन जैसी सुविधाओं का अभाव हजारों छात्रों को प्रभावित कर रहा है। परिषद प्रशासन से टकराव नहीं चाहती, बल्कि त्वरित समाधान चाहती है।
ज्ञापन सौंपने के दौरान परिषद के कई कार्यकर्ता और छात्र-छात्राएं मौजूद रहे। संगठन ने साफ संकेत दिया है कि यदि निर्धारित समयसीमा के भीतर कार्रवाई नहीं हुई, तो आने वाले दिनों में कॉलेज परिसर में छात्र आंदोलन तेज हो सकता है। अब सभी की नजर महाविद्यालय प्रशासन की अगली प्रतिक्रिया पर टिकी है कि वह इन 11 मांगों पर क्या कदम उठाता है।


