
जुलाई महीने की शुरुआत के साथ ही बिहार में मौसम का मिजाज तेजी से बदलने वाला है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने राज्य के कई जिलों के लिए भारी बारिश, तेज आंधी और वज्रपात को लेकर अलर्ट जारी किया है। मौसम विभाग के अनुसार आज से बिहार में हेवी रेन का दौर शुरू हो सकता है, जिससे कई इलाकों में सामान्य जनजीवन प्रभावित होने की आशंका है। विभाग ने 16 जिलों में विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी है, जहां तेज बारिश के साथ 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं।
मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक बिहार में दक्षिण-पश्चिम मानसून धीरे-धीरे सक्रिय हो रहा है। पिछले कुछ दिनों से राज्य के कई हिस्सों में बादलों की आवाजाही बढ़ी है और अब मौसम प्रणाली अधिक मजबूत होती दिखाई दे रही है। यही वजह है कि जुलाई के पहले ही दिन राज्य के लिए डबल अलर्ट जारी किया गया है। कुछ जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है, जबकि कई जिलों को येलो अलर्ट श्रेणी में रखा गया है।
मौसम विभाग का कहना है कि उत्तर बिहार और पूर्वी बिहार के कई जिलों में आज मौसम सबसे अधिक खराब रह सकता है। इन क्षेत्रों में भारी वर्षा के साथ-साथ गरज-चमक और बिजली गिरने की घटनाओं की आशंका जताई गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि मानसून के सक्रिय होने के शुरुआती चरण में इस तरह की मौसमीय अस्थिरता सामान्य होती है, लेकिन इसके प्रभाव गंभीर हो सकते हैं।
राज्य के जिन 16 जिलों में आज मौसम को लेकर विशेष चेतावनी जारी की गई है, उनमें , , शिवहर, सीतामढ़ी, मधुबनी, गोपालगंज, सीवान, सारण, मुजफ्फरपुर, दरभंगा, वैशाली, समस्तीपुर, कटिहार, पूर्णिया, और शामिल हैं। इन जिलों में तेज हवा, मेघगर्जन और लगातार बारिश का असर देखने को मिल सकता है।
इन जिलों में भी कुछ क्षेत्रों को विशेष रूप से संवेदनशील माना गया है। मौसम विभाग के अनुसार शिवहर, सीतामढ़ी, पूर्णिया, भागलपुर और बांका में भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है। वहीं कटिहार और पश्चिम चंपारण में स्थिति और गंभीर हो सकती है, क्योंकि यहां अति भारी वर्षा का अनुमान लगाया गया है। ऐसे क्षेत्रों में जलजमाव, निचले इलाकों में पानी भरने और सड़क संपर्क प्रभावित होने की संभावना अधिक है।
विशेषज्ञों का कहना है कि भारी बारिश के साथ सबसे बड़ा खतरा वज्रपात और तेज हवाओं का होता है। ग्रामीण क्षेत्रों में खेतों में काम करने वाले किसान, खुले स्थानों पर रहने वाले लोग और छोटे व्यवसायी विशेष सावधानी बरतें। बिजली गिरने की घटनाएं मानसून के दौरान जानलेवा साबित हो सकती हैं। प्रशासन ने लोगों से खराब मौसम के दौरान अनावश्यक रूप से घर से बाहर न निकलने की अपील की है।
और आसपास के जिलों में भी मौसम का असर महसूस किया जा रहा है। राजधानी में सुबह से बादल छाए हुए हैं और कई इलाकों में हल्की बारिश दर्ज की गई है। हालांकि पटना में फिलहाल अत्यधिक भारी वर्षा का अलर्ट नहीं है, लेकिन मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में स्थिति बदलने की संभावना जताई है।
मौसम वैज्ञानिकों ने अगले कुछ दिनों के लिए मिश्रित स्थिति का पूर्वानुमान जारी किया है। उनका कहना है कि राज्य के अलग-अलग हिस्सों में कहीं तेज, कहीं मध्यम और कहीं हल्की बारिश दर्ज की जाएगी। इसका मतलब यह है कि पूरे बिहार में बारिश एक समान नहीं होगी, बल्कि क्षेत्रवार असर अलग-अलग दिखाई देगा।
मौसम सेवा केंद्र के निदेशक सीएन प्रभु के अनुसार बिहार के लिए राहत की बड़ी संभावना 15 जुलाई के बाद बन रही है। उन्होंने बताया कि मध्य जुलाई के बाद मानसूनी सिस्टम और अधिक सक्रिय हो सकता है, जिससे पटना सहित बिहार के अधिकांश हिस्सों में झमाझम बारिश शुरू होने की संभावना है। यह कृषि और जल संसाधनों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
हालांकि मौसम वैज्ञानिकों ने चिंता भी जताई है। उनका कहना है कि यदि जुलाई महीने में भी जून की तरह सामान्य से कम बारिश हुई, तो बिहार के कई हिस्सों में सूखे जैसी स्थिति बन सकती है। विशेष रूप से कृषि आधारित जिलों में कम वर्षा का सीधा असर खेती, धान रोपाई और जल उपलब्धता पर पड़ेगा। यही कारण है कि किसान समुदाय मानसून की अच्छी सक्रियता का इंतजार कर रहा है।
उत्तर और पूर्वी बिहार के कुछ हिस्सों जैसे दरभंगा, गोपालगंज और समस्तीपुर में अगले एक से दो दिनों तक मौसम काफी सक्रिय रहने की संभावना है। इन क्षेत्रों में गरज-चमक, वज्रपात और 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं। मौसम विभाग ने ऐसे क्षेत्रों में अतिरिक्त सतर्कता बरतने की सलाह दी है।
बारिश का असर तापमान पर भी देखने को मिलेगा। मौसम विभाग के अनुसार अगले एक सप्ताह के दौरान राज्य के कई हिस्सों में अधिकतम तापमान 3 से 4 डिग्री सेल्सियस तक गिर सकता है। इससे लोगों को भीषण गर्मी से कुछ राहत मिलने की उम्मीद है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि तापमान गिरने के बावजूद हवा में नमी बढ़ने से उमस बनी रह सकती है।
पटना और आसपास के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को उमस भरी गर्मी से फिलहाल पूरी राहत नहीं मिलने वाली। बारिश के बाद नमी का स्तर बढ़ने से चिपचिपी गर्मी महसूस हो सकती है। इसलिए मौसम में बदलाव के बावजूद असहजता बनी रह सकती है।
प्रशासन ने जिलों को अलर्ट मोड पर रहने के निर्देश दिए हैं। आपदा प्रबंधन विभाग स्थानीय प्रशासन के साथ लगातार संपर्क में है। संभावित जलजमाव, पेड़ गिरने या बिजली बाधित होने जैसी स्थितियों से निपटने के लिए तैयारी तेज कर दी गई है। राहत एवं बचाव दलों को भी सतर्क रहने को कहा गया है।
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अगले दो सप्ताह में अच्छी बारिश होती है तो धान रोपाई और खरीफ फसलों के लिए यह बेहद लाभदायक साबित होगी। मानसून की सक्रियता सीधे ग्रामीण अर्थव्यवस्था और कृषि उत्पादन को प्रभावित करती है।
कुल मिलाकर, बिहार में आज से शुरू होने वाला भारी बारिश का दौर मौसम के लिहाज से महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है। 16 जिलों में जारी चेतावनी को देखते हुए लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है। आंधी, वज्रपात और तेज बारिश के बीच सावधानी ही सुरक्षा का सबसे बड़ा उपाय है।


